पृष्ठम्:ब्राह्मस्फुटसिद्धान्तः (भागः ४).djvu/५१६

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क्षपसाधनम् १६०५ (३) ४७१६ १४१५७ ४११८ ६१८१,८e(४२=क्षेपकः ४२१ १३३८&= शेषम् । लब्धि= १३७०१०। गुण= ५३११ इन दोनों का गुणनफल =१३७०१० १३७०१० १०१ ४११०३० ६८५०५० a = e = ७२७६०११० =कल्प के आदि में गताधिमास ७२७६६०११०+१३७५ = कल्पारम्भ से ग्रन्थारम्भशक पर्यन्त गताधिमास = ७२७६६१४८५ । चौथे (४) इलोक की क्षेप साधनोपपत्ति । पूर्वं साधित कल्पगतवर्षे = १९७२४७७२६ । इसको १२ से गुणाकर कल्पगतमास = २३६७५३७२७४८ । पूर्वं साधित अधिमास =७२७६६१४८५ । अधिमास को कल्पगतमास में जोड़ने से चान्द्रमास=२४४०३०३४२३३ अब अनुपात करते हैं । कल्प चान्द्रमास में कल्पकुदिन पाते हैं तो उपरोक्त चान्द्रमास में क्या इस अनुपात से वर्षारम्भ समीपस्थ मध्यमदर्शान्तकालिक कुदिन समूह= __२४४०३०३४२३३ १५७७६१६४५०००० ५३४३३३०००°° २४४०३०३४२३३ ४ १०५१४४४३ - । ३५६२२२ अब सात से गुणा हुआ हार (२४४३५५४) इससे गृण्य और गुणक को तक्षण के लिये न्यास करते हैं ।