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अाबोरणाङ्कुशभया ९२1७८
अाधोरणानां (रञ्चु ७ ४६) १२८॥३०
अाध्मातोदू (शा प ३८५३) ३३९ ॥१२४
अाननं मृगशावा (रसगगाधर)२६२1१६७
अाननानि हरिणी ३० ०l३३
अाननैर्विचक (शिशु.१०.३६) ३१५॥३९
अानन्तरमिव बहि ३१॥२६
अानन्द कचिदञ्च ३५९८l५६
अानन्दं कुमुदादीना २९९॥३
अानन्दम (का.प्र.१० ५४०) २७८।|२३
अानन्दमन्थरपुरद (कुव १७१) ११1१७
अनन्दमत्रमकर २३॥१२५
अानन्दमादधत २२१२५
अानन्दमृगदावाग्नि (रसगगाधर) ८७1६
अानन्दयति कोऽल्य १९८५
अानन्दश्ठथिताः सम ५l५७
अानन्दस्रुतिरात्मनो ९०i१४
अानन्देन (सु ३९) २५१८५
अानम्रा स्तबकभरे २२३1७६
अानीला करपल्लवै |३०२॥११२
अानेतुं न गता ३५९।१०२
अापत्समुद्धरणधी ७८!१३
अापत्सु मित्रं (हि.१•७२) १६३॥४४५
अापत्स्वेव हि मह (शा प २१४) ४७l८६
अापदर्थे धनं र (हि १.४२) १६१॥३४८
अापदथै धनं (भा १ ६१६ ९)१६७l६४२
अापदा कथि (चा.नी.७४) १६२!४०५
अापदामापतन्ती (हि १.३०) १६७॥६२९
अापदि मित्रपरी १७०७५५
अापदि येनोप (पच १ ३६६) १७१l७७९
अापद्भत खलु महा (रसगगाधर)५०॥१९१
झापद्भत हससि किं ६५t१७
अापद्युन्मा (का.नी ५.२८) १६४॥४८४
अापश्नाशाय (पब २.१८ १) १६४॥५३७
अापरितोषाद्वि (अ शा १ २) १७०|!७४६
आपस्कूराछूनुगात्र १३०t८२
अापाटलैः प्रेथमम ३२३।१६
अापाण्डु पीनकठि १८५1 ०
अापाण्डुरा शिर ३६५॥४५
अापातालगभीरे २३१॥६५
अापुङ्खाग्रममी (हनु ५.२३) २८२॥१४०
अा पुष्पप्रसवा(शा प*१०२८)२४१t१३९
अापूरतमिर्द शयाम
अापूर्येत पुनः स्फु (सु.७११) २१९l१५
२९७i३ |
सस्थाननिर्देशमनुक्रमकोशः
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अापेदिरेऽम्बरपथ (रसगगाधग्') २१९! ६
अापो विमुक्ता. क्र २१२i२८
अावद्धकृत्रिमस (भछट.६६) २3 ०!२'५
अावश्वन्प (शा प ३३० ९) २६१।१३६
अाबाल्यं पतिरेष १२०|१५०
अाबाहूद्भतमण्डलाग्र (सु.७४) २६।२० ६
अाभाति बालिकेयं पा ३१७l२
अाभाति शोभातिश २५ ७l१ ७
अाभुमाङ्गुलिठे (शा प ३२ ९ %) २५ ८॥३ ५
अाभ्या कुचा (नैषध ७ ७८) २६५l२७९
अामश्त्रणजय (शा प ४०४८) ३ ६४२९
अामरणादपि (शा.प.८८२) २२८t२ ०७
अामरणान्ता प्रण (हि १ १८०) ४ ६!४५ !
