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पृष्ठम्:सुभाषितरत्नभाण्डागारम्.djvu/४७४

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सस्थाननिर्देशमनुक्रमकोशः
४३
नि पीतर्पीनति २१ ६।१७ | नितरा नीचो (भामिनी अ ७) २२०॥६ |} निन्नोन्नत वक्ष्यति ८'४ १७
नि पीते कलशो ३६१|४ ७ | नितान्तस्खच्छहृदय १९५l५० ! निम्ब किं (शा प १ ०४०) २४१!१५५
नि शङ्कं गजपति २२३।७७ | निल्य छेदस्तृणाना (अष्टरत्त ३)३८५॥३१८ | नियत (काम नी २ ४ ३) १५२॥४१०
नि शङ्क बहिरम्ब ३६५॥९ | नित्यं (स्काद अा अ २ ५) १६६॥५९९ | नियतै पदैर्निषेव्य १७१७९७
नि शङ्कसकोञ्चत(नै ७ ७७) २६५॥२७८ | नित्य निरादृति (ख <९) १l १ ° ! नियमयसि (अ शाकु ५ ८) १० ६१६७
नि शेषं व्यपनीय ३२०॥२० नि॒लुं ब्रह्म॒ (शा पृ १५५८) २९१l३ || नियुक्त क्षत्रियो(हि २ ९७) १४७t२०३
नि शेषच्युत (अमरु १०५) ' २९३॥७ | नित्यं मनोरथस्यापि ३*°'४1१ | नियुत्तहस्ता (महा ना ९ ३४)१५१।३८ ३
नि श्वासानलविद्ध २७७५८ | निल्य या (ड्.ँँँँँँँँर्र्८) `७१t४२ ! नियोगिभि (शा प १३ ३२) १४४ . ३
नैि श्वोसा बदनॆ(अमरु ९२) ३.९||११ |नििष्ं दृद्वियुपैर्षेि 1 <t1 1४ | निरक्षरे वीक्ष्य १७३८५९
नि श्वासोद्भी (काम नी ३ १८) ३८४1२८८ निल्यं स्नाता सुगन्धा ३'".°l२ | निरञ्जने (किरात ८ ५२) ३३८1९५
नि सौरस्य(शो प ४८१)१५५११४ |निखमाचरत* ३७°1l 11'५ | निरतिशय (पच १ ३ १) १७१t७७५
नि सीम (भौमिनी शू.४६) २५९l६१ | निल्यमाराधितूा देवै १९५ t४९ | निरर्थकं जन्म (स क २ २५३) ' २०५॥५
नि सृतोऽह (शा प,४३२७) ३७२॥१४२ | निल्यमास्यं शुचि(शा प ६१२)१५६l१४४ | निरवद्यानि पद्यानि ३०b२
नि स्रेनेह नि करुण ३५८८० | निल्यानि॒ल्यविचारणा ३७०l८४ | निरवधि (काव्यप्र १० ४ २८) १८।१६
नि स्रेह पतिरुज्झिता २८७|९ | निल्यार्यपृथिवी १५०1३२५ | निरस्थन्नालीकं ६७l५९
नि लेहो याति (शा.प ४१००) ३६७l६ | निदधिरे (शिशु ६ २४) ३३५l१२ | निरा (काव्यार्ले स्, ३ ११२) २२३॥९४
नि स्वो वष्टेि शतं (अष्टरल ९) ७७l५० | निद्रातुन्दिलशोण ३२९॥२३ { निरीक्षेिर्तुं (शिशु १७ ६२) १२७॥११
निकटस्थं (दृ श ७५) १६९l७०६ | निद्रानिवृत्ता (का प्र ?० २२) ३२८l१ | निरीक्ष्य विद्युन्नयनै (कुव ६१) ३४०t२०
निकटस्थं दहल्यग्निर्न १४२॥११ | निद्रामो॒ीलित (भर्तृ.स ५७९) २३१॥५१ | निरीक्ष्य वेणी ३३८॥७१
निकार्म क्षामाङ्गी (मालती २ ३)२७६॥३४ | निद्राधैमीलित (र्दश ४ २३) २७८I|४० | निरुत्साहं निरानन्दं(हि २ ७) ९०1१०
