सस्थाननिर्देशमनुक्रमकोश
गूशः ६९
वायुमेित्र १८९॥५९ | विकिर धवल (वेणी.२ १६) ३० →~^→→→- -~~→→→~→、-~→、~、~~~、-~^~~^~~ ~ →-~→-^ →-~、~~
वायुरिव खलजनोऽयं(सु.४०५)५८॥१८० .; `t ५९t२१२
वायुरेव महाभूतं २१४॥१ | विकृर्ति नैव (शा.प ३२३) ४५l१६ | विद्यया सह ३९l१६
वारंवारं (मालती.१ ३८) २७९॥६२ | विकृन्ततीव ३६१t८ विद्येयै समै काम १५९l२६७
वारंवारं धुत ३२६॥२६ |! विक्रीर्त निज १६८l विद्यातीर्थे ई **? १६७l६१२
वारंवारमुदश्रु ३३०l१ | विगततिमिर (शेिशु ११ २६) ६८l६९४ |! वि ६) १७८॥१०० १
वारणार्थपद (शिशु १ ० ७०) ३१८।१३ | विगतराग (शिशु ६ ३९) || ]ि नाधि पुं १७५) ३७५॥२२५
वारणेन्द्रो १९९l1५ || विगतशस्य (शिशु ६ ४९) ३४५॥३७ | :िा ' स ७०) ३०1१६
वारस्त्रीव वन ३३३l99 | विगाढमात्रे (केिरात ८ ३ १) ३३८॥७६ ' विद्याभ्यासो ३०॥१५
वारिजेनेव (सा द १० २६) १६८॥६६1 | विगुणोऽपि ३२२१ | विद्या मित्र १५५८६
वात च (प्र राघव २ १) १७६॥९५४ |1 विगृहीत ९ (वृ चा ५ १४) १५९॥२८७
वार्यन्तां २८५॥४ १ ४६॥४९ | विद्याया दुर्मदो (शा प ४९७) १८१t८
वालीयुतश्रवण १३॥५४ घ्नध्वा २९६ | विद्यारढ्न सरस (प्रसगाभ १४) ११५॥४५
वाश्चारेड् 1*३॥*६ | विघ्नेशो व स पाया(मह ३३० | विद्यावत कुलीनस्य (शा प.३९६) ७३॥२
वास का (पद्य सं ६) २२७l१९७ | विचरन्ति विला (सा द ; .? २॥२९ | विद्यार्थीं सेवक (वृ चा ९ ६) ३९२{६१०
वास खण्डमिद (शा प ४ ०९) ६७l६३ | विच्छिन्चा रथ पै?ि'3:ँँँँँँँँँ jं वेिद्यावता (पच १ ३८) १४८॥२४८
वास शुभ्र (चोर पचा ) १८०11 °४७ | विजनमिति (शिशु ७ ५१) {' विद्याव॒न्तो॒ ११२२८६
वास शैल (शा प ९९७) 1३८l५६ | विजिगीषु (शा प १२९६) १५०॥३४२ विद्याविधिविही ३९l१०
वासनावा (शा प ४२२५) १८८॥४° | विजितात्म (शा प ५१८) ] ८७1 1 j विद्या विनयो ३९l१७
वसरगम्न्य ४७l*४ | विजेतव्या लङ्का (भोजप्र १७०) ५२॥२५० |! विद्या विवा (गुण रद्ध.७) ६०t२२९
वासश्चर्म ६८॥७६ | विजेतु प्रयते (हि ३ ३९) १४८i२३० वि॒द्याविही॒न॒ा ९०t1२
वाससां (किरात.९.६५) ३१६॥५७ ! विज्ञै स्निग्धै (हि.२ १६०) ९७॥१६ विद्या शस्त्रं च (हि.प्र ७) ३ ०t७
वासस्तदेव २८५l८ |1 विडम्बनैव ७१२९ विद्युच्चक्रकराल १९॥५३
वासांसि ब्रज १७९॥१०३० | विततपृथुवरत्रा(श्शिशु १ १ ४४) ३२७1१३ विद्ये हृद्यत ४ 1७१
बासोऽथै (नागा.१.१ १) १४२l१२ |1 वितरति गुरु* (शा प.४ १४) `४१॥६१ विद्योतन्ते २१५l८
वासो वल्कल (शांति श २.१९) ७४॥४४ || वितरति ,. |विदाये॒ रण लैषध १२:ई*) ११भूरै३६
वासो विधूय ३२५l८ || वितरय कुच ३०६॥३३ | विद्राणे रुद्रवृन्दे स (शा.प.१ १ २) १३॥५१
वाहृव्यूहखुर ११५॥३८ || वितर वारिद ३३ंंंंंंंं | विद्वत्कयू ३२२२
चाहितं १६६॥५९५ | वितीर्णशिक्षा इव (सु १७१) ४०॥३९ विद्वत्ता चेव ७६a२७
विकचकचकलापः (सु १४८४) २५७॥२३ | विर्त्त देहि गुणा(ंछ्द्द्द्द्द्द्द्द् चा•८ ५) ३९२l५९८ विद्वत्ता वसु १० ०t३१
विकचकमल (शिशु.११.१९) ३२६॥१४ || वित्तं परेि , | वि॒द्वत्वं च नृपत्वं च (च ३४२६) ३८७
विकटाटव्या १ई|वेिक्षे लौगै क्षमा (ख २६४) ४७८3|दि*ठी"*ि* ११५॥३९
विकसति नय (शा.प ५३३) १९१॥७८ |1 वित्तेन किं (सप्त रत्ब ५) १७६॥९४७ विद्वद्भि सुहृदा(पच २) ३९१॥५७४
विकसति सह ३३३८७ |वेिदग्धे (भोजप्र.३० ३) १८१॥२३ |दिन्"" ११७l९३
विकसति सूर्ये ३४५l१० | विदधतु १०६॥१५० विद्वन्मान (अल सर्वस्व ) १०७॥१८1
विकसदमर १३२|वैिदलेर्तसकला (शिशु.१२ ७७)१*३७८||दैि* न् १०1t२
विकसन्नेत्रनी (सा.द १०.१२) २७०॥६ | विदुरेष्यदपाय (शिञ्च १६ ४°) `*°l४'* विद्वानुपालम्भ ६ ०l२२८
विकसामि रवावुदिते (सु.३१८६) ६६॥३८ | विदुषा वदना ३८१३ | विद्वान्द्वजु (पच १) ३९२॥६०४
विकसितकु (किरात १०.३२) ३३३l७७ विदूरे (राघवान ) ३५९॥९१ विद्वानेव विजा (कुव ५१) ३८॥५
विकसितमुखीं (सा द.१० ५६) ३२२l१२ | विदेशेषु धनं विद्या (च ३०५३) ८श्४l१३ विद्वान्ससदि (नवरत्त ९) १७९॥१०३७
विकसितसंकु (अनर्घे २ १२) ३२३॥३ | विदैवर्शे ग्रार्मे १७७l९८२ | विधालुर्द्वे कन्ये ६७|५७
विकसितसह ३३१॥३ 1 विद्धा मृगी २३३॥१०१ | विधात्रारचिता(पच.२ १<३)३८५l३४1
किारं यातेि नेो (पंच २०) ३९१॥५६५| विद्धि श्रौढ्दयं १८३॥५६ | विधिरेव हि (कथास.३ ० ९१) ३ * ८॥३९
२९३॥३ ' विद्यया विनया १६५॥५५१ |! विधाय मूर्धान (नैषध.७ ९४)२६९॥३ ९३
विकिरति (शा प.३४९८)
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