५ सहिता विक्षेपास्तच्चापशिकवशाददग्याम्या | एवं विक्षेपांशाः तक्रांत्यँशंध्रुवो रविवत् ॥ ४८ ॥ उनैमानेषचार्द्धात् गृहयोमध्यांतरे युतिगृहयोः । समलिप्तिको गृहरणदधिके स्फुट मानयोगात ॥ ४ ॥ समलिप्तिकालिकार्कात् कृत्वा लग्नं स्वदेशराश्युदयैः । गृहयोः समलिप्तिकयोः स्वदिनोदिननाडिका प्राग्वत् ॥ ५० ॥ अधिक दिनोदितघटिकाभिरूनदिननाडिका गुरगा भक्ताः । अधिकदिननांडिकाभिः फलनाड्यो यदि भवन्त्यूनाः ॥ ५१ ॥ ४८. (घ) ४. विक्षेपांशा (ग) for (विक्षेपांश ) १. यास्या: (ग) (च) for ( याम्या) ५. तत्क्रांत्यंश (च) for ( तक्रांत्यंश ) (ग) २. विक्षेपांशस्तत्क्रान्त्यशा for (विक्षेपांशाः त क्रांत्य ) ( क ) १. यामा: for ( याम्या) २. विक्षेपाश for (विक्षेपांशाः) ३. जातैविक्षेपानयनम् for (ध्रुवोरविवत् ) ४६. (घ) २. ऊनेमानैक्या (ग) (च) for (उन मानक्यार्थ्यात् ) ३. ग्रहयोध्यांतरे (ग) (च) for (प्रयोमध्यांतरे ) ४. ग्रह: for ( इयोः) (ग) १. ग्रहणवदधिके for ( ग्रहणदधिके ) ५. योगा for (योगार्द्धात्) (च) ४. ग्रहयौ for (इयोः) ( क ) १. वदधिके for ( दधिके) ५०. (घ) २. राश्युदय (ग) for ( राज्युदयैः) १. नाडिका: (ग) स्वदिनोदितनाडिका for (स्वदिनोदिननाडिका (ग) ३. स्वदेदेश for ( स्वदेश ) (च) ४. कालिका for (कालिकार्कात् ) १. स्वदिनोदिननाडिका: for ( स्वदिनोदिननाडिका) ५. प्रग्बत् for (प्राग्वत्) ( क ) ९. स्वदितनाडिका for (स्वदिनोदिननाडिका) ४. कति for ( र्कात् ) ४. भवत्यूनम् for (भवन्त्यूना:) ५१. (घ) २. मनाइयों for (नाड्यो) (ग) ३. भक्ता for ( भक्ताः ) (क) १. मुख for (दिन)
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