( २१५ ) कोणछायाकर्णेन भक्तमवलंबकेन संगुरिगतम् । इप्टापक्रमजीवा त्रिप्रश्नोक्त्या स्फुटोकतः ॥ ५८ ॥ मध्यमगति स्फुटगति त्रिप्रश्नात् सोत्तरान् विजानाति यः । स भवत्याचार्यो ब्रह्मोक्ता ज्ञानतंत्रज्ञाः ॥ ५१ ॥ अध्यायः पंचदशस्त्रिप्रश्नस्योत्तरं यदीह नोक्तम् । आर्याषष्ट्योक्तं गोलाप्रेक्ष्य बुद्धिमता ॥६० ॥ इत्तिब्रह्म गुप्ते त्रिप्रश्नाध्याय: पंचदश अध्यायः समाप्त: ६ ४ ५८. (ङ) २. कोणच्छाया for (कोणछाया) ५९ (घ) १. 'यः' दूसरी पंक्ति का पहला पद है । २. तंत्रज्ञ: (च) for ( तंत्रज्ञा:) (ग) ३. मध्यगति: for (मध्यमगति) ४. स्पष्टगतिः for (स्फुटगति) ५. वै ब्रह्मोक्तानान्य तंत्रज्ञा for (ङ) ३. मध्यगति for ( मध्यमगति ) ६. प्रश्न for (त्रिश्नात् ) ५. ब्रह्मोक्ताम् for (ब्रह्मोक्ता) १. कर्कोतः for (कोत: ) ६०. (घ) १. यदिह (ग) (ङ) for ( यदीह) ३. बुद्धिमता: for ( बुद्धिमता) वि० – ४. 'इति' से आरंभ कर 'समाप्त' तक मूल में लुप्त है । (च) १. यदिह for ( यदीह) १. 'य:' लुप्त है (ब्रह्मोक्ताज्ञानतंत्रज्ञाः) ४. स्पष्टगति for स्फुटगति) १. यः' लुप्त । २. योऽन्यतंत्रज्ञः fol (ज्ञानतंत्रज्ञा:) २. प्रेक्ष्य for (दुप्रक्ष्य) (ग) ५. त्रि for ( स्त्रि ) ६. तच्चार्याषष्ट्यो यं for (आर्याषष्ट्योक्त ) ४. इति ब्रह्मसिद्धांते त्रिप्रश्नोत्तर पंचदशोघ्यायः for ( इति ब्रह्मगुप्ते त्रिप्रश्ना- घ्याय: ) ४. 'इति' से 'समाप्त:' तक समस्त लुप्त www (ङ) १. तच्चार्याषष्ट्याऽयं for ( आर्याष्टोक्त ) २. गोल for ( तदुगोलाप्रेक्ष्य)
पृष्ठम्:ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त भाग १.pdf/६०४
दिखावट