पृष्ठम्:ब्राह्मस्फुटसिद्धान्तः (भागः ४).djvu/५१५

विकिस्रोतः तः
Jump to navigation Jump to search
एतत् पृष्ठम् अपरिष्कृतम् अस्ति


१६०४ ब्राह्मस्फुटसिद्धान्ते =१९७२e४७१७६, इसको शाकाब्द में जोड़ दें, यह भास्करोक्ति से खपञ्चपच के तुल्य शाका में कल्प गताब्द=१६७२६४७७२& । वर्ष के आदि में अविशेष के ज्ञान के लिये अनुपात करते हैं । कअमा ४ इष्टसौर वर्ष १६७२६४७७२४X१५६३ ३००००० कसौव - - ~ = E ४३२००००००० १६७२६४७७२&x ५३११ १४४०० - १४४०० (१) कल्पगताब्द में हर से भाग देने पर शेष= ३४२६ । ३६२&X५३११= १६८०४७१e. - (२) ४७१६ १३७५+ १४४०० १४४०० (३) यदि १४४०० इस हर में ४७१६ यह क्षेप मिलता है तो १३१ में क्या इससे मिला संचारितक्षेपक = - ४७१६ X १३१ १४४०० _६१८१८६ = ४२ + १४४०° १३३८e=४३ स्वल्पान्तर से । a इसलिये यहां 'सगुणवेदःयह पाठ उचित सिद्ध होता है । (१) १४४,००)१६७२६४७७२(१३७०१०=लब्धिः । १००६ १४७ ३७२४= कलिगताब्द। (२) ३७२e= कलिगताब्द ५३११ ३७२६ ३७२ १११८७ १८६४५ १६८०४७१८ (१३७५ =कलि के आदि से बीता हुआ अघिमास । ५४० १०८४ ७६७ ४७१६ १३१