५. (घ) { २६८ ) दृष्टि गृहौच्यज्ञो यः स्तदंतरज्ञो नराकते तुजले । गृहभिव्य दर्शयति दर्पणे वा सु तंत्रज्ञः ॥ ५ ॥ हालांतरजले यो भूमिः । वेत्ति गृहाच्यं दृष्ट्वा तैलस्थं वा स तंत्रज्ञः ॥ ६॥ २ E वो गुहागू सलिले प्रसार्य सलिलं पुनश्चभूज्ञाने | प्रानयति जलाडू मि गृहस्य चौच्यं स तंत्रज्ञः ॥ ७ ॥ ४ ५ १ ज्ञात छाया पुरुष विज्ञाते तो कुछयो विवरे । कुर्क तेजसो यो वेत्थारुढ़ेः स तंत्रज्ञः ॥८॥ २ १. नरात्कृते (ग) for (नराकते ) ३. गृहभित्य (ग) गृहभित्यग्र (ङ) for (महभित्य ) ८. (ग) ४. इष्टग्रहाच्यज्ञो for ( दृष्टिगृहौच्यज्ञो) २. तु (ग) (ङ) for (नु) ( वि० - इसकी इलोक संख्या ४ है) (च) १. नेशकृते fox (नराकृते) ५. दर्पणे (ङ) for ( दप्पणे ) (ङ) ४. इष्टगृहोच्यो for ( हटियो) ६. यस्तदन्तरज्ञो for (य: स्तदंतरज्ञो) १. निरीक्ष्यते for (नराक्रते ) ६. (घ) १. नृगृह हग्ग्रहलांतर (ङ) for ( ग्रह तलांतर ) २. गृहस्य (ग) (च) (ङ) for ( ग्रहस्य ) ३. गृहोच्यं (ग) गृह्यौच्यं (च) (ङ) for ( ग्रहोच्यं ) (ग) ४. जलयो for (जले यो) ५. हृष्ट्वा (ङ) for ( दृष्ट्वा ) ६. व for (वा) (च) १. दृगृहतलांतर for ( हग्रहतलांतर ) (ङ) १. दृष्ट्वा गृहतलान्तर for (हग्रहालांतर) ४. जालभो for (जले यो ) ७. (ब) १. सुहाय (7) (च)(ड) . ( ग्रहण ) २. भूमि (स) (च) (ङ) for (भूमि) for ४. पुन: स्वभूज्ञाने (ङ) for (पुनश्च भू ज्ञाने) ६. वीक्ष्य for (वक्ष) ५. वौच्यं for ( चौच्यं ) १. कुडधयोविंदरे (ङ) for (कुषयोविवरे) २. कुडयं कं (ग) कुधैर्का for (कुट्ट के ) ३. वेत्त्यारूढ़ि (ग) वेत्त्यारूढ़ : tor (वेरूढ़ :) (ग) ४. ज्ञाते for (ज्ञाते) ५. पुरुष (ङ) for (पुरुष) ६. विज्ञातै for (विज्ञाते) (च) १. कुडययो for (कुघयो ) २. कुटुsh for (कुड़ के) (ङ) १. ज्ञातरछाया for ( ज्ञाते छाया) २. कुड्य' 'के for ( कुड़ के) ३. वेत्यारूढ़ि for (वेत्थारूढ़ :)
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