पृष्ठम्:ब्राह्मस्फुटसिद्धान्तः (भागः ४).djvu/५१८

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क्षपसाधनम १६०७ फिर शेष को ६० से युणाकर भागहर (३५६२२२) से भाग देने पर ५७४१६ ४६० = ३४४४६६०। ३५६२२२)३४४४६६०(६+३ पल स्वल्पान्तर से ३२०५६६८ २३८६६२ यहां प्रथम लब्धि (१७०६२७६) इसको ७ से भाग देने पर शेष = ५==वार । क्रम से वार ५ । घटी २। पल &+ङ । स्वल्पान्तर से यहां वर्तमान दिन के लिये ५ की जगह ६ संख्या को आचार्यों ने ग्रहण किया और २ की जगह ४, एवं ६ की जगह १८ संख्या को आचार्य ने स्वीकार किया है । इस तरह यहां २ घटी, ७ पल को आचार्यों ने अधिक ग्रहण किया है, इस बात को ज्योतिषी लोग विचार करें । (६) छठे श्लोक के क्षेप साधन की युक्ति – पूर्वंसाधित कल्प से व्यतीत वर्षे =१६७२६४७७२& । १६७२६४७७२४x१२ = २३६७५३७२७४८=सौरमास । ५५० । ५५० शाकारम्भ समय में -- गताधिमास = १३७०१० x ५३११+१३७५८७२७६६१४८५* इष्टवान्द्रमास =ळ २३६७५३७२७४८+७२७६६१४८५= =२४४०३०३४२३३ अब अनुपात करते हैं। कल्पमास में कल्पचन्द्रमास घटा हुआ कल्पचन्द्र मन्दकेन्द्रभगण मिलता है तो इष्ट- चान्द्रमास में क्या इस अनुपात से भगणामक चन्द्रकेन्द्र = २४४०३०३४२३३X३८३१८६४१४२ ५३४३३३००००० २४४०३०३४२३३ ॥ १ ५३४३३३ ४८८०६-६८४६६ ॥ २ १०६८६६६ ५२२०६१०२६६ | ३ १६०२&&& ६७६१२१३६९३२ । ५ २६७१६६५ १६५२२४२७३८६४ | ६ ३२०५६६८ २१९६२७३०८०६७ ७ ३७४०३३१ ८ ४२७४६६४ है ४८०८९७ २ |

  • २ श्लोक का क्षेप साधन देखें ।