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पृष्ठम्:ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त भाग १.pdf/६१८

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( २२६ ) परिलेखो बलिनज्या विक्षेपाद्य षु षोडषोऽध्यायः । गृहरणोत्तरमकेंद्रोः षट्चत्वारिंशदार्यारणाम् ॥ ४७ ॥ इत्ति श्री ब्रह्मगुप्ते ग्रहणाधिकार: षोडशोऽध्यायः समाप्तः x ४७. (घ) १. परिलेषो (ग) परिलेष for (परिलेखो) २. षोडशोsध्याय: (ङ) fo1 ( षोडशोऽध्यायः) ३. केंद्र for (मर्केद्रो :) ४. 'इति' से 'समाप्त:' तक पाठ अंकित नहीं | wwwwww ( ग ) ५. वलन fox (बलिन) ४. इति श्री ब्रह्मसिद्धांते ग्रहणोत्तराध्यायः षोडशः for ( इति श्री ब्रह्मगुप्ते ग्रहणाधिकारः षोडशोऽध्यायः समाप्तः) (च) १. परिलेषो for (परिलेखो) २. षोडशो for (षोडषो) ४. 'इति' से 'समाप्त:' तक लुप्त । ५. वलनद्या for (वलितज्या ) ३. मक्को: for (मर्केद्रो:) (ङ) १. परिलेख for (परिलेखो) ५. वलनजीवा for (बलिनज्या) १४. इति श्री ब्राह्मस्फुट सिद्धान्ते ग्रहणोत्तराध्यायः षोडश: for ( इति श्री ब्रह्म- गुप्ते ग्रहणाधिकारः षोडषोऽध्यायः समाप्तः )