४ नवरधिकांशाना क्रमज्यया संयुतो क्रमत्रिज्या | चन्द्रप्रसारण गुरिता द्विगुरणा व्यासार्द्ध भक्तान्यत् ॥ १२ ॥ ६५ । ४० प्रथमं ग्रुषलं रात्रौ दिवसैन्यसंध्ययोस्त॒वैक्यार्धम् । ज्यासर्वाददावसितस्य सितं श्रवणं गत्या ॥ १३ ॥ शशिमानपादवर्गी नामाद्ध सितांतरार्द्ध भक्तयुतः । परिलेखसूत्रमध्ये शुक्लेव परिलेखः ॥ १४ ॥ ु wwww ww/www/www/ १२. (घ) ३. रधिकांशा: नां (ग) रधिकांशानां for (रधिकांशाना ) २. संयुतोत्क्रम (ग ) संयुतोत्क्रमे (च) for (संयुतोक्रम) ४. द्विगुण for (द्विगुरणा) (ग) ५. ६५४० for (६५१४०) (च) ३. रधिकांशा: नt for (रधिकांशानां) नचते रविकांशानां for (नवतेरधिकांशाना ) २. क्तम for (क्रम ) १३. (घ) २. दिन्य for ( दिवसेन्य ) ३. वर्गोग्रास for (वर्गोज्यास) ४. श्रवण (च) for (श्रवरणं ) (ग) ५. कर्णेन चन्द्रविवे शेषस्य ग्रासवद्वर्ण: for (वर्णो ज्यासवदिदावसितस्य ) (च) ६. तदैवघाट for ( तदैक्याम् ) (क) १. शुक्त (शुबलं) for ( शुक्लं ) २ दिवसेन्यत् for ( दिवसेन्य ) ३. वर्गोग्रासर्वाददावसितेस्य for (वर्गोज्यासर्वाददासितस्य ) ४. श्रवण for ( श्रवणं ) १४. (घ) ४. परिलेख शुल्केव (ग) परिलेखसूत्र शुद्ध ज्यैव for (परिलेख- सूत्रमध्ये शुक्ले दैव) ३. शुल्केर्द्धज्येव for (शुद्धदेव ) ५. परिलेषः (च) for (परिलेख:) (ग) २. पादवयोगाना for ( फादवर्गोनामार्द्ध) ६. वरार्द्ध for ( तरार्द्ध) ७. भृक्तयुक्तः for (भक्तयुतः) (च) ४. सूत्रमद्धेच for (सूत्रमध्ये) ३. शुक्लेद्धष्ट व for ( शुक्लेव ) ५ परिलेष: for (परिलेख:) (क) १. शैशमान for ( शशिमान ) २. पावमानार्द्ध for (पादवर्गोनामा) ३. शुक्लेर्द्धज्येव for ( शुक्लेद्धेन्दैव)
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