पृष्ठम्:नैष्कर्म्यसिद्धिः.djvu/२३५

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(287) 64. ILine 1. CF 100d *विष्करणार्थत्वात्. W०150 64, the last 1il16 (0f (60, 21d t]]c whole of 67,०००ur twice in Chap wा. 8 of the Wartika, o 68 (८). 11 line 4, instead of निर्तृत्तत्वात् " has विवर्तत्वात् 72 ( (:). B0 reads विशेष instead of विषय 70. Thc last word is न i1 ]] 82. Li11७ 2.A.B 12w७ अवरोध fo]' अवबोध Th७ पङ्गाव is suit in 11. 1. (line 2), to b8 जन्मादि जन्मादिविक्रियाषट्टसङ्गतिः परमात्मनः 86. Lil1e 1. T[c1४७, 2011 ( i11 112.11y otle1 ' 11:08es, DOF read परिणामिनीत्वं १0. Ltust li10. [1st७2001 () स्वगत, A3BI'1'e2d. प्राक्तन. B 2dldls प्राग्भातं in tle 11११01gi1, 21 15 स्वगतं 11. 10 e0111111611tally, lust li1e but (010, '1'eads नष्टायां 01. Last 1il1८. All MISS. }}ut 15 1५:(l दृष्टि {)2. T 2. 4. 14 ()5. ][1] (tx])l:111:॥ti()]] ()| tl७ full()।il14 is found in tl७ 11trgil (f 13:-केशोण्द्रकवत् । खेऽक्षिदोषेण केशस दृशं किञ्चिदृश्यते तत्केशोण्डूकम्।. Se७ केशोण्डूक in th७ 2,]]1itl५ St. Petcut:sl)u'g IDicti()11:01y, where 2, 18 1/(1)'1/0, 1)'t?)?/{{{1, 358.10 1.11 (ex)ltilli1g t]]1७ w७॥४५ वटरकाणि Sty2012, $2)ys–-

  • बटरकाणि वर्तुलानि सूक्ष्माणि शुङ्कवर्णानि केशोण्डूकश

ब्दाभिधेयानि सम्पतन्तीव सम्यङ्नेत्रान्निर्गच्छन्तीव सर्वेई श्यन्ते ।’’ 07. 1il10 2. निर्माल्यवत्. 11 1is (80111111011taury 011 10 10 v1. (60, M:li॥tlt, sty५-निर्माल्यैर्भक्तोज्झितमाल्यैः । १)?). ILast, li॥७. A.IBID" "५ अर्थत त् A ५१dls मंस्यते, 2011 1? अन्धधीः 10:3. 1il16 2. A.18 1'catl अनुपातितः 104. Tlt peuliu: 0x1'essi७1 अागोपालाविपालपण्डितं 1 have