(, २०६ ) अष्टचरार्द्धयस्य ज्या क्षयवृद्धि ज्यातदकंवघकृत्या । त्रिज्याविषवद्याया चधवर्गो युतवधछेदः ॥ ३७॥ ध्यासार्द्धक्रेते मूलं क्रांतिज्यावासदलगुणा भक्ता । जोनभागजीवया लब्धचापमर्कपादः प्राग्वत् ॥ ३८ ॥ विषुवछाया भक्ता स्वचरार्द्धज्येष्टपात्यया भक्ता गुरिगता | लब्धस्य चापमिष्ट छायायाश्चरदल प्रारणाः ॥ ३९ ॥ स्वच राज्याभक्ता विषुवछायेष्ट चरदल अनाम् । गुरिणताज्येष्ट चरदल विषुवछाया फलं भवति ॥ ४० ॥ 3 ३७. (घ) १. चरार्धस्व (ग) इष्टचरार्द्धस्य for (अष्टचरायस्य २. कृत्याः (ग) कृत्या for ( कृत्या) ४. हृताछदः (घ ) हुतछेद: for ( युतवच्छेदः) (ग) १. अष्टचरार्द्धस्य ज्या for (भष्टचरार्द्धयस्य ज्या) २. कृत्या for (कृत्या ) ४. हृतछेद: for (वछेदः) ३. वर्गो for (वघवर्गो) (ङ) १. इष्टचरार्धस्य for (श्रष्टचराद्धं यस्य) ५. विषुवच्छाया for (विपूवछाया) ४. सुतहृतरछेद: for (युतवघद्धेदः) ३८. (घ) १. कृतेर्मूलं (ग्र ) भुक्तर्मूलं for (क्रतेमुलं ) २. व्यास (ग ) (ङ) for (वाम) ३. जिन (ग) (च) (ङ) for (जीन) ४. मर्क: for (मर्क) ५. पदैः (ग) (ङ) for (पादै :) (ग) ६. लब्धं for (लब्ध) (च) १. कृते for ( कृते ) (ङ) १. कृतेर्मूलं for (क्रतेमूलं) ४. मर्क: for (मर्क) ३९. (घ) १. व्यया गिता (ग) न्यया गुरिणता for (त्यया भक्ता गुरिंगता) (च) १. ज्येष्टयान्यया सुसिता for (ज्येष्टयात्ययाभक्ता सुरिषता ) (ङ) २. विषुवच्छाया for (विषुवछाया) १. उन्ल्यया for (त्यया) ३. मिष्टच्छायाया for (मिष्टछायाया) (घ) १. वरार्द्धज्या (ग) व्यचरार्द्धज्या for ( चराहॅज्या) २. चरदलासूनाम् (ग) (ङ) for ( चरदलश्नुन / म् ) (ग) ३. ज्ययैष्ट for ज्ययेष्ट) (च) २. चरदलामूनां for ( चरदलश्रुनाम्) (ङ) १. चरार्धेज्या for (चरार्द्धज्या) ४. विषुवच्छायेष्ट for ( विषुवछायेष्ट ) ५. विषुवच्छाया for (विषुवछाया) ३. द्येष्ट for (ज्येष्ट) ३. ज्ययेष्ट for ( ज्येष्ट)
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