ब्रह्मपुराणम्/अध्यायः १६०

विकिस्रोतः तः
Jump to navigation Jump to search
← अध्यायः १५९ ब्रह्मपुराणम्
अध्यायः १६०
वेदव्यासः
अध्यायः १६१ →
  1. अध्यायः १
  2. अध्यायः २
  3. अध्यायः ३
  4. अध्यायः ४
  5. अध्यायः ५
  6. अध्यायः ६
  7. अध्यायः ७
  8. अध्यायः ८
  9. अध्यायः ९
  10. अध्यायः १०
  11. अध्यायः ११
  12. अध्यायः १२
  13. अध्यायः १३
  14. अध्यायः १४
  15. अध्यायः १५
  16. अध्यायः १६
  17. अध्यायः १७
  18. अध्यायः १८
  19. अध्यायः १९
  20. अध्यायः २०
  21. अध्यायः २१
  22. अध्यायः २२
  23. अध्यायः २३
  24. अध्यायः २४
  25. अध्यायः २५
  26. अध्यायः २६
  27. अध्यायः २७
  28. अध्यायः २८
  29. अध्यायः २९
  30. अध्यायः ३०
  31. अध्यायः ३१
  32. अध्यायः ३२
  33. अध्यायः ३३
  34. अध्यायः ३४
  35. अध्यायः ३५
  36. अध्यायः ३६
  37. अध्यायः ३७
  38. अध्यायः ३८
  39. अध्यायः ३९
  40. अध्यायः ४०
  41. अध्यायः ४१
  42. अध्यायः ४२
  43. अध्यायः ४३
  44. अध्यायः ४४
  45. अध्यायः ४५
  46. अध्यायः ४६
  47. अध्यायः ४७
  48. अध्यायः ४८
  49. अध्यायः ४९
  50. अध्यायः ५०
  51. अध्यायः ५१
  52. अध्यायः ५२
  53. अध्यायः ५३
  54. अध्यायः ५४
  55. अध्यायः ५५
  56. अध्यायः ५६
  57. अध्यायः ५७
  58. अध्यायः ५८
  59. अध्यायः ५९
  60. अध्यायः ६०
  61. अध्यायः ६१
  62. अध्यायः ६२
  63. अध्यायः ६३
  64. अध्यायः ६४
  65. अध्यायः ६५
  66. अध्यायः ६६
  67. अध्यायः ६७
  68. अध्यायः ६८
  69. अध्यायः ६९
  70. अध्यायः ७०
  71. अध्यायः ७१
  72. अध्यायः ७२
  73. अध्यायः ७३
  74. अध्यायः ७४
  75. अध्यायः ७५
  76. अध्यायः ७६
  77. अध्यायः ७७
  78. अध्यायः ७८
  79. अध्यायः ७९
  80. अध्यायः ८०
  81. अध्यायः ८१
  82. अध्यायः ८२
  83. अध्यायः ८३
  84. अध्यायः ८४
  85. अध्यायः ८५
  86. अध्यायः ८६
  87. अध्यायः ८७
  88. अध्यायः ८८
  89. अध्यायः ८९
  90. अध्यायः ९०
  91. अध्यायः ९१
  92. अध्यायः ९२
  93. अध्यायः ९३
  94. अध्यायः ९४
  95. अध्यायः ९५
  96. अध्यायः ९६
  97. अध्यायः ९७
  98. अध्यायः ९८
  99. अध्यायः ९९
  100. अध्यायः १००
  101. अध्यायः १०१
  102. अध्यायः १०२
  103. अध्यायः १०३
  104. अध्यायः १०४
  105. अध्यायः १०५
  106. अध्यायः १०६
  107. अध्यायः १०७
  108. अध्यायः १०८
  109. अध्यायः १०९
  110. अध्यायः ११०
  111. अध्यायः १११
  112. अध्यायः ११२
  113. अध्यायः ११३
  114. अध्यायः ११४
  115. अध्यायः ११५
  116. अध्यायः ११६
  117. अध्यायः ११७
  118. अध्यायः ११८
  119. अध्यायः ११९
  120. अध्यायः १२०
  121. अध्यायः १२१
  122. अध्यायः १२२
  123. अध्यायः १२३
  124. अध्यायः १२४
  125. अध्यायः १२५
