मत्स्यपुराणम्/अध्यायः ६३

विकिस्रोतः तः
अत्र गम्यताम् : सञ्चरणम्, अन्वेषणम्
  1. अध्यायः १
  2. अध्यायः २
  3. अध्यायः ३
  4. अध्यायः ४
  5. अध्यायः ५
  6. अध्यायः ६
  7. अध्यायः ७
  8. अध्यायः ८
  9. अध्यायः ९
  10. अध्यायः १०
  11. अध्यायः ११
  12. अध्यायः १२
  13. अध्यायः १३
  14. अध्यायः १४
  15. अध्यायः १५
  16. अध्यायः १६
  17. अध्यायः १७
  18. अध्यायः १८
  19. अध्यायः १९
  20. अध्यायः २०
  21. अध्यायः २१
  22. अध्यायः २२
  23. अध्यायः २३
  24. अध्यायः २४
  25. अध्यायः २५
  26. अध्यायः २६
  27. अध्यायः २७
  28. अध्यायः २८
  29. अध्यायः २९
  30. अध्यायः ३०
  31. अध्यायः ३१
  32. अध्यायः ३२
  33. अध्यायः ३३
  34. अध्यायः ३४
  35. अध्यायः ३५
  36. अध्यायः ३६
  37. अध्यायः ३७
  38. अध्यायः ३८
  39. अध्यायः ३९
  40. अध्यायः ४०
  41. अध्यायः ४१
  42. अध्यायः ४२
  43. अध्यायः ४३
  44. अध्यायः ४४
  45. अध्यायः ४५
  46. अध्यायः ४६
  47. अध्यायः ४७
  48. अध्यायः ४८
  49. अध्यायः ४९
  50. अध्यायः ५०
  51. अध्यायः ५१
  52. अध्यायः ५२
  53. अध्यायः ५३
  54. अध्यायः ५४
  55. अध्यायः ५५
  56. अध्यायः ५६
  57. अध्यायः ५७
  58. अध्यायः ५८
  59. अध्यायः ५९
  60. अध्यायः ६०
  61. अध्यायः ६१
  62. अध्यायः ६२
  63. अध्यायः ६३
  64. अध्यायः ६४
  65. अध्यायः ६५
  66. अध्यायः ६६
  67. अध्यायः ६७
  68. अध्यायः ६८
  69. अध्यायः ६९
  70. अध्यायः ७०
  71. अध्यायः ७१
  72. अध्यायः ७२
  73. अध्यायः ७३
  74. अध्यायः ७४
  75. अध्यायः ७५
  76. अध्यायः ७६
  77. अध्यायः ७७
  78. अध्यायः ७८
  79. अध्यायः ७९
  80. अध्यायः ८०
  81. अध्यायः ८१
  82. अध्यायः ८२
  83. अध्यायः ८३
  84. अध्यायः ८४
  85. अध्यायः ८५
  86. अध्यायः ८६
  87. अध्यायः ८७
  88. अध्यायः ८८
  89. अध्यायः ८९
  90. अध्यायः ९०
  91. अध्यायः ९१
  92. अध्यायः ९२
  93. अध्यायः ९३
  94. अध्यायः ९४
  95. अध्यायः ९५
  96. अध्यायः ९६
  97. अध्यायः ९७
  98. अध्यायः ९८
  99. अध्यायः ९९
  100. अध्यायः १००
  101. अध्यायः १०१
  102. अध्यायः १०२
  103. अध्यायः १०३
  104. अध्यायः १०४
  105. अध्यायः १०५
  106. अध्यायः १०६
  107. अध्यायः १०७
  108. अध्यायः १०८
  109. अध्यायः १०९
  110. अध्यायः ११०
  111. अध्यायः १११
  112. अध्यायः ११२
  113. अध्यायः ११३
  114. अध्यायः ११४
  115. अध्यायः ११५
  116. अध्यायः ११६
  117. अध्यायः ११७
  118. अध्यायः ११८
  119. अध्यायः ११९
  120. अध्यायः १२०
  121. अध्यायः १२१
  122. अध्यायः १२२
  123. अध्यायः १२३
  124. अध्यायः १२४
  125. अध्यायः १२५
  126. अध्यायः १२६
  127. अध्यायः १२७
  128. अध्यायः १२८
  129. अध्यायः १२९
  130. अध्यायः १३०
  131. अध्यायः १३१
  132. अध्यायः १३२
  133. अध्यायः १३३
  134. अध्यायः १३४
  135. अध्यायः १३५
  136. अध्यायः १३६
  137. अध्यायः १३७
  138. अध्यायः १३८
  139. अध्यायः १३९
  140. अध्यायः १४०
  141. अध्यायः १४१
  142. अध्यायः १४२
  143. अध्यायः १४३
  144. अध्यायः १४४
  145. अध्यायः १४५
  146. अध्यायः १४६
  147. अध्यायः १४७
  148. अध्यायः १४८
  149. अध्यायः १४९
