पृष्ठम्:Mudrarakshasa.pdf/१३७

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             मुद्राराक्षसे

२३६ णक्यहतक एभ्य एतदीदृशं भवतीत्यन्विष्य निगृहीतवान्पुरनिवा सिनो यष्मदीयानाप्तपुरुषान् । राक्षसः-( सोद्वेगैम्) कथय कथय के के निगृहीताः। विराधगुप्तः --प्रथम तावत्क्षणको जीवसिद्धिः सनिकारं न गरान्निर्वासितः। राक्षसः-( स्वगतैम्। एतावसह्यम् । न निष्परिग्रहं स्थान- भृशः पीडयिष्यति । ( प्रकाशम् ।) वयस्य, कमपराधप्नुद्दिश्य नि वासित:। विरधगुसः--एर्ष राक्षसप्रयुक्तया विषकन्यया पर्वतेश्वरं व्या पादितवानिति । राक्षसः-( स्वगतम् ।) साधु कौटिल्य साधु । परिहर्तुमयशः पातितमस्मासु च घातितोद्वैराज्यहरः। एकमपि नीतिबीजं बहुफलतामेति यस्य तव ॥ १९ ॥ एकमपि नीतिबीजमिति । इदमेकं बीजान्वेषणम् ॥ १९ ॥ १ om. in B. N ; हतक om. in M. R. H; G. om. एभ्यः following and B. has एच for एतत् after एभ्यः; भविष्यतीति for भवतीति P. G. N. B; B.has अन्विष्य twice; कुसुमपुर. B. G. E; R. M. Om. नि after पुर; N. om, all bhis, २ नन्दमात्यपु° for युष्मदीयनासपु°. B; युष्मg°. E; G.adds गुप्त after आप्त and M. reads आयें° for आप्त३ साचे°. B. B. G; P. om, one कथय; M. R, om. both; G, has अथ instead; B. E, वयस्य अथ; नभृ° for निगृ° P. ४ N. has अमात्य before this; also B. B. Reading आदावेव for अथसम्; G. E, omतावत् which folloWE. ५ आत्मग°BN; R. E. M. read next word as एतत्तावत् शक्यं for सह्यम् A. M. P. R. G. E.; परिग्रंशः for °अंशः B. E. & R. M. read पीडयति; M. om. वयस्य; B. N. G Yead सखे; 5. सखे कथय. ७ Om, G; B. adds एपः after this ; .E. जीवसिद्धिः दुरात्मा after this B; . om. या in प्रयुक्तया; N. on. that and reads क्तो for m, and पर्वतकेश्वरम् for पर्वतेश्वरम, घातित° for व्यापादित'. B. E. N. G. ९ आत्मग° E; कुतः after second साधुः G. D. N. १९० (i. F. yead स्वस्मिन् परिहृतमयशः &e, and omib च); स्वस्मिन्नपर्छ A.P; नूनं परि'. E; A.P. om, व; R%reads अपयश; N. Yeads स्वीयम् before पाति'; G: om. अर्द्ध after .

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