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पृष्ठम्:ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त भाग १.pdf/४७४

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( ८५ } गृहाभास्करांतरैः प्राक् पश्चादग्रहान्तरंर्यस्मात् । Fairat Esaredentaये तदानयनम् ॥ १ ॥ प्रागुनभुक्तिरूनो दृश्ये दृश्यो रविरधिकभुक्तिः । rareastfeerifतरधिको यो गृ॒हो ल्पगतिः ॥ २ ॥ विक्षेपसत्रिराशिकान्तिवधो व्यासदलहतो लिप्ताः । शोध्यास्तयोः समदृशोर्यदन्यदिशो गृहे क्षेपाः ५ ॥ ३॥ १. (घ) १. ग्रहभास्करान्तरै: (ग) ग्रहभास्करांतरैः for ( ग्रहोभास्करांतरै :) (ग) २. वक्षे for ( वक्ष्ये) (क) यह श्लोक उपलब्ध नहीं है । (च) १. ग्रहभास्करांतरैः for ( ग्रहाभास्करांतरै:) ३ प्रापश्चादक ग्रहांत for (प्राक् पश्चादग्रहांत रे ) ४. स्वाशै for (स्वांशे ) ५. दृश्या for ( हं श्या) २. (घ) १. रवेरधिकभुक्ति: (च) for (रविधिकमुक्तिः) २. गति (च) for ( गति :) (ग) ३. दृश्योश्यो for ( दृश्ये हश्यो ) ४. पश्चाद्रिश्योरधिक for (पश्चादृश्योऽधिक) यह श्लोक उपलब्ध नहीं है । (क) (च) ५. दृश्यो for ( दृश्यो) ३. (घ) १. यंद्यन्यदिशो (ग ) (च) for ( र्यदन्यदिशो) २. है (ग) for (ग्रहे) (ग) ३. हृतो for (हतो) ४. समद्दिशो ( च ) for (समहशो) INNAN. (क) यह श्लोक उपलब्ध नहीं है। (च) ५. क्षेप्या: for (क्षेपाः)