सामग्री पर जाएँ

पृष्ठम्:ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त भाग १.pdf/६०३

विकिस्रोतः तः
एतत् पृष्ठम् अपरिष्कृतम् अस्ति

( २१४ स्वहोरात्राम यत्राक्षज्याबलंबकः । क्रान्त्या हो पा दिगम्यता वैद्यावत कर्यादिगस्य खेः ॥ ५५ ॥ नास्तमयस्तंत्र तुला मकरादिस्यस्य नोक्योकंस्य t तन्मध्यांतरलिप्ता मध्यमभुषत्या ह्तो दिवसाः ॥ ५६ ।। कोरणछाया क्रतिदल यदविषुवछायाया रूदानृतबलं प्राच्य परयोः । यद्य क्यंतरं याम्यदिक्स्थं चेत् ।। ५७ ।। २ ५५. ( घ) १. समा ( ग ) for (सम ) २. ज्यावलंबकः कान्त्या for ( ज्याबलंबक: क्रान्त्या) ३. यह पद 'पहली पंक्ति के अन्त में है । ४. भेषादिगस्य (ग) for (ोषा दिगम्यता) ५. तावद्यावत् for (वद्यावत्) (च) १. समा यात्रा for ( सम यत्रा ) ६. कर्क्यादिगस्य for (कर्यादिगस्य ) (ङ) १. रात्रार्थसमा for ( रात्रार्द्ध सम ) ३. 'कान्या' यह शब्द पहली पंक्ति का अन्तिम है। ४. ५. मेषादिगस्य तावद्द्यावत् for ( ह्यषा दिगम्यता वद्यावत् ) ६. कर्कादिगस्य for (कर्यादिगस्य ) ४. मेषादिगस्य for ( ह्ये पादिगम्य) ५६. (च) १. नोदयोऽकंस्य (ग) नोदसेकंस्य for (नोदयोर्कंस्य) २. हुता (ग) (ङ) for (हता) (ग) ३. सूत्रतुला for (स्तत्र तुला) (च) १. नोदयोऽकस्य for (नोदयोकंस्य) (ङ) १. नोदयोऽर्कस्य for (नोदयोर्कस्य ) www.w वि० दूसरी पंक्ति का प्रारम्भ | ६. स्छ for (स्थं) (च) ७. कृतिदल (ङ) for (क्रतिदल) (ङ) ८. कोणच्छाया for (कोणछाया) ४. छ्स्प for (स्थस्य ) २. हुता fox (हता) ५७. (घ) १. पद (ग) (च) (ङ ) for ( यद ) २. रुदग्नृतलं (ग ) (ङ ) for ( रुदानृतल ) वि० श्लोक की पहली पंक्ति समाप्त | ३. 'प्राच्य परयोः' दूसरी पक्ति के प्रारंभिक पद हैं (ग) ४. यद्य क्यमंतरं (ग) (च) (ङ) for ( यद्य क्यंतरं ) (ग) ५. छाययो for ( छायाया) ३. प्राच्य पराया (ङ) for (प्राच्यपरयोः) २. रुदग्नृतबलं for ( रुवानृतबलं) ५. विषुवच्छाययो for (विषुवछायाया)