८४ सुभाषितरत्नभाण्डागारस्थपद्यानां हर्षकोधौ समौ (हि ३.१३२) १४८२४३ | हा हा देवि (उत्तर राम ३ ११) २७९६३ | हेतुप्रमाण (शा प ३३५) ६५८ हषं वर्षन्विधत्से चिर २१४।८४ हिसकान्यपि (पच ३ १ ६) ३७८४९ | हेतुनैसर्गिक १६८।६६७ हर्षादम्भोजजन्मप्रभृति ८१०६ | हिसाशून्यमय (भर्तु स ३५२) ९७१३ | हेतो कुतोऽप्य (सु २७९) ५१।२१५ हसति लसति हर्षा (स् ३२३२) ६०२४८ | हितोपदेशं (शा प १५२३) १५४७६ | हे दारिभ्य (शा प ४०२) ६५२ हसन्तं प्रह (भा १३२२३८) ३४८|१९| हित्वा त्वामुपरो (कुट्टनी म) ११२२६९ | हे दावानल (श प ११५६) १२०१ हसन्तीं वा हसन्ती वा ३४५५ | हित्वा दैत्यरिपोरुर. ११०|२३७ | हे पक्षिा (शा प ८०८६२।२८२ हतं कम्पवती रुणद्धि ३ १८१६ | हित्वा मदं ६०२३६ | हे पाथोद (भोज प्र २१४) २१४७६ हत इव भूतिम वासवदत्ता )५७१५३ | हिमऋतावपि शिशु ६ ६१) ३४६२२ | हे पान्थ (शा प ३९३१) ३४७५ हस्तन्यस्तकुशो (सु १४०५) १०७१८२ | हिमकर परभागं २१०।३१ | हेमकुम्भमिव ३१८९ हस्त पङ्कजनिविष्टयो २१५ | हिमधवल (शा प ३९१९) ३४५८ | हेमन्तहिम ३४५।१ हस्तस्य भूषणं १५९२९१ | हिमलवसदृश (शिशु ७ ७३) ३३४१२४ | हेमन्ते दधि (भर्तु स १४४) ३४६३१ हस्तस्येदन्नपित इव ३१३६१ | हिमव्यपाया (कुमार ३ ३३) ३३१३० | हेमन्ते हस्तादपि (श प ४८५) १५५।११९ ३४७४८ हिमशिशिर १०६।१४९ हताम्भोजालिमाला ११३१ | हिमसमयो हेमन्ते बहु २३ ६।९ ३४५३ हस्ताम्भोजे २०२७८ हेमन्ते २८५२ | हिमाशुखण्ड हिमकर ३४७४९ हस्ती चा ) १६७६३e | हिमाचूश्चण्डा (हेममजीर (शा प ३३५९) २६९४० चाक्रुश (बृ ७ ८प राघव ६४३)२९२।२१ हती वन्य (श प १२५०) १२२।१८० हिमानीस्थगिरौ हे मल्लि हे १९९१७ २४८।९ हस्ती स्थूल (बृ चा ११ ३ ) ७२° | (का १३ २६) हिरण्य नी १४५१२९ हे मातङ्ग २३०४४ हस्ती हस्तस (चाणक्य.२८) १६१३४७ हीनसेवा न (हि ३ ११) १६४l४९७ हेमाम्भोरुहप (भर्तु स ८२३) ३३४१३३ हते चकास्ति २६४|२४० हीनहत्या दधायैव १८१।४ हेम्न कार्यं ३६९६८ हस्तेनाग्रे वीत (शिशु १८४८) १३०८३ | हीयते हि (हि प्र ४३) ८६९ | हेयं हर्यमिदं ३७११०९ हस्ते शत्रकिणाङ्कितो २०६३ हुंकीरैर्ददता (नाग ३ ५) ३१४॥ | हेयोपादेय ८१११५ हा तात (शा प ३९७०) ३६०।१८ हुतमिष्टं च हा धिक् सा (विक्रमोर्व) २८१।११४ १०२३४ | हे रङ्ग हेमतुलया २४६।३४ हुतहुताशनदीप्ति (रथं ९ ४०) ३३२५ हा नारायणभट्) हूणीसीमन्त (शा ३९३०) ३४७४५| हे मातस्त्वर (३६२३७ |प हे राजानस्यज (सु १६७३३५ हारं वक्षसि भामिनी प्रा | शा प | हेलाप्रस्थान (९४) २३५१५ लक्ष्मि क्षणिके ६३३ हृतोऽङ्गराग (३८४९) ३३८I७० हार कुरङ्गशा ११३।२९१ २६६३०१ | हृत्वा पद्मवन २८११०७ हार प्रलम्बित १७६१९६७ | हृदयं कौस्तुभ (शा प.१११) २२१०३ हेलाविदलित २३ ११९ हार गुम्फति ३५९९५ | हृदयं हरन्ति हेला स्यात्काये १६२।४१८ ३४९।५९ हारञ्जयति हे हर्यक्ष ३ १६४४ | हृदयतृणकुटीरे २३ १५३ २५०११७ २४६३२ | हृदयमाश्रयसे (नैषध ४ ७५) २८५४३ हे हेमकार २४६२३ हारहीरकहिरण्य ३५५७ हृदयमिषुभि (विक्रमोर्व २ १०२७९७१ हे हेमकेतकि २३ ९९५ हारानाहर देव (श प १२३६)१०८१९८ | हृदयानि सता (श प २३४) ४६।४१ हे हेमन्त (श प ३९२३) ३४५४ २८८३९ | हृदये कुरु २४६।| हे हे मित्र जिता २१ ४३१ हारीता (शा ५८७१) २२७१७६ | हृदि बिस (साहित्य कौ ११५२८२१३७ | हे हेरम्ब १२३० हारो जलार्द्रव (अमरु९e२५०१५ | हृदि लग्नेन (शाप १८६) ३५२५ हे हेला (वाक्यप पुष २ २४९) २१७३५ हारो नारोपित (हनु.ना.५ २४) २८३१ | हृदि लज्जोदरे हेषन्ते यज्जित १०७१७७ ७३।१९ हारो भाति कुच १८२४७ | हृदि विद्ध (काम नी ३ २४) ३९१५७३ | हेषाघोपैर्हरीणा १२७२३ हारोऽयं (साहित्य कौ ११ ८) २६६३०४ | हृष्यंति देवता ()३८६| चाणक्य ५१३५३ किरात ८ हदाम्भसि (४३) ३३८८६ हालाहलं खङ (भामिनी प्रा.१०)६०२३३ | हे कीर २२७१८८ । हीतया गतनीवि ३१६।१ हालाहल (कुव २७) ६३२६ | हे कूप त्वं २२०११ | हीभरादवनत शिशु-१०५२) ३१७१४ हावहारि शिशु १० १३) ३१५१६ हे कोकिला (भद्रे स ८ २२) २२५१३७ | हीविमोह (शिशु १० ५२) ३१५२५ हासस्तूत्कलिका ३५०८१ | हे गङ्गधरपनि १२।४३ | लेपयति (४३४) ५८११९४ हा हन्त मानस २२१।२० | हेतु कोऽपि ४३८ ॥ ह्वादनताप २५१२ समाप्तोऽयं सुभाषितरत्नभाण्डागारस्थपद्यनुक्रमकोशः
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