मत्स्यपुराणम्/अध्यायः २८५

विकिस्रोतः तः
अत्र गम्यताम् : सञ्चरणम्, अन्वेषणम्
  1. अध्यायः १
  2. अध्यायः २
  3. अध्यायः ३
  4. अध्यायः ४
  5. अध्यायः ५
  6. अध्यायः ६
  7. अध्यायः ७
  8. अध्यायः ८
  9. अध्यायः ९
  10. अध्यायः १०
  11. अध्यायः ११
  12. अध्यायः १२
  13. अध्यायः १३
  14. अध्यायः १४
  15. अध्यायः १५
  16. अध्यायः १६
  17. अध्यायः १७
  18. अध्यायः १८
  19. अध्यायः १९
  20. अध्यायः २०
  21. अध्यायः २१
  22. अध्यायः २२
  23. अध्यायः २३
  24. अध्यायः २४
  25. अध्यायः २५
  26. अध्यायः २६
  27. अध्यायः २७
  28. अध्यायः २८
  29. अध्यायः २९
  30. अध्यायः ३०
  31. अध्यायः ३१
  32. अध्यायः ३२
  33. अध्यायः ३३
  34. अध्यायः ३४
  35. अध्यायः ३५
  36. अध्यायः ३६
  37. अध्यायः ३७
  38. अध्यायः ३८
  39. अध्यायः ३९
  40. अध्यायः ४०
  41. अध्यायः ४१
  42. अध्यायः ४२
  43. अध्यायः ४३
  44. अध्यायः ४४
  45. अध्यायः ४५
  46. अध्यायः ४६
  47. अध्यायः ४७
  48. अध्यायः ४८
  49. अध्यायः ४९
  50. अध्यायः ५०
  51. अध्यायः ५१
  52. अध्यायः ५२
  53. अध्यायः ५३
  54. अध्यायः ५४
  55. अध्यायः ५५
  56. अध्यायः ५६
  57. अध्यायः ५७
  58. अध्यायः ५८
  59. अध्यायः ५९
  60. अध्यायः ६०
  61. अध्यायः ६१
  62. अध्यायः ६२
  63. अध्यायः ६३
  64. अध्यायः ६४
  65. अध्यायः ६५
  66. अध्यायः ६६
  67. अध्यायः ६७
  68. अध्यायः ६८
  69. अध्यायः ६९
  70. अध्यायः ७०
  71. अध्यायः ७१
  72. अध्यायः ७२
  73. अध्यायः ७३
  74. अध्यायः ७४
  75. अध्यायः ७५
  76. अध्यायः ७६
  77. अध्यायः ७७
  78. अध्यायः ७८
  79. अध्यायः ७९
  80. अध्यायः ८०
  81. अध्यायः ८१
  82. अध्यायः ८२
  83. अध्यायः ८३
  84. अध्यायः ८४
  85. अध्यायः ८५
  86. अध्यायः ८६
  87. अध्यायः ८७
  88. अध्यायः ८८
  89. अध्यायः ८९
  90. अध्यायः ९०
  91. अध्यायः ९१
  92. अध्यायः ९२
  93. अध्यायः ९३
  94. अध्यायः ९४
  95. अध्यायः ९५
  96. अध्यायः ९६
  97. अध्यायः ९७
  98. अध्यायः ९८
  99. अध्यायः ९९
  100. अध्यायः १००
  101. अध्यायः १०१
  102. अध्यायः १०२
  103. अध्यायः १०३
  104. अध्यायः १०४
  105. अध्यायः १०५
  106. अध्यायः १०६
  107. अध्यायः १०७
  108. अध्यायः १०८
  109. अध्यायः १०९
  110. अध्यायः ११०
  111. अध्यायः १११
  112. अध्यायः ११२
  113. अध्यायः ११३
  114. अध्यायः ११४
  115. अध्यायः ११५
  116. अध्यायः ११६
  117. अध्यायः ११७
  118. अध्यायः ११८
  119. अध्यायः ११९
  120. अध्यायः १२०
  121. अध्यायः १२१
  122. अध्यायः १२२
  123. अध्यायः १२३
  124. अध्यायः १२४
  125. अध्यायः १२५
  126. अध्यायः १२६
  127. अध्यायः १२७
  128. अध्यायः १२८
  129. अध्यायः १२९
  130. अध्यायः १३०
  131. अध्यायः १३१
  132. अध्यायः १३२
  133. अध्यायः १३३
  134. अध्यायः १३४
  135. अध्यायः १३५
  136. अध्यायः १३६
  137. अध्यायः १३७
  138. अध्यायः १३८
  139. अध्यायः १३९
  140. अध्यायः १४०
  141. अध्यायः १४१
  142. अध्यायः १४२
  143. अध्यायः १४३
  144. अध्यायः १४४
  145. अध्यायः १४५
  146. अध्यायः १४६
  147. अध्यायः १४७
  148. अध्यायः १४८
  149. अध्यायः १४९