  126. अध्यायः १२६
  127. अध्यायः १२७
  128. अध्यायः १२८
  129. अध्यायः १२९
  130. अध्यायः १३०
  131. अध्यायः १३१
  132. अध्यायः १३२
  133. अध्यायः १३३
  134. अध्यायः १३४
  135. अध्यायः १३५
  136. अध्यायः १३६
  137. अध्यायः १३७
  138. अध्यायः १३८
  139. अध्यायः १३९
  140. अध्यायः १४०
  141. अध्यायः १४१
  142. अध्यायः १४२
  143. अध्यायः १४३
  144. अध्यायः १४४
  145. अध्यायः १४५
  146. अध्यायः १४६
  147. अध्यायः १४७
  148. अध्यायः १४८
  149. अध्यायः १४९
  150. अध्यायः १५०
  151. अध्यायः १५१
  152. अध्यायः १५२
  153. अध्यायः १५३
  154. अध्यायः १५४
  155. अध्यायः १५५
  156. अध्यायः १५६
  157. अध्यायः १५७
  158. अध्यायः १५८
  159. अध्यायः १५९
  160. अध्यायः १६०
  161. अध्यायः १६१
  162. अध्यायः १६२
  163. अध्यायः १६३
  164. अध्यायः १६४
  165. अध्यायः १६५
  166. अध्यायः १६६
  167. अध्यायः १६७
  168. अध्यायः १६८
  169. अध्यायः १६९
  170. अध्यायः १७०
  171. अध्यायः १७१
  172. अध्यायः १७२
  173. अध्यायः १७३
  174. अध्यायः १७४
  175. अध्यायः १७५
  176. अध्यायः १७६
  177. अध्यायः १७७
  178. अध्यायः १७८
  179. अध्यायः १७९
  180. अध्यायः १८०
  181. अध्यायः १८१
  182. अध्यायः १८२
  183. अध्यायः १८३
  184. अध्यायः १८४
  185. अध्यायः १८५
  186. अध्यायः १८६
  187. अध्यायः १८७
  188. अध्यायः १८८
  189. अध्यायः १८९
  190. अध्यायः १९०
  191. अध्यायः १९१
  192. अध्यायः १९२
  193. अध्यायः १९३
  194. अध्यायः १९४
  195. अध्यायः १९५
  196. अध्यायः १९६
  197. अध्यायः १९७
  198. अध्यायः १९८
  199. अध्यायः १९९
  200. अध्यायः २००
  201. अध्यायः २०१
  202. अध्यायः २०२
  203. अध्यायः २०३
  204. अध्यायः २०४
  205. अध्यायः २०५
  206. अध्यायः २०६
  207. अध्यायः २०७
  208. अध्यायः २०८
  209. अध्यायः २०९
  210. अध्यायः २१०
  211. अध्यायः २११
  212. अध्यायः २१२
  213. अध्यायः २१३
  214. अध्यायः २१४
  215. अध्यायः २१५
  216. अध्यायः २१६
  217. अध्यायः २१७
  218. अध्यायः २१८
  219. अध्यायः २१९
  220. अध्यायः २२०
  221. अध्यायः २२१
  222. अध्यायः २२२
  223. अध्यायः २२३
  224. अध्यायः २२४
  225. अध्यायः २२५
  226. अध्यायः २२६
  227. अध्यायः २२७
  228. अध्यायः २२८
  229. अध्यायः २२९
  230. अध्यायः २३०
  231. अध्यायः २३१
  232. अध्यायः २३२
  233. अध्यायः २३३
  234. अध्यायः २३४
  235. अध्यायः २३५
  236. अध्यायः २३६
  237. अध्यायः २३७
  238. अध्यायः २३८
  239. अध्यायः २३९
  240. अध्यायः २४०
  241. अध्यायः २४१
  242. अध्यायः २४२
  243. अध्यायः २४३
  244. अध्यायः २४४
  245. अध्यायः २४५
  246. अध्यायः २४६

