सस्थाननिर्देशमनुक्रमकोशः ५३
भजन्त्यारूत (शा प ३६८ १) ३१९।३३ | भवभूतिमनादृल्य (शा प १७८) ३६।३८ || भिक्षाहार (भर्तृ ३ ३ १) ३७०।१०१
भण्डस्ताण्ड (सु ४६३) ६२॥२७९ | भवभूते सबन्धा ३६।३२ | भिक्षितकमल ३२५॥५
भद्रं तस्य तरो (शा प ३७७१) ३५३॥४५ | भवानिशफरोमेश १९५॥४५ ! भिक्षु व्कास्ति १ २४ २
भद्रं ते सदृर्श (शा प ५८ १) २०८!३२ | भवान्हि भगवा १०२।३० | भिक्षुक्ोऽपि सकलेप्सित ४|२७
भद्रं भद्रं ( नीतिरत्ज्ञ १ १ ) २२५१ १८ | भवितव्य ( विक्रम १४८ ) ९१।|२२ | भिक्षुद्वारि १ १२|२७२
भद्रात्मनो (रसगगा २ श्ले ) १०५॥१४१ | भवितव्यं यथा ९१।३ ० | भिक्षो कन्था (सृ २४ ०२) ६२t२८०
भद्रात्र ग्रामके (शा प ३८९५) ३४३!९ ६ | भवित्री र (महा ना १० १२) २०५॥९ | भिक्षो मास (दश ४ ७५) ६१।२७१
भद्रे वाणि ममान (सु ३१९४) ६७l६९ ! भवेत्खपर ( हि २ 3४ ) १४४|७८ | भित्वा (शिशु १८ २°) १२९ ६७
भयं ताव ( मुद्रा ५ १२ ) १३९॥४ | भस्मनि स्मररिपो २४५।१ | भित्त्वा सद्य (मेघ २ ४४) २९२॥२६
भयं प्रमत्तस्य (भाग ५ ?) ३८९ 1४९२ | भस्मना (वृ चाणक्य ६ ३) ३८ ९ ॥५३८ | भिनक्ति (नीतिरढ्ल ७) २३०।२२
भयादिवाश्लिष्य ३३८।८९ | भस्माङ्गुलिर्बको (शा प ४०६ ३) ३६४॥८ | भिन्दन्नरातिहृदयानि (सु ४७) १६॥४४
भयेन कृष्णान्यरु १२६॥२८ | भस्मान्धोरगफूत्कृति ५।६ ० | भिन्दानो (शा प ३८ १४) ३२५॥६६
भये वा ( पच १ १ १८ ) १६८॥५०४ | भस्मीभूत २८४॥२९ | भिन्चा महा (भामिनी अ १० ०) २३०।२९
भर्ता देवो (दपतीश ५८) १५६॥१४५ | भस्मोद्धूलन (कुव १२१ ) ३७०1८६ | भिन्ने चित्ते १६७l६३६
भर्ता यद्यपि (भर्तृ स ६२५) ३५०॥७९ | भागीरथी (कुमार ११ ३) २००l३६ | भिञ्ञोरस्कौ (शिश्यु १८ ६५) १३०॥९५
भतरं किल (र २ २९ २०) ३८८॥४६३ | भाग्यवन्र्त (शा प ४४ २) ९०।२ | भिषजो (भा १ २ ५१८ ९) ३८८॥४४२
भर्तुं पिण्डानृण (शा प ३९६१) ३६०॥१ | भाति निर्विवरे २६४२५४ | मीतवत्स (भा १ ५६२ २) ३७७|। १०
भर्तुर्यस्य कृते ३०९l१४ | भाति रोमा (सूत्ति ५३ ६६) २६७l|३४० | भीतासि नैव ३५५॥२३
भर्तृभि प्रणय(किरात ९ ५४) ३१५॥४६ | भाति विन्यस्तक (शा प ३२८७) २५७|२ | भीति॒र्नास्ति भुजंगुपुगव ५l५५
भर्तृषूपसखि (किरात ९ ६६) ३१६॥५८ | भातु नाम ( शिशु ? ० ८ ६ ) ३२१।१२ | भीतो वाडवव॒ासतो २११t४९
भलैर्भिन्ना प्रति १३१।११६ | भानुबिम्बमिद २९४११ | भीमं यज्जलर्थेि १२०t1`४ ०
भवत इवाति १९६।८ | भानो. पादैर्दहन ३३७॥४१ | भीर्म वनं (मर्तृ २ ९९) ९२७४
