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पृष्ठम्:वायुपुराणम्.djvu/६३२

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नवषष्टितमोsध्याय: तेषां प्रधाननागाश्च शेषवासुकितक्षकाः । सकर्णीरच जम्भव अञ्जनो वामनस्तथा ऐरावतमहापद्मौ कम्बलाश्वतरावुभौ । ऐलपत्रश्च शङ्खश्च कर्कोटकथनंजयौ महाकर्णो महानीलो धृतराष्ट्रबलाहको । कुमारः पुष्पदन्तश्च सुमुखो दुर्मुखस्तथा शिलीमुखो दधिमुखः कालीयः शालिपिण्डकः | बिन्दुपाद: पुण्डरीको नागवा कपिलचाम्बरीषश्च धृतपादन कच्छपः । प्रह्लादः पद्मचित्रश्च गन्धर्वोऽथ मनस्विकः नहुषः खररोमा च मणिरित्येवमादयः । काद्रवेया मया ख्याताः खशायास्तु निबोधत खशा विजज्ञे पुत्रौ द्वौ विश्रुतौ पुरुषादौ । ज्येष्ठं पश्चिमसंख्यायां पूर्वस्यां मनुजास्तथा विलोहितं विकर्णं च पूर्वं साजनयत्सुतम् । चतुर्भुजं चतुष्पादं द्विसूर्धानं द्विधागतिम् सर्वाङ्गकेशं स्थूलाङ्ग तुङ्गनासं महोदरम् | स्थूलशीर्षं महाकर्ण मुञ्जकेशं मनोरथम् हस्त्योष्ठं दीर्घजधं च अश्वदंष्ट्र महाहनुम् । रक्तजिह्व जटाक्षं च स्थूलास्यं दीर्घनासिकम् गुह्यकं शितिकर्णं च महानन्दं महामुखम् । एवंविधं खशा पुत्रं विजज्ञे साऽतिभोषणम् तस्यातुजं द्वितीयं तु खशा चैव व्यजायत । त्रिशीर्ष च त्रिपादं च त्रिहस्तं कृष्णलोचनम् 1 ६११ ॥६ ॥७० ॥७१ ॥७२ ॥७३ ॥७४ ॥७५ ॥७६ ॥७७ ॥७८ ॥७६ ॥८० हूँ |६५-६८ सुनिये | उनमे से प्रधान नाग जो थे, वे शेष, वासुकि, तक्षक, सकर्णी, जम्भ, अञ्जन, वामन, ऐरावत, महापद्म, कम्वल, अश्वतर, ऐलपत्र शंख, कर्कोटक, घनजय महाकर्ण, महानील, धृतराष्ट्र, बलाहक, कुमार, पुष्पदन्त, सुमुख, दुर्मुख, शिलीमुख, दधिमुख, कालीय. शालि-पिण्डक, विन्दुपाद, पुण्डरीक, आपूरण, कपिल, अम्बरीष, घृतपाद, कच्छप, प्रह्लाद पद्मचित्र, गन्धर्व, मनस्विक, नहुष खररोमा और मणि आदि नामों से प्रसिद्ध है । कद्रू के पुत्रो का वर्णन तो मैं कर चुका अब खशा के पुत्रों का विवरण सुनिये ।६६-७४। खशा ने दो पुत्रों को उत्पन्न किया, जो दो के दोनो पुरुषादक ( मनुष्य का भक्षण करनेवाले थे । पश्चिम संख्या में ज्येष्ठ, और पूर्व संख्या में मनुजों की उत्पत्ति हुई । सर्वप्रथम खशा ने विलोहित विकर्ण नामक पुत्र को उत्पन्न किया, जो चतुर्भुज, चतुष्पाद, द्विमूर्धा, द्विधागति ( दो प्रकार से चलने वाला) सर्वाङ्ग केश (सभी अंगों में केश संयुक्त) स्थूलाङ्ग (मोटे अंगों वाला) तुङ्गनास (ऊँची नासिका वाला) सहोदर, स्थूलशीर्ष, महाकर्ण, मुञ्जकेश (मूंज की तरह पीले वर्ण के केशोंवाला) मनोरथ, हस्त्योष्ठ (हाथो के समान ओंठ वाला, दीर्घजंघ, अश्वदंष्ट्र, (घोड़ों के समान दाढ़ों वाला ) महाहनु ( लम्बी दाढ़ी वाला) रक्तजिह्व, जटाक्ष, स्थूलास्य, ( मोटे मुखवाला) दीर्घनासिक, गुह्यक ( बुरा शब्द करनेवाला) शितिकर्ण (काले या चितकबरे रंग के कानों वाला) महानन्द एवं महामुख था । इस प्रकार के अति भयानक पुत्र को खशा ने उत्पन्न किया ।७५-७६। इसके उपरान्त इसके सहोदर छोटे भाई को भी खशा ने उत्पन्न किया । जो त्रिशीर्ष (तीन शिगेवाला) त्रिपाद, त्रिहस्त, कृष्ण-