  150. अध्यायः १५०
  151. अध्यायः १५१
  152. अध्यायः १५२
  153. अध्यायः १५३
  154. अध्यायः १५४
  155. अध्यायः १५५
  156. अध्यायः १५६
  157. अध्यायः १५७
  158. अध्यायः १५८
  159. अध्यायः १५९
  160. अध्यायः १६०
  161. अध्यायः १६१
  162. अध्यायः १६२
  163. अध्यायः १६३
  164. अध्यायः १६४
  165. अध्यायः १६५
  166. अध्यायः १६६
  167. अध्यायः १६७
  168. अध्यायः १६८
  169. अध्यायः १६९
  170. अध्यायः १७०
  171. अध्यायः १७१
  172. अध्यायः १७२
  173. अध्यायः १७३
  174. अध्यायः १७४
  175. अध्यायः १७५
  176. अध्यायः १७६
  177. अध्यायः १७७
  178. अध्यायः १७८
  179. अध्यायः १७९
  180. अध्यायः १८०
  181. अध्यायः १८१
  182. अध्यायः १८२
  183. अध्यायः १८३
  184. अध्यायः १८४
  185. अध्यायः १८५
  186. अध्यायः १८६
  187. अध्यायः १८७
  188. अध्यायः १८८
  189. अध्यायः १८९
  190. अध्यायः १९०
  191. अध्यायः १९१
  192. अध्यायः १९२
  193. अध्यायः १९३
  194. अध्यायः १९४
  195. अध्यायः १९५
  196. अध्यायः १९६
  197. अध्यायः १९७
  198. अध्यायः १९८
  199. अध्यायः १९९
  200. अध्यायः २००
  201. अध्यायः २०१
  202. अध्यायः २०२
  203. अध्यायः २०३
  204. अध्यायः २०४
  205. अध्यायः २०५
  206. अध्यायः २०६
  207. अध्यायः २०७
  208. अध्यायः २०८
  209. अध्यायः २०९
  210. अध्यायः २१०
  211. अध्यायः २११
  212. अध्यायः २१२
  213. अध्यायः २१३
  214. अध्यायः २१४
  215. अध्यायः २१५
  216. अध्यायः २१६
  217. अध्यायः २१७
  218. अध्यायः २१८
  219. अध्यायः २१९
  220. अध्यायः २२०
  221. अध्यायः २२१
  222. अध्यायः २२२
  223. अध्यायः २२३
  224. अध्यायः २२४
  225. अध्यायः २२५
  226. अध्यायः २२६
  227. अध्यायः २२७
  228. अध्यायः २२८
  229. अध्यायः २२९
  230. अध्यायः २३०
  231. अध्यायः २३१
  232. अध्यायः २३२
  233. अध्यायः २३३
  234. अध्यायः २३४
  235. अध्यायः २३५
  236. अध्यायः २३६
  237. अध्यायः २३७
  238. अध्यायः २३८
  239. अध्यायः २३९
  240. अध्यायः २४०
  241. अध्यायः २४१
  242. अध्यायः २४२
  243. अध्यायः २४३
  244. अध्यायः २४४
  245. अध्यायः २४५
  246. अध्यायः २४६
  247. अध्यायः २४७
  248. अध्यायः २४८
  249. अध्यायः २४९
  250. अध्यायः २५०
  251. अध्यायः २५१
  252. अध्यायः २५२
  253. अध्यायः २५३
  254. अध्यायः २५४
  255. अध्यायः २५५
  256. अध्यायः २५६
  257. अध्यायः २५७
  258. अध्यायः २५८
  259. अध्यायः २५९
  260. अध्यायः २६०
  261. अध्यायः २६१
  262. अध्यायः २६२
  263. अध्यायः २६३
  264. अध्यायः २६४
  265. अध्यायः २६५
  266. अध्यायः २६६
  267. अध्यायः २६७
  268. अध्यायः २६८
  269. अध्यायः २६९
  270. अध्यायः २७०
  271. अध्यायः २७१
  272. अध्यायः २७२
  273. अध्यायः २७३
  274. अध्यायः २७४
  275. अध्यायः २७५
  276. अध्यायः २७६
  277. अध्यायः २७७
  278. अध्यायः २७८
  279. अध्यायः २७९
  280. अध्यायः २८०
  281. अध्यायः २८१
  282. अध्यायः २८२
  283. अध्यायः २८३
  284. अध्यायः २८४
  285. अध्यायः २८५
  286. अध्यायः २८६
  287. अध्यायः २८७
  288. अध्यायः २८८
  289. अध्यायः २८९
  290. अध्यायः २९०
  291. अध्यायः २९१

