ब्रह्मपुराणम्/अध्यायः १००

विकिस्रोतः तः
Jump to navigation Jump to search
← अध्यायः ९९ ब्रह्मपुराणम्
अध्यायः १००
वेदव्यासः
अध्यायः १०१ →
  1. अध्यायः १
  2. अध्यायः २
  3. अध्यायः ३
  4. अध्यायः ४
  5. अध्यायः ५
  6. अध्यायः ६
  7. अध्यायः ७
  8. अध्यायः ८
  9. अध्यायः ९
  10. अध्यायः १०
  11. अध्यायः ११
  12. अध्यायः १२
  13. अध्यायः १३
  14. अध्यायः १४
  15. अध्यायः १५
  16. अध्यायः १६
  17. अध्यायः १७
  18. अध्यायः १८
  19. अध्यायः १९
  20. अध्यायः २०
  21. अध्यायः २१
  22. अध्यायः २२
  23. अध्यायः २३
  24. अध्यायः २४
  25. अध्यायः २५
  26. अध्यायः २६
  27. अध्यायः २७
  28. अध्यायः २८
  29. अध्यायः २९
  30. अध्यायः ३०
  31. अध्यायः ३१
  32. अध्यायः ३२
  33. अध्यायः ३३
  34. अध्यायः ३४
  35. अध्यायः ३५
  36. अध्यायः ३६
  37. अध्यायः ३७
  38. अध्यायः ३८
  39. अध्यायः ३९
  40. अध्यायः ४०
  41. अध्यायः ४१
  42. अध्यायः ४२
  43. अध्यायः ४३
  44. अध्यायः ४४
  45. अध्यायः ४५
  46. अध्यायः ४६
  47. अध्यायः ४७
  48. अध्यायः ४८
  49. अध्यायः ४९
  50. अध्यायः ५०
  51. अध्यायः ५१
  52. अध्यायः ५२
  53. अध्यायः ५३
  54. अध्यायः ५४
  55. अध्यायः ५५
  56. अध्यायः ५६
  57. अध्यायः ५७
  58. अध्यायः ५८
  59. अध्यायः ५९
  60. अध्यायः ६०
  61. अध्यायः ६१
  62. अध्यायः ६२
  63. अध्यायः ६३
  64. अध्यायः ६४
  65. अध्यायः ६५
  66. अध्यायः ६६
  67. अध्यायः ६७
  68. अध्यायः ६८
  69. अध्यायः ६९
  70. अध्यायः ७०
  71. अध्यायः ७१
  72. अध्यायः ७२
  73. अध्यायः ७३
  74. अध्यायः ७४
  75. अध्यायः ७५
  76. अध्यायः ७६
  77. अध्यायः ७७
  78. अध्यायः ७८
  79. अध्यायः ७९
  80. अध्यायः ८०
  81. अध्यायः ८१
  82. अध्यायः ८२
  83. अध्यायः ८३
  84. अध्यायः ८४
  85. अध्यायः ८५
  86. अध्यायः ८६
  87. अध्यायः ८७
  88. अध्यायः ८८
  89. अध्यायः ८९
  90. अध्यायः ९०
  91. अध्यायः ९१
  92. अध्यायः ९२
  93. अध्यायः ९३
  94. अध्यायः ९४
  95. अध्यायः ९५
  96. अध्यायः ९६
  97. अध्यायः ९७
  98. अध्यायः ९८
  99. अध्यायः ९९
  100. अध्यायः १००
  101. अध्यायः १०१
  102. अध्यायः १०२
  103. अध्यायः १०३
  104. अध्यायः १०४
  105. अध्यायः १०५
  106. अध्यायः १०६
  107. अध्यायः १०७
  108. अध्यायः १०८
  109. अध्यायः १०९
  110. अध्यायः ११०
  111. अध्यायः १११
  112. अध्यायः ११२
  113. अध्यायः ११३
  114. अध्यायः ११४
  115. अध्यायः ११५
  116. अध्यायः ११६
  117. अध्यायः ११७
  118. अध्यायः ११८
  119. अध्यायः ११९
  120. अध्यायः १२०
  121. अध्यायः १२१
  122. अध्यायः १२२
  123. अध्यायः १२३
  124. अध्यायः १२४
  125. अध्यायः १२५
  126. अध्यायः १२६
  127. अध्यायः १२७
  128. अध्यायः १२८
  129. अध्यायः १२९
  130. अध्यायः १३०
  131. अध्यायः १३१
  132. अध्यायः १३२
  133. अध्यायः १३३
  134. अध्यायः १३४
  135. अध्यायः १३५
  136. अध्यायः १३६
  137. अध्यायः १३७
  138. अध्यायः १३८
  139. अध्यायः १३९
  140. अध्यायः १४०
  141. अध्यायः १४१
  142. अध्यायः १४२
  143. अध्यायः १४३
  144. अध्यायः १४४
  145. अध्यायः १४५
  146. अध्यायः १४६
  147. अध्यायः १४७
  148. अध्यायः १४८
  149. अध्यायः १४९
  150. अध्यायः १५०
  151. अध्यायः १५१
  152. अध्यायः १५२
  153. अध्यायः १५३
  154. अध्यायः १५४
  155. अध्यायः १५५
  156. अध्यायः १५६
  157. अध्यायः १५७
  158. अध्यायः १५८
  159. अध्यायः १५९
  160. अध्यायः १६०
  161. अध्यायः १६१
  162. अध्यायः १६२
  163. अध्यायः १६३
  164. अध्यायः १६४
  165. अध्यायः १६५
  166. अध्यायः १६६
  167. अध्यायः १६७
  168. अध्यायः १६८
  169. अध्यायः १६९
  170. अध्यायः १७०
  171. अध्यायः १७१
  172. अध्यायः १७२
  173. अध्यायः १७३
  174. अध्यायः १७४
  175. अध्यायः १७५
  176. अध्यायः १७६
  177. अध्यायः १७७
  178. अध्यायः १७८
  179. अध्यायः १७९
  180. अध्यायः १८०
  181. अध्यायः १८१
  182. अध्यायः १८२
  183. अध्यायः १८३
  184. अध्यायः १८४
  185. अध्यायः १८५
  186. अध्यायः १८६
  187. अध्यायः १८७
  188. अध्यायः १८८
  189. अध्यायः १८९
  190. अध्यायः १९०
  191. अध्यायः १९१
  192. अध्यायः १९२
  193. अध्यायः १९३
  194. अध्यायः १९४
  195. अध्यायः १९५
  196. अध्यायः १९६
  197. अध्यायः १९७
  198. अध्यायः १९८
  199. अध्यायः १९९
  200. अध्यायः २००
  201. अध्यायः २०१
  202. अध्यायः २०२
  203. अध्यायः २०३
  204. अध्यायः २०४
  205. अध्यायः २०५
  206. अध्यायः २०६
  207. अध्यायः २०७
  208. अध्यायः २०८
  209. अध्यायः २०९
  210. अध्यायः २१०
  211. अध्यायः २११
  212. अध्यायः २१२
  213. अध्यायः २१३
  214. अध्यायः २१४
  215. अध्यायः २१५
  216. अध्यायः २१६
  217. अध्यायः २१७
  218. अध्यायः २१८
  219. अध्यायः २१९
  220. अध्यायः २२०
  221. अध्यायः २२१
  222. अध्यायः २२२
  223. अध्यायः २२३
  224. अध्यायः २२४
  225. अध्यायः २२५
  226. अध्यायः २२६
  227. अध्यायः २२७
  228. अध्यायः २२८
  229. अध्यायः २२९
  230. अध्यायः २३०
  231. अध्यायः २३१
  232. अध्यायः २३२
  233. अध्यायः २३३
  234. अध्यायः २३४
  235. अध्यायः २३५
  236. अध्यायः २३६
  237. अध्यायः २३७
  238. अध्यायः २३८
  239. अध्यायः २३९
  240. अध्यायः २४०
  241. अध्यायः २४१
  242. अध्यायः २४२
  243. अध्यायः २४३
  244. अध्यायः २४४
  245. अध्यायः २४५
  246. अध्यायः २४६