भवतामहमेिव १०३।६६ | भानो शीतकरस्य ४४l६ | भीमश्यामप्रत॒नु (शा प ११४७) २२०॥९
भवति गमनयो २०३॥९८ | भानावभ्युदिते ३०२॥ , १ | भीष्मग्रीष्मर्तु (शा प ५० ०) १८१॥१६
भवति जयेिनी २०३॥९९ | भानुर्वै जायते १९४॥३६ | भुर्त्त खादुफलं (शा प ९७९) २३६॥२०
भवति ( मालर्ती. १० १५ ) ३१०। १ | भारं स (भा १२ १ १३४ १) ३९२॥६१७ भुत्तानि यैस्तव (शा प ९८०) २३६॥१३
भवति ( वासब ४ ) ४७।१०२ | भारत चेक्षुदण्र्ड २०५१ | भुक्का सृणा (भामिनी अ ४५) २२१॥२३
भवति (शा प १००८) १७७1९७६ | भारल्या वदनं १३६४७ | भुक्तिमुत्क्षिीकृ (का प्र ४ ७<) ८७|१४
भवतु विदितं ( अमरु ३० ) ३५६।१६ | भार्यं पति (भा १ ३०२४) ३९०॥५१७ | यैक्रंवा भू° २३४॥१२२
भवतु विदिर्ते (सु १६१७) २९१ो१४| भायीँहि (भा १२ ५५०६) ३९३1६४1 | भुमश्युलैि १३१।११८
भवत्कृते खञ्जन ३१२॥३५ | भार्या पुत्र (म ८ ४१६) ३७८॥५६ | श्भ्रुझालकं (राषव ७ १'*) ३°६l२७
भवक्तुरगनिष्ठुर १३०॥१११ | भार्यावन्त (भा १ ३०२९) ३७८॥५३ | भ्रुजगङ्कुण्डली व्यचीं ३l५
मवलेयेकस्थले १६७॥५३० | भार्यावियोग' (चाण ३ १४) १७२॥८२७ | भुजैगभोग (कान्या ३ ३४६) १०१l१°
भवल्या विश्लेषे २९२॥१६ | भाषासु मुख्या २९॥१ | भुजतरुवनच्छाया(राजत १ ४६)३३॥४५
भवनभुवि (विद्ध ४ १२) २६०॥१०७ | भासते प्रति (का प्र ९ ३८७) २०५॥१० | भुजपञ्जरे (भामिनी शृ] ३७) ३१८॥४
भवनमिव मदीर्य ३५४७७ ! भासो रामिलसो (शा प १८८) ३७l६९ |! भुजप्रभादण्ड २२११७
भवनेत्रभवो २८२l|1२४ भाखत्कर्कश ३०३॥१२९ भुज्यन्ते खग्रहस्थिता ७1४ ०
भवने सुहृदो (पच २ १७) ३८९॥४७६ | भाखत्कुण्डलमाणि २५९॥६९ | भुजे विशाले विमले (सु २२७४) ७८।६
भवनोदरेषु परि(शिशु ९ ३९) ३००॥६४ | भाखर्द्वश (प्र राघव १ ९) ३६॥५२ | ३धुञ्जाना (ज त ३ १९४) ३७७l11
भवन्ति ते ८५॥१० | भाखाश्रूतत॒रु ३३०॥७ | भुवनमोहनजेन २८२1२९
भवन्ति नम्रा (भर्तृ २ ६२ ) ७५l११ | भिक्षवो रुचिरा १९६॥११ | भू पर्यङ्को (भद्वै ३ ९३) १६९l|६०
भवन्ति नरका'(व '१०४) ६९॥५| भिक्षार्थी स (कुव १५९) १३॥४७ | भूजाने किं न जाने १३४।|३०
भवन्तो वे (भर्तृ १ ५२ ) २५२॥४८ भिक्षाशनं (भर्तृ ३.१६) ७६॥३७ | भूतानामपर (३ १३८५१) ३८८॥४४५
भवबीजाङ्करजल (सु २६)
१९
भिक्षाशर्न (शान्ति.१.२३) ३७५॥२४३
भूतानाम (भा १२ २५२३) ३९३l६६ ०
पृष्ठम्:सुभाषितरत्नभाण्डागारम्.djvu/४८४
दिखावट
एतत् पृष्ठम् अपरिष्कृतम् अस्ति