निखिलं जगदेव(रसगगाधर ) ३६७॥२७ | निद्रितस्य बत ३४०l४ | निरुद्यमानवद्याङ्गयां १९३२
निखिलेषु गुणेषु १०४!८८ | निद्रे लोचनमुद्रणं २८ १। ११० | निरुपादानसभार (वेणीसंहार * ) ३1३
निचयेिनि (किरात १० २९) ३४६॥१४ |! निधे कलानामपि २१०।१५ | निर्गतामलवाक्यस्य ३४1३
निजकरनिकर (शा प ७५२) २१०1८ | निन्दन्तु नीति (भर्तृ स.२६५) ७८l११ | निगैल्य न विशे ३९३॥६३५
निजगुणगरिमा ८३॥५ | निन्दा य (दृ श २७) १६८॥६८३ | निर्गुण इति मृत ४०l२७
निजदोषा (का प्र,१० २३) १७१॥८०१ | निन्द्यते पितृभिस्त ८९॥८ | निर्गुणमप्यनुरत्त (सु २४२) ४८l१४१
निजनयन (सा द ८ १५) ३३४।१०३ | निन्द्यन्ते यदि (प्र राघव १ २०) ३२॥४८ हर्त रू(वृ चा ८ १६)३८८t४३८
निजपतिराद्यः १८१।|२५ !| निपतति किल ९२६२ | निर्गुणेष्वपि (शा प २३२) ४६l३९
निजपदगतिगुणरञ्जित ४७|९६ | निपल्य युधि (शा प १६०७) १४३॥५१ | निर्जितसकलाराति २०१l५९
निजपाणिपल्लव (शिश्च ९.५२) ३५९l८८ | निपपातसंभ्रमभृत (शिशु ९ ७१)३१०1३ | निर्णेतव्यो २६८३६५
निजप्रियमुखभ्रान्ल्या ३३७॥५९ | निपानमिव (हि १ १७६) ८२।९ | निर्णेतुं शक्य (कुव १७१) ३१२॥1७
निजरज पटवास (६.३७) ३४१॥४३ | निश्बन्धनी (भा १२ ६५४८) ३८०॥१४८ | निर्दयं खङ्ग (कुमार १६ ६) १२७॥४
नेिजवर्षाहितस्रेनहा १४५॥१२५ |!| निबिडतमतमाल ३५४७३ | निर्दहति कुल (प्रसंगा ८२) ३८८l४२९
निजसौख्यं (हि १ १५८) ७१॥१८ | निबिडानुषत्त २६६॥३०४ | निधैौंते सति (शिशु ८.५१) ३३९l१°८
निजा काय (शा प ३८ ३२) ३३६॥२१ | निमृत निभृर्त ३५२२४ | निर्मग्नेन मयाम्भसि १५॥२६
निजाशुकावृता (शा,प ३७३४) ३२७|२ | निमग्नस्य (घट नीति २०) १६०॥३०२ | निर्मजचक्षुठं (प ि*३ रै) रे६६l'१*
निजानपि गजा ११७७६ | निमित्तमुद्दि (षट नीति १०) १७४|९०८ | निर्मास मुखमण्डले १२४l८
निजानुत्पत (भा ५ ११६५) ३८६॥३८४ | निमीलदाकेक (किरात ८ ५३) ३३८l९६ | निर्माणकौशल(सा द १० ३३) २५३॥६
निजाशयवदाभाति १६८1६९७ | निमीलनभ्रंशजुषा(नै १ २७) २५३॥७ निमय खलजिह्वाग्रं (सु ३ ७६) ५६॥१० ६
नितम्बगौरवेणासैौ २६८॥३७५ | निमीलनाय (शा प.७४३) २०९॥४ | निर्मित्सु सुदती २५४४५
नितम्बर्पीङय २६९॥४०८ | निमेष (भा १२ १२५० ३) १६१॥३५९ | निर्मुत्तशेषधवलैरचले १३५॥२२
नितम्बबिम्ब २६८॥३७२ | निन्ननाभि (का प्र,१०.४६) ३३८।|९९ निर्मुक्तशैश (प्र.रघव २ १९) २५३॥२३
नितम्बिन्यो निल्यं विनय ३५३॥|३७ | निन्नप्रदेशा (कुमार १४ १४) १२८I४५| निर्यच्छेोणितपूरताघ्र ११५४८
निनम्यो विशाल. १७५॥९४४ | निन्नेष्बोर्घीभूत(शिशु १८ ६९) १३०l९८ l निर्यद्वासरजीव (विद्ध २ २२) २&'I६2