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पृष्ठम्:ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त भाग १.pdf/६१९

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अथ ( २३० ) शृङ्गोन्नत्युत्तराध्यायः सप्तदशः 3 भुजकोटिशशिमान शुक्लपरिलेख सूत्रपरिलेखान् । प्रतिदिवसं प्रतिघटिक यो वेत्तींदुद यज्ञः सः ॥ १ ॥ पराच्य परादिगभिमुखं शुक्लेतरपक्षयोलिखेतं भूमौ । अपवर्त्तेष्ट नैकेन राशिना कोटिभुजकर्णात् ॥ २ ॥ परिकल्पा बिन्दु तस्माद्वा यथादिशं कृत्वा । बाहुगात्प्राच्यपरां कोटि तिर्यकथं कर्णः ॥ ३ ॥ mmmmnavamaa १. (घ) १. छेदभुजकोटिकशशि (ग ) भुजकोटिकर्णशशि for ( भुजकोटिशशि). २. परिलेष for (परिलेख) (ग) 'परिलेख' लुप्त है । ३. परिलेषान् (ग) परिलेखात् for (परिलेखान्) (ग) ४. वेत्तं for (वेत्ती) (च) १. भुजकोटि कर्णशशिमान for २. परिलेष for ( परिलेख) ४. वेत्तीदूंद for (वेत्तींदुद ) (ङ) २. सित for (परिलेख) ४. वेत्ति for ( वेत्ती ) (ग) ५. हृदयज्ञ: for ( दुदयज्ञ:) ( भुजकोटिशशिमान ) ३. परिलेषान् for (परिलेखान्) २. (घ) १. प्राच्य (ग) (च) (ङ) for (पराच्य) २. मुंषं for ( मुखं ) ४. करर्णान् (ङ) (च) for (करर्गाव) ५. पदिगभि मुखं for ( परादिगभिमुखं) ६. तरतर for (तर) ८. वाशिना for ( राशिना ) mmmmmmmmmmm ३. लेखात् for ( लेखान्) ५. स तन्त्रहृदयज्ञ: for (दुदयज्ञ: सः) ३. लिषेत (ग) लिखे मौ for (लिखेत भूमौ ) ७. अपत्यकेनेष्टेन (ङ) for (अपवष्ट नैकेन) (च) २: मुषं for (मुखं) (ङ) ४. लिखेल (लिखेत) ३. (घ) १. बाह्वयात् (ग) (ङ) for (बाहुग्रात्) ३. लिषेत् for (लिखेत) २. तिर्यक् स्थतं (ग) तिथंस्थितं कम् ॥ ३ ॥ (ग) ३. बिंदु (ङ) for (बिन्दु ) ४. यथादिशि ( यथादिशं) ५. कोटि for (कोटि) २. तिर्यक्स्थं for (तियंकथं) (च) ६. परिकल्पार्क for (परिकल्पार्क) (ङ) ६. परिकल्प्याकं for (परिकल्पार्क) ७. दत्त्वा for ( कृत्वा) २. तिर्य स्थितंकरण for ( तिर्कथं करण :)