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पृष्ठम्:ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त भाग १.pdf/७०२

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५. (घ) १. मंदबुद्धीनाम् (ग) (ङ) for ( मंदबुद्धिनाम्) (च) १. बुद्धीनां for ( बुद्धिनाम्) ( ३१७ ) 4 नक्षत्रसावन दिनात् सूर्यादीनां स्वसावन दिनानि । यस्मात्तस्मादाक्षं दुरधिगमं मन्दबुद्धिनाम् ॥ ५ ॥ मानुष्य पित्रेदेव ब्राह्मयान्यष्टा वमूर्त्तकालस्य । उक्तानि ज्ञानार्थं बार्हस्पत्यं नवममन्यत् ॥ ६ ॥ द्वौ द्वौ राशि मकराहतवः षट् सूर्यगति वशाद्योज्याः । शशिरवसन्त ग्रीष्मा वर्षा शरदौ सहेमन्ताः ॥ ७ ३३ भुव्यास गुणोभक्तः कर्क व्यासांतरेण रविकरपं भूमध्या दिर्घत्वं चन्द्रकन शेषम् ॥ ८ ॥ २ Y द्भ छाया ६. (घ) १. पित्र्यदेव (ग) पित्र्यदिव्य fox (पित्रदेव) २. ब्राह्मधान्यष्टा (ग) for (ब्राह्मचान्यष्टा) बर्हस्पत्यं (ग) वार्हस्पत्यं for (बार्हस्पत्वं ) (च) १. पिव्यदेव for ( पित्रदेव) ४. न्नवममन्यत् for (नवभमन्यत्) (ङ) २. दिव्यपिग्य for ( पित्रदेव) ब्राह्माण्यष्टा for (ब्राह्मयान्यष्टा) ७. (घ) १. राशी (ग) (ङ) for (राशि) (ग) (च) (ङ) २. शशिवसंत (ग) शिशिरवसन्त (ङ) for ( शशिरवसन्त ) ३. मकराहतवः (ङ) ( मकराहतव:) १. राशी for (राशि) ३. मकराहृतवः for ( मकराहतव:) ४. सहेमन्ता for ( सहेमन्ताः) ५. शादुभाज्या: for (वशाद्योज्याः) ८. ( घ) १. दीर्घवत्वं (ग) दीर्घत्वम् (ङ) for (दिर्घत्वं) ६. शरद: for ( शरदौ ) २. 'करण' तक पहली पंक्ति समाप्त (ग) कर्ण: (ङ) for (क) ३. 'कर्णोनम्' तक दूसरी पंक्ति समाप्त (ग) (ङ) ४. 'शेषम्' अगले श्लोक का प्रथम पद है (ग) (ङ) (च) १ दीर्घत्वं (ङ) for (दिर्घत्वम्) ४. ॥ ८ ॥ शेषं for ( शेषं ॥८॥ ) www.