  150. अध्यायः १५०
  151. अध्यायः १५१
  152. अध्यायः १५२
  153. अध्यायः १५३
  154. अध्यायः १५४
  155. अध्यायः १५५
  156. अध्यायः १५६
  157. अध्यायः १५७
  158. अध्यायः १५८
  159. अध्यायः १५९
  160. अध्यायः १६०
  161. अध्यायः १६१
  162. अध्यायः १६२
  163. अध्यायः १६३
  164. अध्यायः १६४
  165. अध्यायः १६५
  166. अध्यायः १६६
  167. अध्यायः १६७
  168. अध्यायः १६८
  169. अध्यायः १६९
  170. अध्यायः १७०
  171. अध्यायः १७१
  172. अध्यायः १७२
  173. अध्यायः १७३
  174. अध्यायः १७४
  175. अध्यायः १७५
  176. अध्यायः १७६
  177. अध्यायः १७७
  178. अध्यायः १७८
  179. अध्यायः १७९
  180. अध्यायः १८०
  181. अध्यायः १८१
  182. अध्यायः १८२
  183. अध्यायः १८३
  184. अध्यायः १८४
  185. अध्यायः १८५
  186. अध्यायः १८६
  187. अध्यायः १८७
  188. अध्यायः १८८
  189. अध्यायः १८९
  190. अध्यायः १९०
  191. अध्यायः १९१
  192. अध्यायः १९२
  193. अध्यायः १९३
  194. अध्यायः १९४
  195. अध्यायः १९५
  196. अध्यायः १९६
  197. अध्यायः १९७
  198. अध्यायः १९८
  199. अध्यायः १९९
  200. अध्यायः २००
  201. अध्यायः २०१
  202. अध्यायः २०२
  203. अध्यायः २०३
  204. अध्यायः २०४
  205. अध्यायः २०५
  206. अध्यायः २०६
  207. अध्यायः २०७
  208. अध्यायः २०८
  209. अध्यायः २०९
  210. अध्यायः २१०
  211. अध्यायः २११
  212. अध्यायः २१२
  213. अध्यायः २१३
  214. अध्यायः २१४
  215. अध्यायः २१५
  216. अध्यायः २१६
  217. अध्यायः २१७
  218. अध्यायः २१८
  219. अध्यायः २१९
  220. अध्यायः २२०
  221. अध्यायः २२१
  222. अध्यायः २२२
  223. अध्यायः २२३
  224. अध्यायः २२४
  225. अध्यायः २२५
  226. अध्यायः २२६
  227. अध्यायः २२७
  228. अध्यायः २२८
  229. अध्यायः २२९
  230. अध्यायः २३०
  231. अध्यायः २३१
  232. अध्यायः २३२
  233. अध्यायः २३३
  234. अध्यायः २३४
  235. अध्यायः २३५
  236. अध्यायः २३६
  237. अध्यायः २३७
  238. अध्यायः २३८
  239. अध्यायः २३९
  240. अध्यायः २४०
  241. अध्यायः २४१
  242. अध्यायः २४२
  243. अध्यायः २४३
  244. अध्यायः २४४
  245. अध्यायः २४५
  246. अध्यायः २४६
  247. अध्यायः २४७
  248. अध्यायः २४८
  249. अध्यायः २४९
  250. अध्यायः २५०
  251. अध्यायः २५१
  252. अध्यायः २५२
  253. अध्यायः २५३
  254. अध्यायः २५४
  255. अध्यायः २५५
  256. अध्यायः २५६
  257. अध्यायः २५७
  258. अध्यायः २५८
  259. अध्यायः २५९
  260. अध्यायः २६०
  261. अध्यायः २६१
  262. अध्यायः २६२
  263. अध्यायः २६३
  264. अध्यायः २६४
  265. अध्यायः २६५
  266. अध्यायः २६६
  267. अध्यायः २६७
  268. अध्यायः २६८
  269. अध्यायः २६९
  270. अध्यायः २७०
  271. अध्यायः २७१
  272. अध्यायः २७२
  273. अध्यायः २७३
  274. अध्यायः २७४
  275. अध्यायः २७५
  276. अध्यायः २७६
  277. अध्यायः २७७
  278. अध्यायः २७८
  279. अध्यायः २७९
  280. अध्यायः २८०
  281. अध्यायः २८१
  282. अध्यायः २८२
  283. अध्यायः २८३
  284. अध्यायः २८४
  285. अध्यायः २८५
  286. अध्यायः २८६
  287. अध्यायः २८७
  288. अध्यायः २८८
  289. अध्यायः २८९
  290. अध्यायः २९०
  291. अध्यायः २९१