अामीलन्नवनील 2 ७ ० !४3 ०
अामीलिताल (मा.द.१० ९५) ३ १९ ॥२९
अामूलं कचिदुद्धृता १४२१ १
२४२l१६२
अामूलान्ता (शिशु.१८.२ १) १२९ 1६६
अामृशद्भिरभि(शिशु १० २ ९) ३१७॥२०
अामोदीनि (शा प १०५०) २४२॥१७५
अामोदैर्मरुतो मृगः (सु ८२३) २३६॥२६
अामोदैस्त दिशि (शा प ९९८) २३७॥५२
अान्नायानामा (काव्या ३ ८४) २०६।१४
अाम्र यद्यपि गता २३९१०४
अाभ्रे पल्लविते स्थित्वा ३३१!६
अायताग्रसितर ३०४1१४५
अायताङ्गुलिर (शिशु १० ६५) ३१७l२६
आयस्य तुर्यै (शा प रा १ १५)३८३॥२५५
अायल्यां (का नी ५ ६) ३८३२५७
अायरूता कलहं (अमरु १०६) ३५८॥५८
अायल्या गु (म ७ १७९) ३८३२५६
अायाञ्चतुर्थ (शा प.१३९२) १४६१६५
अायात. कुमुदेश्वरो ३०८!१६
अायातस्ते समीपं ११३।६
अायाता सखि ३४०l|११
अायाता जलदावली ३३०t२
अायाता मधुयामि (श्धृगारति २)२८५॥३७
अायाता मधुरजनी ३३१1१२
अायातासि वि (शा.प.३७७९) ३५३॥४७
अायाति याति पुनरे (शृगार ४) २९६{७
अायाति श्रियमज्ञ २५४l४८
अायाते च ति १८०l1०५1
अायाते दयिते मनो(अमरु ७७)३१९॥३८
अायाते दयेिते (दशरूप ४.१३) ३०५॥1
११
अायाते श्रुतिगो (सु ? ०५२) ३२९॥१५
अायातो दयितस्त (सु २०७७) ३०४]५
अायातो भवत (सु २ ४ १५) २०८।३ ६
अायान्ल्या दिवस ३२७t२०
अायामिनोस्तदक्ष्णो २५९l७६
अायासशतलब्धस्य(भर्तृ स ४० ०)६९1१३
अायु कर्म च (पच २ ८५) १६२॥४२८
अायु कलेोल (भर्तृ ३ ३७) ३७३t१८८
अायुदनमहोत्स (कुव० ॐ ६८) ११४॥१२
अायुर्वर्षशतं (भतृ ३ '• ०) ३ ७३॥१८०
अायुर्वायुव्य (सूत्ति ? ०७ २४) ३६९॥६९
अायुर्वित्त गृह (हि १ ? २३) १५७l१९७
अायुर्वेदकृता (चा.नी,१ ० ३) १४२॥२०
अायुस्ते नरवीर १०९२२५
अायूरेखा च २६४२४३
अारब्धे दयि (शा प ३३२५) २६३t२०३
अारभन्तेऽल्पमेवा (शिशु २.७९) ४५l२०
अारभ्यते न (भद्वै स २७७) ५०२०३
अारम्भगुवीं (भर्तृ २,४०) १७२८२६
अारात्कारीषव (सु २४१७) ३४८॥२२
अाराध्य भूपति (सु ३२५८) ३७४१९८
अाराघ्घ्घ्घ्घ्घ्घ्घ्घ्यमा (हि.२ १५८) ६०h१२७
अारमाधिपति २१४i८१
अारामाभरणस्य (शा प १० ० १)२१३६१
अारामोऽयमन (शा प.९३०) २३२l८७
अारुह्य शैलशि ३१२॥२३
अारूढ पति (ष्शेिशु.८.५४) ३३९l१११
अारूढक्षेितिपाल १२७२१
अारूढो मलया ३३३॥९८
अारोग्य वि (शा.प.३ १७) १७०॥७५७
अारोग्यमानृ (भा ५ १० ५५) १७२l८२४
अारोपिता शिलाया : ३६८t८
अारोप्यते शिला (हि.२.४७) १६३४७५
अारोहतु गिरिशि ९1४४
अात देवान्नम १५७l१६८
अातनामिह जन्तू 9 ० 1८
अालक्ष्यदन्तमुकु (अ.शां,७ १७) ८९l१३
अालपति पेिकव २७०१1
अालम्बे जगदालम्बे २२
अालम्ब्याङ्गणवा (अमरु ७८) २९०l९1
अालस्यं स्त्रीसेवा (हि.२.५) १७१t७९४
अालस्यं स्थिर (सूक्ति.११५ १४) ६३॥३६
अालस्यं हि मनु (भर्तृ.२•७४) ८३॥१५
अालस्योपहतां (चा.नी.५.७) १५७१७७
पृष्ठम्:सुभाषितरत्नभाण्डागारम्.djvu/४४२
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