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पृष्ठम्:सुभाषितरत्नभाण्डागारम्.djvu/४९७

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६६ सुभाषितरत्नभाण्डागारस्थपद्यानाँ
रोलम्बैर्निमेि २३७t२७ | लङ्काधा १२२॥१८३ | लाभप्रणयिनो (सु २३०) ४'७1८ ०
रोलम्बो २८५॥३६ | लङ्कापते सकुचित (शा प १६१) ३३॥२९ | लाभस्तेषा १६६॥५८३
रोषावेशादाभि(शिशु १८ १२) १२९॥५८ | लङ्काभूप १९७॥३७ | लालने बह (भाग १ ० १ १५) 1६1l३४३
रोषावेशाङ्गरच्छ (शिशु १८ ४) १२९॥५५ | लजा गुणौघ (भर्तृ स ३१८) ३८५॥३२८ | लालयन्तमर (प्र राघव ३॥३) २८I1
रोहृर्ण सूक्तिरत्ना (नल च १.८) ३८t४ | लज्ज्ञा विहाय (शा प ३ ३८५) ३२९।७ | लालयेत्पञ्च (भाग १ ° ११४)1६०॥३० ८
रौहण॒ाचल (शा प ? ०७१) २१५॥ १३ | लज्जा कीर्ति ११९॥१२६ | लाला वक्रास (दश रू ४ ७३)३७१l१२'".
रो॒हते॒ सायकै(qच ३ १०९) ३८५l३२२ | लजा ग्रैढ ३४६।३० | लावण्य क नु २०४।11८
रोहन्तो प्रथमं (अमरु १ १ १) ३१०1१ १ लज्जामहे (सु ८ ६७) २१६।२० | लावण्यं तद (का प्र ४ ७५) ३६७l1 1
ल' लजावत (सु ३ १७१) ६६।२७ | लावण्यकान्तिप (दश ४ ३६) ३०६l२८
लक्ष्६मणेत्युक्त १९९११ | लज्जावशा (शा प ३७५°) ३५१।२९ | लावण्यद्रविण (औौचिल्य ११) २८६॥२९
लक्ष्मणो लघु (शा प.३ ९८७) ३६०॥१० |! लज्जा देनहः (पच ५ ९१) ३७९I७५ | लावण्यमधु (सा द १ ° ३२) २६२l 1६९
लक्ष्मि क्षमख ६३॥२९ |! लज्जे रवं मज्ज ७७५७ !| लावण्यामृतदी (नल च ७ ४३) २५४t४1
लक्ष्मी तनोतु २॥२२ ! लजैवोद्ध २८१। १११ | लावण्यामृतमा (शा प ३ २•८४)२५६॥४७
लक्ष्मी खय (सु ? ४६८) २ ४४॥२३३ |ं लता पुष्पवती ३२५॥१ | लावण्यामृतव (दश ४•६९) ३१४॥७४
लक्ष्मीकपोल (सु २९) १४॥३ | "ळताकुञ्ज (सा द ८ ४) २३४।१२९ | लावण्यौकसि (खडप्रशस्ति) १०९॥२१२
लक्ष्मीकेलि (सु २ * ०५) २११t ४ ० ! लताकुद्धेॉ ३२६॥२3 | लिखति न (शा प ३ ४० ३) २७५l६
लक्ष्मीकौस्तुभ (भोजप्र २ ९) ९४॥११ ॐ |! लनानामे (का.प्र १० ४ ९८) २४५॥२४३ | लिखन्त्या २६७|३४४
लक्ष्मीक्रीडा (भोजप्र २५९) ३०३।१३८ ! लतामूले (अल कौस्तु अति १) २७५॥२९ ! लिखन्नास्ते (अमरु ७) ३० ८t1२
लक्ष्मीधर २० ० i५३ | लतास्ता २२४l९ ६ || लिखिता चित्रगुप्तेन ९१॥३२
लक्ष्मीपङ्क (सु 3४ १‘,) 2४४1२३२ | लब्ध जन्म सह (शा प ७५९) ९४।१० ७ | लिम्पतीव (दृच्छ १ ३४) २९६।१
लक्ष्मीपयोधरोत्स (दश रू ४ ७२)७०॥१० | लब्धव्यमथै(महा.ना २१४?) ३९१॥५७८ | लीढग्रस्त (शा प ५९२) २०७l२