रसकल्याणिनीतृतीयाव्रतकथनम्।

अथान्यामपिवक्ष्यामि तृतीयां पापनाशिनीम्।
रसकल्याणिनीमेतां पुरा कल्पविदो विदुः।। ६३.१ ।।

माघमासे तु संप्राप्ते तृतीयां शुक्लपक्षतः।
प्रातर्गव्येन पयसा तिलैः स्नानं समाचरेत्।। ६३.२ ।।

स्नापयेन्‌ मधुना देवीं तथैवेक्षुरसेन च।
दक्षिणाङ्गानि संपूज्य ततो वामानि पूजयेत्।। ६३.३ ।।

ललितायै नमो देव्याः पादौ गुल्फौ ततोऽर्चयेत्।
जङ्घाञ्जानुं तथा शान्त्यै तथैवोरुं श्रियै नमः।। ६३.४ ।।

मदालसायै तु कटिममलायै तथोदरम्।
स्तनौ मदनवासिन्यै कुमुदायै च कन्धराम्।। ६३.५ ।।

भुजं भुजाग्रं माधव्ये कमलायै मुखस्मिते।
भ्रूललाटे च रुद्राण्यै शङ्करायै तथालकान्।। ६३.६ ।।

मुकुटं विश्ववासिन्यै शिरः कान्त्यै तथार्चयेत्।
मदनायै ललाटन्तु मोहनायै पुनर्भ्रुवौ।। ६३.७ ।।

नेत्रे चन्द्रार्द्धधारिण्यै तुष्ट्यै च वदनं पुनः।
उत्कण्ठिन्यै नमः कण्ठममृतायै नमः स्तनौ।। ६३.८ ।।

रम्भायै वामकुक्षिञ्च विशोकायै नमः कटिम्।
हृदयं मन्मथाधिष्ण्यै पाटलायै तथोदरम्।। ६३.९ ।।

कटिं सुरतवासिन्यै तथोरुञ्चम्पकप्रिये।
जानुजङ्घे नमोगौर्यै गायत्र्यै घुटिके नमः।। ६३.१० ।।

धराधरायै पादौ तु विश्वकार्यै नमः शिरः।
नमो भवान्यै कामिन्यै कामदेव्यै जगत् प्रिये।। ६३.११ ।।

