पृष्ठम्:ब्राह्मस्फुटसिद्धान्तः (भागः ४).djvu/४७२

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ध्यानग्रहोपदेशाध्यायः १५६१ अस्मादासन्नमानानि के, ३, ३४, ६डॅ२ , ३४, ४३, ४४३••• • .आचार्येणेद ३३९ मासन्न गृहीतम् । अनेनाको गुण्यो भौमः स्यादतो भौमः=३४५४ रवि-३ रविx३३+==* रवि (१+३*)→ई रवि (३+'१०x१०)= ३ रवि (१+१६स्वल्पान्तरात् । २२१० अत उपपन्नम् । शेषवासना सुगमा ।। ३३ ।। अब प्रकारान्तर से भौमादिक ग्रहों का. आनयन करते हैं । हि- भा.- सूर्य को दो जगह रखें, एक जगह १० से गुणा हैं, और वसुशरचन्द्र (१५८) से भाग दें, लब्धि को प्रथम स्थान में जोड़ दें, उसका आधार करें। भौम का ध्रुवा उसमें जोड़ दें तो मध्यम भौम होता है । उपपत्ति । कल्प में रविभगण = ४३२००००००० । कल्प में भौमभगण ==२२१६८२८५२२ । २२ ६८२८५२२ दोनों का सम्बन्ध ४३२००००००० ११४८४१४२६१ - ११४८४१४२६१ =__४२ २१६००००००० ४२ २१६००००००० = १+. ---- १+ ७+

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२+. १+. १+ ८९६६३८ ५+ ४७२६६१६