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पृष्ठम्:ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त भाग १.pdf/६७५

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( २८८ ) स्थित्यर्द्ध महदिन्दो यथा तथा किन्न सूर्यस्य }

4 कि प्रतिविषय सूर्योराहुश्चान्यो यतो रविग्रहणे ॥ ३७ || ग्रासान्यत्वं न ततो राहुक्तं ग्रहण मर्कद्धोः । ४ एवं वराहमिहिर श्रोषेरणार्यभटविष्णुचंद्राद्यः ॥ ३८ ॥ लोक विरूद्धमभिहितं वेदस्मृतिसंहिताबाह्यम् । यद्य वैं ग्रहणफलं गर्गाद्यैः संहितामुदयभिहितम् ॥ ३८ ॥ ३७. (घ) १. स्थित्यद्ध fox ( स्थित्यद्ध) २. सूर्य: स्य (यहां क्रमसंख्या ३७ दी है) (ग) सूर्यस्य ||३|| for (सूर्य) ३. विषय (ग) विखयं for ( विषयं ) (ग) (विश [s - इस श्लोक का उत्तरार्ध ३६ वें श्लोक का पूर्वार्थ है। ४. सूयो for (सूर्यो) (च) ५. येथा (ङ) for ( यथा) २. (वि० -- यहां क्रमसंख्या ३७ अंकित है ) ६. वि० - यहां कोई क्रमसंख्या नहीं दी है, क्यों कि इस श्लोक का उत्तराधं, ३ श्लोक का पूर्वार्ध है। (ङ) १. स्थित्यधं for (स्थित्यर्स) ३८. (घ) १. कृतं (ग) (च) (ङ) for (क्रतं ) २. मर्केद्रो: (ग) मोः ||३६|| for (मर्को) (यहां ३८ संख्या दी है) (ग) ३. श्रीषेणाचार्य for (श्रीषेणार्य) इस श्लोक का उत्तरार्ध, ४० व श्लोक का पूर्वार्ध है । (च) २. को for (कै.) (वि० - यहां श्लोक संख्या ३० अंकित है ) ४. यहां क्रमसंख्या लुप्त है, क्योंकि यह ३९ वें श्लोक का पूर्वार्ध है । (ङ) २. मर्केन्द्रो: for (मर्केखो:) ३९. ( घ) १. स्विस्मृवि for (स्मृति ) ( यहाँ संख्या २३ है) २. संहितासु (ग) (ङ) for (संहितामु ) ३. यदि भिहितम् (ग) for (दयभिहितम्) (ग) ४. संहिताद्वाह्यम् ॥ ४० ॥ for (संहिताबाह्यम्) ५. यद्येव ग्रहफलं for ( यद्येवं ग्रहणफलं ) (वि० - इस श्लोक का उत्तरार्ध ४१ वें श्लोक का पूर्वार्ध है। (च) ४. यहाँ '३६' की क्रमसंख्या अंकित है। परन्तु उत्तरार्ध के अन्त में कोई "क्रमसंख्या अंकित नहीं, क्योंकि उत्तरार्ध, ४० वॅ श्लोक का पूर्वार्ध माना जाता है। (ङ) ३. यदभिहितम् for ( दयभिहितम् )