एवं संपूज्य विधिवत् द्विजदाम्पत्यमर्चयेत्।
भोजयित्वान्नपानेन मधुरेण विमत्सरः।। ६३.१२ ।।

जलपूरितं तथा कुम्भं शुक्लाम्बरयुगद्वयम्।
दत्त्वा सुवर्णकमलं गन्दमाल्यैः समर्चयेत्।। ६३.१३ ।।

प्रीयतामत्र कुमुदा गृह्णीयाल्लवणव्रतम्।
अनेन विधिना देवीं मासि मासि सदार्चयेत्।। ६३.१४ ।।

लवणं वर्जयेन्माघे फाल्गुने च गुडं पुनः।
तैलं राजिं तथा चैत्रे वर्ज्ये च मधुमाधवे।। ६३.१५ ।।

पानकं ज्येष्ठमासे तु आषाढे चाथ जीरकम्।
श्रावणे वर्जयेत् क्षीरं दधि भाद्रपदे तथा।। ६३.१६ ।।

घृतमाश्वयुजे तद्वत् ऊर्जै वर्ज्यञ्च माक्षिकम्।
धान्यकं मार्गशीर्षे तु पौषे वर्ज्या च शर्करा।। ६३.१७ ।।

व्रतान्ते करकं पूर्णमेतेषां मासि मासि च।
दद्याद्‌ द्विकालवेलायां पूर्णपात्रेण संयुतम्।। ६३.१८ ।।

लड्डुकान् श्वेतवर्णांश्च संयावमथ पूरिकाः।
घारिकानप्यपूपांश्च पिष्टापूपांश्च मण्डकान्।। ६३.१९ ।।

क्षीरं शाकञ्च दध्यन्नमिण्‌ड्रर्यों शोकवर्तिकाः।
माघादि क्रमशो दद्यादेतानि करकोपरि।। ६३.२० ।।

कुमुदा माधवी गौरी रम्भ भद्रा जया शिवा।
उमारतिः सती तद्वन्मङ्गला रतिलालसा।। ६३.२१ ।।

क्रमान्माघादि सर्वत्र प्रीयतामिति कीर्तयेत्।
सर्वत्र पञ्चगव्येन प्राशनं समुदाहृतम्।।
उपवासी भवेन्नित्यमशक्ते नक्तमिष्यते।। ६३.२२ ।।

पुनर्माघे तु संप्राप्ते शर्करां करकोपरि।

कृत्वा तु काञ्चनीं गौरीं पञ्चरत्नसमन्विताम्।। ६३.२३ ।।

हैमीमङ्गुष्ठमात्राञ्च साक्षसूत्रकमण्डलुम्।
चतुर्भुजामिन्दुयुतां सितनेत्रपटावृताम्।। ६३.२४ ।।

तद्वद् गोमिथुनं शुक्लं सुवर्णास्यं सिताम्बरम्।
सवस्त्रभाजनं दद्याद् भवानी प्रीयतामिति।। ६३.२५ ।।

अनेन विधिनायस्तु रसकल्याणिनी व्रतम्।
कुर्यात्स सर्वपापेभ्य स्तत्क्षणादेवमुच्यते।। ६२.२६ ।।

नवार्बुदसहस्रन्तु न दुःखी जायते नरः।
सुवर्णकमलं गौरी मासि मासि ददन्नरः।
अग्निष्टोमसहस्रस्य यत्‌ फलं तदवाप्नुयात्।। ६३.२७ ।।

नारी वा कुरुते या तु कुमारी वा वारनने।
विधवा या तथा नारी सापि तत् फलमाप्नुयात्।
सौभाग्यरोग्यसंपन्ना गौरी लोके महीयते।। ६३.२८ ।।

इति पठति श्रृणोति यः प्रसङ्गात्।
कलिकलुषविमुक्तः पार्वती लोकमेति।
मतिमपि च नराणां यो ददाति प्रियार्थम्।
विबुधपतिविमाने नायकः स्यादमोघः।। ६३.२९ ।।