पृष्ठम्:ब्राह्मस्फुटसिद्धान्तः (भागः ४).djvu/४५६

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ध्यानग्रहपदेशाध्यायः १५४५ नरवस्तनकेन्द्रज्ययोरन्तरं तेन या मन्दफलकलास्तदेव गतिफलम् । तद्यथा रवेः केन्द्रगतिः=५६’ । ८” ॥ (५९’। ८") भोखं कन्द्रज्यान्तरम = । १८ सूत्रेणानेनान्तरेण मन्दफल = = कला एव रवेर्गतिफलम् = ७ (५९८) भोख _ _७४३५४८xभोख ८४९०० ७२००४ ६० __२४८३६ भोख भोख स्वल्पान्तरात् । ४३२००० १७ – = एवं चन्द्रस्य केन्द्रगतिः=७६० ' । ३५-६९ ।४१’=७८३' । ५४"=७८४

स्वल् ततो गतिफलं पूर्वोक्त न विधिना २४७८४ भोख १९६४४xभोख २२५४४ ___१६६ ४ ७x भाख ७ भोखं २ + = २ + २२१७ १५७५ १६६ ७ भोख =२ + स्वल्पान्तरात् । अत उपपन्नम् । धन“वासना भास्करविधिना स्फुटा ॥ १६ ॥ हि. भा--केन्द्रज्या करण में रवि का जो भोग्यखण्ड है उसको १% से भाग देने पर रवि का गतिफल होता है । चन्द्र सम्बन्धी भोग्य खण्ड का आठवां भाग भोग्यखण्ड में से घटाकर शेष को दो से गुणा करने पर चन्द्र का गतिफल होता है । उपपति । १०० मR पहलाचाप== १०० ॥ अनुपात से भोड्ड Xकग=ीअ । इस पर जो मन्दफ़त का होगा वह गतिफल है । ३०० रवि केन्द्र ग८५३' " 1 केन्द्रज्यान्तर=(५६°१८') भोर्च २०० ७ (५’ । ८") भखं १८ सूत्र से मन्दफलक = रविगफ= ८X१०००