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पृष्ठम्:ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त भाग १.pdf/५७२

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( १८३ ) खंक्रांन्तेरावंतौ ग्रहस्य यो राशिभतिथिकरणांतोन् । व्यतिपातातौ वा यो बेत्ति स्फुटगतिज्ञः सः ॥ ६॥ व्यासदल मितरजीवाभुजकोद्यशो क्रमज्यया होनम् । कोटिभुजज्या व्यासार्द्धकृति विशेषात्पदं चान्या ॥ ७ ॥ कोटिज्या द्विभुरगया गुरुततोनायाः | मृगकर्यादौ त्रिज्यां तत्फलकृतियुते पदं करणः ॥ ८ ॥ त्रिज्यांत्यफलत्वतियुतेः कर्णकृतेश्चतरेवशेषं यत् । द्विगुणात्यफलहृतं तरकोटीज्या बाहुजीवातः ॥ ६॥ २ ६. (घ) १. करणान्तात् (ग) (च) for (करणांतान्) (ग) १. राद्यंतो for ( रायंती) ३. तिथिक oि (तिथि) 3. (घ) १. ज्येयाहीनाम् (च) for (ज्यानम्) २. वान्या for (चान्या ) (ग) ३. कोट्य शोत्क्रम (च) for (कोशोकम) (ङ) ३. कोट्य शोल्क्रम for (कोशोकम) ५. ( घ) १. गुरणयांत्यफल (ग ) (च) for ( गुणांत्यफल ) २. ज्यया (ग) (च) for (ज्यता) ३. त्रिज्यांत्यफल (ग) for (त्रिज्यां तत्फल ) ४. युने: (ग) (च) for (युतेपदं ) (च) ६. मृगककर्यादी for (मृगदी) ३. त्रिज्यांत्यफल for (त्रिज्यांतत्फल ) ५. कर्ण्य for (कर्प: ) (ङ) १. इन्स्यफलज्या गुरिणतया for (गुसांत्यफलज्यता) ३. त्रिज्यान्त्यफलज्या for (त्रिज्यांतत्फल ) ४. युतः for ( युते ) ३. (घ) १. त्रिज्यांत्यफस्वति for (त्रिज्यांत्यफलत्वति) २. तत्कोटिज्या ( च ) (ङ) for (तत्कोटीज्या) (ग) ३. कृति for ( त्वति) ४. हृतं for (हृतं ) (च) १. त्रिद्यांत्य for (त्रिज्यांत्य ) ३. फत्वतियुतेः for (फलत्वतियुते.) (ङ) ३. कृतियुते: for ( त्वतियुतेः) ५. तरेऽवशेषं for (तरेवशेषं ) ६. जीवास्त: for. (जीवातः)