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पृष्ठम्:सुभाषितरत्नभाण्डागारम्.djvu/४८३

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५२ सुभाषितरत्नभाण्डागारस्थपद्यानाँ
बहुतरहिते रसातल १७०॥७४३ | बाहू द्वौ च सृणाल (शू ति १) ३७८॥५५ | ब्रह्मघ्ने च सुरापे (पंच ४ ११) ७५l१
बहुधा बहुभि (पच ३ ७५) ३९०॥५४० | बाहू प्रियाया जयता मृणा २६४॥२२८ | ब्रह्मन्नोऽपि नर (चाणक्य < २ ) ६४I४
बहुधा राज्यलाभेन यस्तो १०१॥९ | बिडालभक्षिते दु ख ३७२।१६३ | ब्रह्मज्ञान (भर्तृ ३ १४) ३७५॥२२४
बहुनात्र किमु (शा प ३५०६) २९३॥२ | बेिडौजा पुरा पृष्टवान्प १००।३ | ब्रह्म नान्तमपि 1 ८७1२४
बहुनिष्कपटद्रोही बहुधा ५४1१३ | बिन्दुद्वन्द्वतरङ्गि (सूत्ति,४.१० ६) ३५॥२९ | ब्रह्महल्या (मनु १ १ ५४) १५४॥४७
बहुभिर्न (पच ३ १ १९) १६५॥५६५ | बिभर्ति वदनेन किं क २० ३1१० ३ | ब्रह्माण्ड कियद ८ ०|I४३
त (शा प २०८५) १४५॥११३ | बेिमेति पिशुना (सु ३७८) ५६।१०८ | ब्रह्माण्डं प्रवि १२६1३०
बहुभिर्मू(वृ चाणक्य ७ ११) १६९॥७१६ | बिमेमि सखि (शा प ३४३३) २८३॥२ | ब्रह्माण्डकुम्भकारं १ ६!|५९
बहूनामप्यसा (सु २७ ४२) १४४।८३ | बिभ्रतौ (शिशु १० ८) ३१४११ | ब्रह्माण्डच्छत्र ( दशकु. पू १ ) २०1६६
बहूनामल्पसाराणा (भोजप्र १४५) ८३॥३ | बिभ्रत्पाथ कपर्दे सुर ८1१ १७ | ब्रह्माण्डमण्डली (भद्वै स २८ ४) ७९।३
बहूनि न॒रशीर्षाणि (सु १४४) ३९॥२३ | बिभ्राणा गरलं कण्ठे भुर्जग ५५॥५२ | ब्रह्माण्डसपुटकलेवर 2७!८
बह्वपि खेच्छया (शिश्चु २ ७३) ८४॥५ | बिभ्राणा हृदये (कुव.१५५) २९०॥८४ | ब्रह्मा दक्ष कुबेरो (सु ८ ३) १ १९
बह्वाशी खल्प (चाणक्य ६९) १६२॥४०० | बिभ्राणे त्वयेि (शा प ११६०) २४५॥४ | ब्रह्मादयोऽपि ११ ° ८
बाणं हरिरिव कुरुते सुजनो ४७l९७ | बिभ्राणोऽभिनवे (सूत्ति २ ७२) १८॥३५ | ब्रह्मानन्दप्रचुरं ३१८४
बाणकरवीरदमनकशत 1 °३॥६९ | बिम्बाकारं सुधा (भर्तृ स ६१ ९) १९४॥१५ | ब्रह्मा येन (गरुड अ १ १३ ) ९३॥९८
बाणाः पञ्च (रत्नां ईं ईं). २८२॥१४१ | बिम्बितं सृतपरि (शिशु १० ५) ३१४l८ | ब्रद्झा विष्णुद॒िने॒ ३७३॥१९३
बाणाक्षिप्ता (शिशु १८ ५६) १३०।८७ बिम्बोष्ठ एत्र (नवसाद्दस|ङ्क ) ३१२॥९ | ब्रह्मैव सल्यमखिल ३५२॥२९
बाणाग्निमरूतक॒रुणो विकिरन् २¢२॥१३५ | बिलाद्वहिर्बिलस्यान्त ३६४॥१४ | ब्राह्मण ब्राह्म(भा ५ १४२५) ३९०॥५२०
बाणान्सहर (विद्ध १ २२) २८२॥1४३ | विसमलमशनाय खादु पाना ६०।२४६ | माह्मण (हि•° ९६) 1४७२०२
बाणेष्वारोप्य गुणान्विधाय २५०l६ | वीजै चिन्तामणिश्चत्के १२२।१६७ !| माह्मण (भा ३ १४ ० ७५) ३८०।१२१
बालक्रीडनमेिन्दुशेखर 21l<`* | बीर्ज चेदिन्द्रदन्तिस्फुरित १३८॥८५ || ब्राह्मणा गणका १५६।१३१
