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पृष्ठम्:Ganaratnamahodadhi.pdf/३०५

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अनुक्रमाणका ।।
भवत २७
भव्यामनोज्ञ ७२४


भर्ग
भर्त्त
भर्तुं
भर्ग
भद्र
भल्लकीय
भव्यभाला
भस्त्व
भस्त्वाफला
भस्त्रा
भस्त्रा
भस्मसात्
भस्मम्
२७
भषी
भारत
भाजन
भाण्डा

१३६-५
१३४-८
१४०-१ह
१४४-१४
२४५-७
१२५१०
४१-३
६२१
४०-१
१८१-८
२१४-३
१५-११
१४-२२
२७०-११
४२२
२०७-१२
५७४--२६
१८८-१६

भागवत्तरेभागवत ५३३

भाजन
भाना.
भाती
भाण
भानु
भारद्बइ
भारम
भारस्मि५
भश्मिषिञ्च
रगया यति
भार्योच्यु
भव

. ३हे-१४ऽ
४७-२३
४p-२३
१४-४
२३०-२२
१४४-१४
१४४-१०
१९५-।
१३२४
६८८२
७०-१८

भारत
भास्कर
भास्व
भाष्पवर्त्तक
भिक्षा
भिक्षा
भिक्षुकी
भिक्षु
भिक्षुरकदाक्षि
भिक्षुक
भिक्षुक
भित्
भिदां
भिन्द्धिंलवण

भिषज
भिषज
श्रिंषा
मिघरगत

मिथ्याज
भा
मौ म
भीमसेनार्जन
-
भोमार्जन
-
भो सष्ठान
भीष्मद्रोण
भुक्तवासुहित
भुरण
भू यन
भुरू
भः

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भस

४३१० । ह्येति-

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२४३५-१३
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