एतत् पृष्ठम् अपरिष्कृतम् अस्ति
३७१
श्रीललितासहस्रनामावलिः
| अ-४ वर्णकपिष्यं | विप्ररूपायं |
| जन्ममृत्युजरातप्ततप्तविश्रान्तिदथिन्यं | वश्वभ्रमणकरिष्यं |
| सवोपनिषद्घुष्टये | ओं-४ विश्वग्रासर्थ |
| शास्यतीतकलामिक | ऑ४ विद्मभायं |
| गम्भीरायं | थे वैष्णव्यै |
| गगनान्तस्स्यायं अयोनये | |
| विष्णुरूपिण्यै | |
| गर्वितायें | योनिनिलयायै |
| गनलोलुपायं | कटस्थायी |
| कुल लहपिण्यं
कल्पनारहितः|| बोरगोष्ठीप्रथाएं | |
| कूष्ठम् | वीराये |
| ऑ-४ अकान्तापं | अं-४ नेकर्यायं |
| ओं-४ कान्तार्धविग्रहायं | ओ-४ नादरूपिणे ९०० |
| कार्यकारणनिर्मुक्तयं | विज्ञानकलनायं |
| कामकेलित | रङ्गितायें कल्याणं |
| वनकनकdट | कार्य विदधयं |
| लीलाविग्रहधारिण्यै | वन्ददासीं |
| अयं | तत्त्वाधिकायं |
| क्षयविनिर्मतायै | तवमय्यं |
| मुधायं | तत्वमवंस्वंरूपि |
| क्षिप्रसादिन्यै | समगानप्रिययं |
| ऑ-४ अन्तर्मुखसमराध्यायं | ओं-४ सौम्यायं |
| ओं-४ बहिर्मुखमुदुर्लभथं | ऑ-४ सदाशिवकुटुम्बिन्यं |
| मध्ये | सव्यापसव्यमागस्थाय |
| त्रिवर्गनिलयायै | सर्व पद्विनिवरिम्यं |
| त्रिस्थाएँ | स्वस्थाएँ |
| त्रिषुरमालिन्यं | स्वभावमधुरायें |
| निरमयायं | धीराणे |
| निरालम्बये | घरसमविषं |
| स्वात्मानमर्था | चंतम्यार्यसमाराभ्यामं
सुधासृत्य || पंतन्यकुसुमप्रियायं |
| ओं- ४ संसारपङ्कनिमग्नसमुद्रणपण्डित्यं | ओं-४ सदोदितायं |
| भ४ यशप्रियायं | फ-४ सचतुष्टयं |
| यशकश्यं | तरुणादित्यपाटलये |
| यजमानस्वरूपिण्यै | दक्षिणदक्षिणाराध्यायं |
| धमधािरयं | |
| धनाध्यक्षाएँ | दरस्मेरमुखाम्बुजायं |
| धनधान्यविवीधन्यं | कौलिनकवलयं |
| विप्रप्रियायै | अनभ्यंकवल्यपददायिन्म |