{ १६७ ) ५ अध्यर्द्धा समक्षेत्रारणां मध्यगते लिप्तिकाः शशिनः । अध्यका भभोगलिप्तास्तदेक्योना ॥ ४९ ॥ मंडललिप्ताः शेषो भोगोभिजित् शशांक भगरणा था । ४९. (घ) ४ त्रिघनगुणाः संशोध्या: कल्पदिनेम्यो यदवशेषम् ॥ ५० ॥ सद्भगरदिनभोगो भिजितो भभोगलिप्तोनाः । भानि ग्रहभुक्तकला गतगम्या गतिहूता दिवसः ॥ ५१ ॥ 5 भफलं प्रोक्तमभिजितो मंगलपात्रासु संहिताकारैः । यैस्तद्भोगोनोक्तास्ते गरणकाः संहिताबाह्याः ॥ १२ ॥ ४ mmmmmm (वि० - इसकी श्लोक संख्या ५० अंकित है ) १. तवैक्योना: (च) (ङ) for ( तदैक्योना ) (ग) २. अव्यद्धार्द्ध for ( भव्य ) ३. मध्यगति (ङ) for (मध्यगते) (च) ४. अध्यध्यर्द्धक for (क) ५. (वि० – यहां क्रमसंख्५०) (ङ) (ङ) २. अपर्धा for (अध्य) ४. अध्यवर्धक for (अध्यर्द्धक) (वि० - इसकी क्रमसंख्या ५१ है ) ५०. (घ) १. भोगोऽभिजित (ग) भोगोभिजित: for ( भोगोभिजिज्) (ग) २. शशी for ( शशांक ) ३. भगण for ( भगरणावा) (च) ४. (वि० - महां क्रमसंख्या ५१ है) (ङ) (ङ) १. अभिजितोभोग: for (भोगोभिजित) ५१. (घ) ( वि० – इसकी क्रमसंख्या ५२ है। १. भुक्तिभगाभिजितो (ग) दिनभुक्तिर्भोग for (दिनभोगो) २. हृता (ग) (च) for (हुता) (ग) ३. लिप्तीनाम् for (लिप्तोना:) ४. भुक्ति for ( भुक्त) ५. दिवसा for (दिवसा: ) (च) ६. (वि० - यहां क्रमसंख्या १२ है) (ङ) (ङ) १. अभिजितो for (भिजतो) ७ + भोगो +
५२. (घ) (वि० इसकी क्रमसंख्या ५३ है) १. नोक्तस्ते (ग) (ङ) for (नोक्तास्ते) ( ग ) २. सहिता for (संहिता) (च) ३. यात्रासु for (पात्रासु) ४. (वि० - यहां क्रमसंख्या ५३ अंकित है) (ङ) (ङ) ३. यात्रांसु for ( पात्रासु)