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पृष्ठम्:श्रीविष्णुगीता.djvu/१७८

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ब्रह्मसामरस्य, योगप्रवेशिका, धर्मसुधार, श्रीमधुसूदनसंहिता आदि ग्रन्थ छप रहे हैं और शीघ्रही प्रकाशित होनेवाले हैं।

 कल्किपुराण । कल्किपुराणका नाम किसने नहीं सुना वर्तमान समयके लिये यह बहुतही हितकारी ग्रन्थ है। विशुद्ध हिन्दी अनुवाद और विस्तृत भूमिका सहित यह ग्रन्थ प्रकाशित हुआ है। धर्मजिज्ञासुमात्रको इस ग्रन्थको पढ़ना उचित है ।

                            मूल्य १ ) एक रुपया।

 योगदर्शन । हिन्दीभाष्य सहित । इस प्रकारका हिन्दी भाष्य और कहीं प्रकाशित नहीं हुआ है। इसका बहुत सुन्दर और परि- वर्द्धित नवीन संस्करण भी छपरहा है। मूल्य २) दो रुपया।

 नवीन दृष्टिमें प्रवीण भारत । भारत के प्राचीन गौरव और आर्यजातिका महत्त्व जाननेके लिये यह एक ही पुस्तक है। मूल्य १) एक रुपया।

 श्रीभारतधर्ममहामण्डलरहस्य । इस ग्रन्थरत्न में सात अध्याय हैं । यथा-आर्यजातिकी दशाका परिवर्तन, चिन्ताका कारण, व्याधिनिर्णय, औषधिप्रयोग, सुपथ्यसेवन, बीजरक्षा और महायज्ञ- साधन । यह ग्रन्थरत्न हिन्दूजातिकी उन्नतिके विषयका असाधारण ग्रन्थ है । प्रत्येक सनातनधर्मावलम्बीको इसग्रन्थ को पढ़ना चाहिये । द्वितीयावृत्ति छप चुकी है, इसमें बहुतसा विषय बढ़ाया गया है। इस ग्रन्थका आदर सारे भारतवर्ष में समान रूपसे हुआ है । धर्म के गूढ़ तत्त्व भी इसमें बहुत अच्छी तरह से बताये गये हैं। इसका बंगला अनुवाद भी छप चुका है। मूल्य १) एक रुपया।

 निगमागमचन्दिका। प्रथम और द्वितीय भागकी दो पुस्तके धर्मानुरागी सज्जनोंको मिलसकती हैं ।

प्रत्येक का मूल्य १) एक रुपया ।

 पहले के पाँच सालके पांच भागों में सनातन धर्म के अनेक गूढ़ रहस्यसम्बन्धीय ऐसे २ प्रबन्ध प्रकाशित हुए हैं कि आजतक वैसे धर्मसम्बन्धीय प्रबन्ध और कहीं भी प्रकाशित नहीं हुए हैं जो धर्म के अनेक रहस्य जानकर तृप्त होना चाहें वे इन पुस्तकों को मगावें।

मूल्य पांचों भागों का २॥) रुपया। मगावें।