लक्ष्मीपाणि (मूर्त्तित सहस्र ) १५॥२३ ! लब्धसारभ (शिशु १० २४) ३१५॥२७ | लीनानसून्सरोरुहद्दष्टे २७५१२
लक्ष्मीरस्य हि (अनर्घ ७ ९३) १४०1२ | लब्धाधै (विक्रमच २७७) १०३।६ ७ | लीनेव प्रति (मालती ५ १०) २८१।१०५
लक्ष्मीधैर्म (प्रसगाभ १७) ३९२॥६° ६ | लब्धास्ल्य (शा प ४१३ ३) ३७२॥१५६ ! लीने श्रोत्रेकदे (खडप्रशस्ति २ २) १९॥३८
लक्ष्मीर्निर्वृति (शातिश ४ १) ८1। ४६ | लव्धोच्छ्रायो (शा प ३५१) ५७1१२७ |! लीलयेव (शिशु १० ३८) ३१५॥४१
लक्ष्मीर्यादोनिधे (शा प ५२९) ६२॥९ | लब्धोदयो (सु 3 ९५) ५८।१७१ | लीलातामरसा (अमरु ७ २) ३१1॥३१
लक्ष्मीय ११८॥११२ | लब्ध्वा जन्म(सु ३ १०५) १०४। १०२ | त्ठीलादेोला (शा प ३८ १'*) ३२७l४°
लक्ष्मीर्वसति १५५॥८७ | लभेत सिकतासु (भर्तृ स ३१९) ४१॥५ ७ | लीलाद्यूतजिता ६॥६२
लक्ष्मीवन्कृत १९२॥९१ | लमेद्यदयुर्न ६५॥१९, | त्लीलामु (भामिनीं प्रा ६२) २३१॥६ ४
लक्ष्मीवन्तो ६४॥२ !| लम्वोदर तव १८९॥५७ ! लीलायन्त्य (भा १३ १४७५) ३७८॥४०
लक्ष्मीश्चेन्न १११l२५ ८ |1 लम्भिता २६८॥३८९ | लीलाळु (भामिनी प्रा ७०) ३८l२७
लक्ष्मीसपर्क (शा प ११३९) २४३॥२० ~ | ललाटतिल १९३। ४ | लीलावतीना (भर्तृ स.८२) ३७९॥६९
लक्ष्मीस्ते १ ०९l।२२२ | ललाटदेशे (पच १ ३३४) ३८६।३५७ | लीलावल्ली २७६l४६
लक्ष्मीस्ते १०९।२२४ | ललाटे फस्तूरीतिलक २५२॥४७ | लीलास्मितेन (शा.प ५४६) २७८॥५०
लक्ष्म्या परिपूर्णेाँ (शा प १५०१) ६४।१३ | ललितगमना नार्यो २३।१३२ |! इछुब्ध स्तब्धो (सु ३७३) ५६॥१०३
लक्ष्म्या (काम नी ५ ७३) ३९२॥६२६ | ललितमुरसा (अमरु १६१) ३३७l६० | ळुब्धमर्थेन (हि ४ १०४) १५५॥९७
लक्ष्म्या श्री २१७३७ ! ललितविभ्रम ३३२॥४ ६ | इळुब्धाना (वृ चा १० ६) १५६॥१५७
लर्म रागा (वेणीदत्त.पद्यवेर्णी२) १३८॥७९ | ललितान्तानि १६०{३३१ | इट्ठब्धो न (कुव ५० ३) ७१२५
लम केलिकच (का.प्र ७ २३७) १२I४० | लवङ्गलतिका ३२५॥२ | ळुलाये गोमायौ ९३॥९१
लमद्विरेफा (कुमार ३ ३०) ३३१॥२७ | लसन्मौत्तिीक २५७॥२० | ळुलित (शिशु.१ १ २०) ३२४।३३
लम्म पाद २७४॥२७ |iं लाक्षालक्ष्म (अमरु.६०) ३७९॥७४ | छ्ट्टनग्रीवा (शिशु १८•५९) १३०l८९,
लमा नाशुक (अमरु.६२) ३२९॥१७ | लाङ्गूलचालन (भद्वै सं ५७) २३१॥७१ | छनं मत्त (भामिनी प्रा.३९) २४२॥१८२
लघुनि तृणकुटीरे(दशरू,४ २२)३४६॥२५ | लाङ्गूलेनाभिहृल्य(सा.द.१०.९२) २०७l५ | लेखनी पुस्तक १५८॥२३२
लधुरय २१६॥११ ! लाटीनेत्र (मुकुद.३२) ३७१॥१० ७ | लेखन्ती व्योमगर्भे 1२४|1 *