( २३१ ) चन्द्र परिय सितं प्रवेश्यकर्णेन । शशिबिंबे शुक्लागात्परिलेखसमेन सूत्रेण ॥ ४ ॥ कगतस्थेनेंन्दो शुक्ल परिलेख्य पश्चिमाभिमुखः । राशिषु मेषतुलादिषु संशोध्य दिवाकरं चन्द्रात् ॥ ५ ॥ पूर्वाभिमुखः कर्कटमकरादिषु भवति शुक्लसंस्थानम् । एवं वा संस्थानं परिलेख्येन्दु प्रसाध्य दिशः ॥ ६ ॥ बाहुज्यॆदुदलगुरणाकरर्णविभक्ता भुजोन्यदिक् चन्द्रे । करभुजागृतश्चन्द्रमध्यंगः पूर्वछेषम् ॥ ७ ॥ प्राच्यपरे विपरीते फलकेन्यत्सर्वमुक्तवत्कार्यम् । शृङ्गोन्नतिपरिलेखाश्चत्वारः शीतकिरणस्य ॥ ८ ॥ ४. (घ ) १. करण for (कर) २. परिष्य (ग) परिलिक्ष्य for (परिलेस) (ग) ३. बिबे सूत्रां for (बित्रे शुक्ला) (च) २. परिलेष्य for (परिलेस्य) ४. परिलेष for (परिलेख) (ङ) २. परिलिख्य for (परिलेख्य) ५. (घ) १. कर्ण गतिस्थे (ग) (ङ) for (कर्णगतस्थे ) २. मेख for (मेष) (ग) ३. नेशे for (नेन्दो) ४. परिलिख्य (ङ) for (परिलेख्य) ६. दिकारं for (दिवाकरं ) ५. मुखम् (ङ) for (मुख:) (च) १. कर्णगतिस्थेनेदो for (कर्णुगतस्थेनेंदो) ४. शुक्लं परिलेख्य for ( शुक्लं परिलेख्य ) (ङ) ३. नैशे for ( नन्दो) ६. (ग) १. परिलेसेन्दु for (परिलेख्येन्द्) (च) २. कर्कट for (कर्कट) ७. शुक्ले for ( शुक्ल) १. परिलिरूपेंद् for (परिलेख्येन्द्) १. परिलिख्येन्दु for (परिलेस्येन्द्) (ङ) ३. मुखं for ( मुख:) ७. (घ) १. पूर्ववछेषम् (ग) पूर्ववछेशम् for (पूर्वद्वेषम् ) (ग ) २. भुजात्य दिक्केंद्रे for ( भुजोन्यदिकचन्द्रे) ३. मध्यत: (ङ) for ( मध्यगः ) (ङ) २. भुजान्यदिक् for ( भुजोन्यदिक् ) १. पूर्ववच्छेपम् for (पूर्वछेषम् ) (च) १. पूर्ववद्वेषं for (पूर्वछेषम् ) ८. (ग ) १. प्राध्यररे for (प्राध्यपरे) २. विपरिते for (विपरीते) ३. मुक्तवछेषम् for (मुक्तवत्कार्यम्) (च) ५. फलकेन्य सर्वमुक्त for (फलकेन्यत्सर्वमुक्त) (ङ) ६. वच्छेषम् for (वत्कार्यम्) ४. सीत for (शीत)
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