अथ शततमोऽध्यायः
कद्रूसुपर्णासंगमतीर्थवर्णनम्
ब्रह्मोवाच
सुपर्णासंगमं नाम काद्रब्रासंगमं तथा।
महेश्वरो यत्र देवो गङ्गापुलिनमाश्रितः।। १००.१ ।।

अग्निकुण्डं च तत्रैव रौद्रं वैष्णवमेव च।
सौरं सौम्यं तथा ब्राह्मं कौमारं वारुणं तथा।। १००.२ ।।

अप्सरा च नदी यत्र संगता गङ्गया तथा।
तत्तीर्थस्मरणादेव कृतकृत्यो भवेन्नरः।। १००.३ ।।

सर्वपापाप्रशमनं श्रृणु यत्नेन नारद।
इन्द्रेण हिंसिताः पूर्वं वालखिल्या महर्षयः।।

दत्तार्धतपसः सर्वे प्रोचुस्ते काश्यपं मुनिम्।। १००.४ ।।
वालखिल्या ऊचुः

पुत्रमुत्पादयानेन इन्द्रदर्पहरं शुभम्।
तपसोऽर्धं तु दास्यामस्तथेत्याह मुनिस्तु तान्।। १००.५ ।।

सुपर्णायां ततो गर्भमादधे स प्रजापतिः।
कद्र्वां चैव शनैर्ब्रह्मन्सर्पाणां सर्पमातरि।। १००.६ ।।

ते गर्भिण्यावुभे आह गन्तुकामः प्रजापतिः।।
अपराधो न च क्वापि कार्यो गमनमेव च।। १००.७ ।।

अन्यत्र गमनाच्छापो भविष्यति न संशयः।। १००.८ ।।

इत्युक्त्वा स ययौ पत्न्यौ गते भर्तरि ते उभे।
तदैव जग्मनुः सत्रमृषीणां भावितात्मनाम्।। १००.९ ।।