देवागमतीर्थवर्णनम्
ब्रह्मोवाच
देवागमं नाम तीर्थं सर्वक्रामप्रदं शिवम्।
भुक्तिमुक्तिप्रदं नृणां पितॄणां तृप्तिकारकम्।। १६०.१ ।।

तत्र वृत्तं समाख्यास्ये तव यत्नेन नारद।
देवानामसुराणां च स्पर्धाऽभूद्धनहेतवे।। १६०.२ ।।

स्वर्गः सुराणामभवदसुराणामिलाऽभवत्।
कर्मभूमिमवष्टभ्य असुराः सर्वतोऽभवन्।। १६०.३ ।।

देवानां यज्ञभागांश्च दातॄन्घ्नन्त्यसुरास्ततः।
ततः सुरगणाः सर्वे यज्ञभागैर्विना कृताः।। १६०.४ ।।

व्यथिता मामुपाजग्मुः किं कृत्यमिति चाब्रुवन्।
मया चोक्ताः सुरगणा युद्धे जित्वाऽसुरान्बलात्।। १६०.५ ।।

भुवं प्राप्स्यथ कर्माणि हवींषि च यशांसि च।
तथेत्युक्त्वा गता देवा भूमिं ते समरार्थिनः।। १६०.६ ।।

दैत्याश्च दानवाश्चैव राक्षसा बलदर्पिताः।
एकीभूत्व ययुस्ते।़पि जयिनो युद्धकाङ्‌क्षिणः।। १६०.७ ।।

अहिर्वृत्रो बलिस्त्वाष्ट्रिर्नमुचिः शम्बरो मयः।
एते चान्ये च बहवो योद्धारो बलदर्पिताः।। १६०.८ ।।

अग्नरिन्द्रोऽथ वरुणस्त्वष्टा पूषा तथाऽश्विनौ।
मरुतो लोकपालाश्च नानायुद्धविशारदाः।। १६०.९ ।।

ते दानवाः सर्व एव याम्यां वै दिशि संगरे।
अकुर्वन्त महायत्नं दक्षिणार्णवसंस्थिताः।। १६०.१० ।।

त्रिकूटः पर्वतश्रेष्ठो राक्षसानां पुराऽभवत्।
तद्वनेन ययुः सर्वे तैः सार्धं दक्षिणार्णवम्।। १६०.११ ।।

सर्वेषां मेलनं यत्र पर्वतो मलयस्तु सः।
मलयस्यापि देशोऽसौ देवारीणामभूत्तदा।। १६०.१२ ।।

देवानां गौतमीतीरे तत्र संनिहितः शिवः।
इति तेषां समायोगो देवानामभवत्किल।। १६०.१३ ।।

देवाः स्वरथमारूढास्तत्र तत्र समागमन्।
गौतम्याः सरिदम्बायाः पुलिने विमलाशयाः।। १६०.१४ ।।

प्रसन्नाऽभीष्टदा या स्यात् पितॄणामखिलस्य तु।
ततो देवगणाः सर्वे स्तुत्वा देवं महेश्वरम्।।

अभयं चिन्तयामासुस्ते सर्वेऽथ परस्परम्।। १६०.१५ ।।

देवा ऊचुः
अत्राप्युपायः कोऽस्माकं निर्जितानां परैर्हठात्।
एकमेवात्र नः श्रेयो विजयो वाऽथवा मृतिः।।

सपत्नैरभिभूतानां जीवितं धिङ्मनस्विनाम्।। १६०.१६ ।।

ब्रह्मोवाच
एतस्मिन्नन्तरे पुत्र वागुवाचाशरीरिणी।। १६०.१७ ।।

आकाशवागुवाच
क्लेशेनालं सुरगणा गौतमीमाशु गच्छत।
भक्त्या हरिहरौ तत्र समाराधयतेश्वरौ।। १६०.१८ ।।

गौदावर्यास्तयोश्चैव प्रसादात्किंतु दुष्करम्।। १६०.१९ ।।

ब्रह्मोवाच
प्रसन्नाभ्यां हरीशाभ्यां देवा जयमभीप्सितम्।
अवाप्य सर्वतो जग्मुः पालयन्तो दिवौकसः।। १६०.२० ।।

यत्र देवागमो जातस्तत्तीर्थं तेन विश्रुतम्।
देवागमं प्रशंसन्ति मुनयस्तत्त्वदर्शिनः।। १६०.२१ ।।

तत्राशीतिसहस्राणि शिवलिङ्गानि नारद।
देवागमः पर्वतोऽसौ प्रिय इत्यपि कथ्यते।
ततः प्रभृति तत्तीर्थं देवप्रियमतो विदुः।। १६०.२२ ।।

इति श्रीमहापुराणे आदिब्राह्मे तीर्थमाहात्म्ये देवागमतीर्थवर्णनं नाम षष्ट्यधिकशततमोऽध्यायः।। १६० ।।

गौतमीमाहात्म्य एकनवतितमोऽध्यायः।। ९१ ।।