3 ५ ६ स्वोच्चं विशोध्य कृत्वा प्राग्वालमृगधनं विपर्यस्वम् | कार्यामनष्टेस्पष्टे पुनः पुननिश्चलो मध्यः ॥ २७ ॥ मानार्द्धात् षष्टिगुरगाभुक्ति तान्नाडिका दिलब्धेन । Y ६ रायंतान प्रारणादि पश्चादेतोसंक्रांतेः ॥ २८ ॥ 9 ४ संक्रांति पुष्यकालो यल्लब्धं नाडिकादि तद्विगुणम् | स्नानजपहोमादिकोत्र धर्मो विशिष्टफल ॥ २६ ॥ २७. (घ) १. विविशोध्य (ग) स्वोच्चविशोध्य for (स्वोच्चं विशोध्य ) ( वि० इसकी क्रमसंख्या २८ अंक है) (ग) २. विपर्यस्तम् (ङ) for (विपर्यस्वम्) ३. कार्यमनष्टे for (कार्यामनष्टे) (च) ४. कृत्वा for ( कृत्वा ) ५. पुनः for (पुनः) ६. (वि० यहां क्रमसंख्या २८ कित है) (ङ) (ङ) १. स्वोच्चादू for (स्वोच्च ) ३. कार्य मनष्ट स्पष्टे for (कार्यामनष्टेस्पष्टे) २८. (घ) १. प्रागादिः (ग) fox ( प्राणादि ) २. पश्चांदतोर्क (ग) for (पश्चादेतो ) (वि० इसकी क्रमसख्या २६ अंकित है ) (ग) ३. हृता (ङ) for (हता) ४. संक्रान्ते for (संक्रान्ते :) (च) ५. षष्टी for ( षट्टि:) १. प्रागादि: (ङ) for (प्राणादि ) २. पश्चादंतोक संक्रांतः for ( पश्चादेतोर्कसंक्रांते :) ६. (वि० यहां क्रमसंख्या २१ अंकित है) (ङ) (ड) २. पश्चादंतोऽ for (पश्चादेतोकं) ७. मानार्धात् for (मानार्थात् ) २६. (च) १. पुण्यकालो (ग) (च) for (पुष्यकालो ) (वि० इसकी क्रमसंख्या ३० अंकित है) (ग) २. होमदानादि (ड) for (होमादि) ३. फलम् for (फल) (च) ४. (वि० यहां क्रमसंख्या ३० है ) (ङ) । (ड) १. पुण्यकालो for (पुष्यकालो ) ४. तद्विगुणम् for ( तद्विगुणम् ) २. होमदानादिकोऽञ for (होमांदिकोत्र ) ३. विशिष्टफल: for (विशिष्टफल)
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