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पृष्ठम्:ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त भाग १.pdf/६२४

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( २३५ ) 3 भगरणादिशेषमगू छेदहतं ख चर दिनअशेषहतम् । अनयोरग, भगरणादि दिनजशेषोद्धृतं द्यगुरणः ॥ ८ ॥ अथवा जिनजभगरगादिशेषं येन गुरगं मंडलादि शेषोनं । शुध्यति विभाजितं स्वेन भागहारेरण सद्यगुरगः ॥ ६॥ मंडल राइयंशकला विकलाशेषादभिष्टतः कथितान || श्रनयति दिनगरगं यः कुठोकारं स जानाति ॥ १० ॥ ८. (घ) १. छेदहृतं (ग ) (च) (ङ) for (छेदहतं) २. खंच ( यहां मूल में 'र' नहीं है) for (खचर) ३. हृतम् (च) (ङ) for (हृतम्) ४. क्वगण: (ग) युगरण: for ( द्यगुण:) (ग) ५. च for (चर) ६. भगणादिधृतं for ( भगणादिदिन जशेपोद्धृतं ) (वि०-~~ इसकी श्लोक संख्या ७ है) (ङ) (च) २. खच for (खचर) ( वि० - इसकी क्रमसंख्या ७ ४. घुगण: (ङ) for ( धगुण: ) 2. (घ) १. गण: for ( गुण:) (ग) २. यह श्लोक 'दिनज से प्रारम्भ होता है, (ङ) ३. शेषकयो: (ङ) for (दशेषोनं ) दूसरी पंक्ति बिल्कुल भिन्न है— "सहशछेदो घृतयोस्तद्धातमहर्ह्यण द्यमलः” ||८|| (च) १. सधुगण: for (सद्यगुरा: ) (ङ) २. 'अथवा' लुप्त, दिनज for (जिनज) दूसरी पंक्ति निम्नांकित - सद्दशच्छेदोद्धृत्तयोस्तद्धातमहर्गणाद्यमतः for ( शुध्यति विभाजित स्वेन भागहारेण सञ्चगुण:) (वि- इसकी क्रमसंख्या ८ है ) १०. ( घ) १. दभीष्टतः कथितान् for (दभिष्टतः कथितान ) २. कुहाकार for ( कुठाकारं ) (च) १. दभीष्टतः for (दभिष्टतः) २. कुदाकार for (कुठाकार) श्लोक उपलब्ध नहीं |