( २५५ ) चज्ञावाधेक्यं प्रथमं प्रक्षेपः क्षेप्य शोध्यतुल्यवधः । प्रक्षेपशोधकहते मूले प्रक्षेपके रूपे ॥ ६५ ।। रुपप्रक्षेपपदे पृथगीष्टक्षेप्यशोध्यमूलाभ्याम् । कृत्वाद्योत्पाद्यपदे प्रक्षेपे शोधने वेष्टं चतुरधिके ॥ ६६ ॥ इत्यपदकृति दलितांत्य पदगुणात्पदम् । अंत्यपदकृतिव्येका हिताद्यपदा हताद्यपदम् ।। ६७ ।। ६ 3 ६ ८ ६५. (घ) (दि०- ० - इस श्लोक की क्रम संख्या ६६ है) १. वज्ञवधैक्य (ग) वज्रमघैक्य for (बलावाक्य ) २. हृते (ग ) तुहृते for ( हूते ) (ग) ३. 'शोध्य' पद लुप्त है। (च) १. वज्ञवाघेक्य for (वज्ञावाक्य ) २. ह्ते for ( हूते ) १. वजवर्षैक्य for (वज्ञाबाधेक्य ) (ङ) ४. (वि० - यहाँ क्रमसंख्या ६६ अंकित है ।) ३. क्षेपवधतुल्य: for (क्षेप्यशोध्यतुल्यवचः ) २. हृते for ( हूते) (वि० - इस श्लोक की क्रम संख्या ६७ है) १. पृथगिष्ट (ग) (च) (ङ ) for (पृथगोष्ट ) २. ज्योत्पाद्य (ग) कृत्वासाद्य पदे for (कृत्वाद्योत्पाञ्चपदे) (ग) ३. रूपं for ( रूप ) ४. 'क्षेप्य' पद लुप्त है । ५. वेष्ट ( यहाँ श्लोक समाप्त है), 'चतुरधिके ६७ वें श्लोक का आरंभ है । (च) ४. रूपप्रक्षेपदे for (रूपप्रक्षेपपदे) २. धोत्पाद्य for (बोल्पाद्य) ५. वेष्ट for (वेष्ट) ६. रचिकें for ( रचिके) (ङ) २. कृत्वाऽऽन्त्याद्यपदे for ( कृत्वाद्योत्पाद्यपदे) ६. "चतुरधिके" लुप्त ४. वेष्ट for (वेट) (वि० -- इतकी श्लोक संख्या ६७ है) ७. +ये+ १. गुरणांत्यपदं (ग) for ( गुणात्पदम् ) (ग) ४. चतुरधिकेत्य for ( इत्य) २. व्यका (च) (ङ) for (व्येका) ३. हुता (ग) (च) (ङ) for (हता) ५. पदं for (पद) ६. पादा for ( पदा) (च) ९. स्त्रियता for ( स्यूना) १. गुरगांत्यपदं for (गुणात्पदं) ७. व्यका for (ब्येका) ८. (वि० - क्रमसंख्या ६८ हैं) (ङ) ४. चतुरविकेऽन्त्य for ( इत्य ) १. गुणाऽन्त्यपदम् for ( गुरखात्पदम्)
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