विश्वचक्राख्यमहादानविधिवर्णनम्।

मत्स्य उवाच।
अथातः संप्रवक्ष्यामि महादानमनुत्तमम्।
विश्वचक्रमितिख्यातं महापातकनाशनम् ।। २८५.१


तपनीयस्य शुद्धस्य विषुवादिषु कारयेत्।
श्रेष्ठं पलसहस्रेण तदर्द्धेन तु मध्यमम् ।। २८५.२

तस्यार्द्धेन कनिष्ठं स्यात् विश्वचक्रमुदाहृतम्।
अन्यद्विंशत्पलादूर्ध्वमशक्तोऽपि निवेदयेत् ।। २८५.३

षोडशारं ततश्चक्रं भ्रमन्नेम्यष्टकावृतम्।
नाभिपद्मे स्थितं विष्णुं योगारूढ़ं चतुर्भुजम्।। २८५.४


शङ्कचक्रेऽस्य पार्श्वे तु देव्यष्टक समावृतम्।
द्वितीयावरणे तद्वत् पूर्वतो जलशायिनम् ।। २८५.५

अत्रिर्भृगुर्वशिष्ठश्च ब्रह्मा कश्यप एव च।
मत्स्यः कूर्मो वराहश्च नरसिंहोऽथ वामनः ।। २८५.६

रामो रामश्च कृष्णश्च बुद्धः कल्कीति च क्रमात्।
तृतीयावरणे गौरी मातृभिर्वसुभिर्युता ।। २८५.७

चतुर्थे द्वादशादित्या वेदाश्चत्वार एव च।
पञ्चमे पञ्चभूतानि रुद्राश्चैकादशैव तु ।। २८५.८

लोकपालाष्टकं षष्ठे दिङ्मातङ्गास्तथैव च।
सप्तमेऽस्त्राणि सर्वाणि मङ्गलानिच कारयेत् ।। २८५.९

अन्तरान्तरतो देवान् विन्यसेदष्टमे पुनः।
तुला पुरुषवच्छेषं समन्तात् परिकल्पयेत् ।। २८५.१०

ऋत्विग्मण्डपसम्भार भूषणाच्छादनादिकम्।
विश्वचक्रं ततः कुर्यात् कृष्णाजिन तिलोपरि ।। २८५.११

तथाष्टादश धान्यानि रसांश्च लवणादिकान्।
पूर्णकुम्भाष्टकञ्चैव वस्त्राणि विविधानि च ।। २८५.१२

माल्येक्षुफलरत्नानि वितानञ्चापि कारयेत्।
ततो मङ्गलशब्देन स्नातः शुक्लाम्बरो गृही
होमाधिवासनान्ते वै गृहीतकुसुमाञ्जलिः ।। २८५.१३

इममुच्चारयेन्मन्त्रन्त्रिः कृत्वा तु प्रदक्षिणम्।
नमो विश्वमयायेति विश्वचक्रान्मने नमः ।। २८५.१४

परमानन्दरूपी त्वं पाहिनः पापकर्दमात्।
तेजो मयमिदं यस्मात् सदा पश्यन्ति योगिनः ।। २८५.१५

हृदि तत्वं गुणातीतं विश्व चक्रं नमाम्यहम्।
वासुदेवे स्थितं चक्रं चक्रमध्ये तु माधवः ।। २८५.१६

अन्योन्याधाररूपेण प्रणमामि स्थिताविह।
विश्वचक्रमिदं यस्मात् सर्वपापहरं परम् ।। २८५.१७

आयुधञ्चापि वासश्च भवादुद्धर मामतः।
इत्यामन्त्र्य च यो दद्याद्विश्वचक्रं विमत्सरः ।। २८५.१८

विमुक्तः सर्वपापेभ्यो विष्णुलोके महीयते।
वैकुण्ठलोकमासाद्य चतुर्बाहुः सनातनः ।। २८५.१९

सेव्यतेऽप्सरसां सङ्घैस्तिष्ठेत् कल्पशतत्रयम्।
प्रणमेद् द्वादश कृत्वा विश्वचक्रं दिने दिने
तस्यायुर्वर्धते नित्यं लक्ष्मीश्च विपुला भवेत् ।। २८५.२०

इति सकलजगत्सुराधिवासं वितरति यस्तपनीयषोडशारम्।
हरिभवनमुपागतः ससिद्धैश्चिरमभिगम्य नमस्यते शिरोभिः ।। २८५.२१

शुभदर्शनतां प्रयाति शत्रोर्मदनसुदर्शनताञ्च कामिनीभ्यः।
स सुदर्शनकेशवानुरूपः कनकसुदर्शनदानदग्धपापः ।। २८५.२२

कृतगुरुदुरितानि षोडशारप्रवितरणे प्रवराकृतिर्मुरारेः।
अभिभवति भवोद् भवन्ति भीत्या भवमभितो भुवने भयानि भूयः ।। २८५.२३