बालक्रीडनमिन्दुशेखर १3ँ१'रै | बीजैरङ्करितं (शा प ८५६) २२६।१६३ | ब्रूत नूतन ( दश २ १ ३ ) ७९॥२
बालयं वा (ढ् * १४७) , ३५१l१ | बीभत्स (शन्ति १ ७) ३७६।२५७ | ब्रूतेऽन्यस्या ( शा प २४२) ३८८॥४५०
बालसख्रिबूत्व॒म॒कारणहुाख्यं .. १७४l८९५ | | (शान्ति १ २० ) ३७०॥९३ | ब्रूते सप्रति (शा प १२५६) १२२I१८२
बालस्यापि रवे (पच १ ३५७) ७८।१
बाल वन्दन(शोप ३५३९)7 ३०५२ | उध,कीद्दर्वोो ब्रूते २० ०॥३० भ
बालकटाक्षेसूत्रैतमसतीं ३७|१५ | उधूभै ं ँोजूंभु १:<) 1६१l३६७ | भक्तं रर्त्त (शा प १५१७) १५४॥७२
बाला तन्वी (सु १४० १) ३१७l२ बुद्धिं वर्धयति श्रियं वित ८७l३६ | भत्ताना ( पच १ ३० ७ ) ९७॥१७
बालातप (गरुंड पू १०८) ३८शे४८५ | बुद्धिं प्रभाव (भा ५ १३७४) ३८२॥२३५ | भक्ति प्रेयसि (शा प,३७५६) ३५१॥३५
बालादपि (द्दि २•७९) १६४॥४८२
बाला मामियमिच्छतीन्दुवद ३७२॥१३५
बालिकारचितवस्त्रपुत्रिका ३७५॥२४१
बालिशस्तु नरो (र ४ ७ १ ०) ३९३॥६३६
बाले तवाधरसुधारसपान ३१३॥४९
बाले नाथ (अमरु ५७) ३०९l७
बालेन्दुवक्राण्य (कुमार ३ २९) ३३१॥२६
बाले बाला विदुषि विबुधा १७८।१० ०५
बाले माळेयमु (शा प ३८ २९) ३३६॥३१
बाले ललामले (शा प ३२९३) २५८॥४१
बालोऽपि नावमन्त (मनु ७.८) १४२॥८
बाल्ये गेहपतौ निमीलति २५६॥४८
बाष्पाकुलं प्रलपतोर्गृहिणी ३२९॥३
बाहुपीडनकच(शिशु १० ७२) ३१८॥१५
बाहुवीर्यै (वृ.चाणक्य.६.११) ३८ ६॥३५९
बाहू तस्या कुचाभोग २६४॥२२७
बुद्धिमन्तं (भा १२ ६४९८) ३८३।२३७
बुद्धिमत्त्वाभि (दृ श.६९) १६९।७ ० ०
बुद्धिरूप (प्रसगा.१३) ३८३२३९
बुद्धिय सत्त्वरहिता (सु ५१२) ७०॥२०
बुद्धिशख्त्र. (शिशु २ ८२) १४६।१८४
ब्रुद्धिश्च हीयते (भा ३•३०) ३७९॥७०
बुद्धिश्रेष्ठा (भा ५ १° ५६) ३८३॥२४०
बुद्धेरगोचर (शान्ति ३ १४) ३६८॥३६
बुद्धैौ कळु (भा २.२६८०) १६६॥६०३
बुभुक्षित किं न (पच ४ १६) ३९०॥५४२
बुभुक्षितैव्र्याकर (भर्तृ सं.६२ १) ६४॥११
बृहत्सहाय (शिशु २ १० ०) ८७॥१९
बोधयन्ति न (शा.प.२७४) ७१९
बोधितोऽपि बहुसूत्किवि ५९॥२११
बोद्धारो (भर्तृ.३.२) ३९०॥५३६
भक्तिप्रह्वविलोकन (रसगगा २ उ ) १५॥३२
भक्तिप्रह्वाय (शा प १३८) २७l१२
भक्तिर्भवे (का प्र १० ५२४) ४८l१२६
भत्ते द्वेषो जडे (शा प ३४१) ६४I४
भत्तो गुणी ( हि २ १६ ) १४४।७१
भगवदनभ्युपगमनं ४३॥१
भगवन्तैौ ( शा प `४४९ ) ९०॥५
भगिनि (सूत्ति ३९ ७) २८ ६l1४
भगीरथाद्या (शा प ४० ० ३) ३७४।१९७
भन्मकुम्भशकलेन ५९॥२१५
भमा वर्य (सु ३ १७९) ६७l५1
भमाशस्य ( भर्तृ २ ९२ ) ९४॥१०९
भमासु रिपुसे (शा प १२४४) १०२॥१९
|| भमैर्दण्डैरात ( शिशु १८ ६७) १३०{९६
भद्र्क्त्वा (शूगाररसाष्टक ५) २९६।१३
भङ्गाकोर्तिमषीम 1३४t१७