ब्रह्मोवृन्दसमाकीर्णं गङ्गातीरसमाश्रितम्।
उन्मत्ते ते उभे नित्यं वयःसंपत्तिगर्विते।। १००.१० ।।

निवार्यमाणे बहुशो मुनिभिस्तत्त्वदर्शिभिः।
विकुर्वत्यौ तत्र सत्रे समानि च हवींषि च।। १००.११ ।।

योषितां दुर्विलसितं कः संवरितुमीश्वरः।
ते दृष्ट्वा चुक्षुभुर्विप्रा अपमार्गरते उभे।। १००.१२ ।।

अपमार्गस्थिते यस्मादापगे हि भविष्यथः।
सुपर्णा चैव कद्रूश्च नद्यौ ते संबभूवतुः।। १००.१३ ।।

स कदाचिद्गृहं प्रायात्कश्यपोऽथ प्रजापतिः।
ऋषिभ्यस्तत्र वृत्तान्तं सापं ताभ्यां सविस्तरम्।। १००.१४ ।।

श्रुत्वा तु विस्मयाविष्टः किं करोमीत्यचिन्तयत्।
ऋषिभ्यः कथयामास वालखिल्या इति श्रुताः।। १००.१५ ।।

त ऊचुः कश्यपं विप्रं गत्वा गङ्गां तु गौतमीम्।
तत्र स्तुहि महेशानं पुनर्भार्ये भविष्यतः।। १००.१६ ।।

ब्रह्महत्याभयादेव यत्र देवो महेश्वरः।
गङ्गामध्ये सदा हायास्ते मध्यमेश्वरसंज्ञया।। १००.१७ ।।

तथेत्युक्त्वा कश्यपोऽपि स्नात्वा गङ्गां जितव्रतः।
तुष्टाव स्तवनैः पुण्यैर्देवदेवं महेश्वरम्।। १००.१८ ।।

कश्यप उवाच
लोकत्रयैकाधिपतेर्न यस्य, कुत्रापि वस्तुन्यभिमानलेशः।
स सिद्धनाथोऽखिलविश्वकर्ता, भर्ता शिवाया भवतु प्रसन्नः।। १००.१९ ।।

तापत्रयोष्णद्युतितापितानामितस्ततो वै परिधावतां च।
शरीरिणां स्थावरजङ्गमानां, त्वमेव दुःखव्यपनोददक्षः।। १००.२० ।।

सत्त्वादियोगस्त्रिविधोऽपि यस्य, शक्रादिभिर्वक्तुमशक्य एव।
विचित्रवृत्तिं परिचिन्त्य सोमं, सुखी सदा दानपरो वरेण्यः।। १००.२१ ।।

ब्रह्मोवाच
इत्यादिस्तुतिभिर्देवः स्तुतो गौरीपतिः शिवः।
प्रसन्नो ह्यददाच्छंभुः कश्यपाय वरान्बहून्।। १००.२२ ।।

भार्यार्थिनं तु तं प्राह स्यातां भार्ये उभे तु ते।
नदीस्वरूपे पत्न्यौ ये गङ्गां प्राप्य सरिद्वराम्।। १००.२३ ।।

तत्संगमनमात्रेण ताभ्यां भूयात्स्वकं वपुः।
ते गर्भिण्यौ पुनर्जाते गङ्गायाश्च प्रसादतः।। १००.२४ ।।

ततः प्रजापतिः प्रीतो भार्ये प्राप्य महामनाः।
आह्वयामास तान्विप्रान्गौतमीतीरमाश्रितान्।। १००.२५ ।।

सीमन्तोन्नयनं चक्रे ताभ्यां प्रीतः प्रजापतिः।
ब्राह्मणान्पूजयामास विधिदृष्टेन कर्मणाः।। १००.२६ ।।

भुक्तवत्स्वथ विप्रेषु कस्यपस्याथ मन्दिरे।
भर्तृसमीपोपविष्टा कद्रुर्विप्रान्निरीक्ष्य च।। १००.२७ ।।

ततः कद्रुर्ऋषीनक्ष्णा प्राहसत्ते च चुक्षुभुः।
येनाक्ष्णा हसिता पापे भज्यतां तेऽक्षि पापवत्।। १००.२८ ।।

काणाऽभवत्ततः कद्रुः सर्पमातेति योच्यते।
ततः प्रसादयामास कश्यपो भगवानृषीन्।। १००.२९ ।।

ततः प्रसन्नास्ते प्रोचुर्गौतमी सरितां वरा।
अपराधसहस्रेभ्यो रक्षिष्यति च सेवनात्।। १००.३० ।।

भार्यान्वितस्तथा चक्रे कश्यपो मुनिसत्तमः।
ततः प्रभृति तत्तीर्थमुभयोः संगमं विदुः।।

सर्वपापप्रशमनं सर्वक्रतुफलप्रदम्।। १००.३१ ।।

इति श्रीमहापुराणे आदिब्राह्मे स्वयंभुऋषिसंवादे कद्रूसुपर्णासंगमतीर्थवर्णनं नाम शततमोऽध्यायः।। १०० ।।

गौतमीमाहात्म्यये एकत्रिंसोऽध्यायः।। ३१ ।।