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पृष्ठम्:ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त भाग १.pdf/४७३

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( ८४ ) इष्टग्रास विमर्दस्थित्यति लम्बा नाद्येषु । आर्या षड्विंशत्यर्कग्रहरणपंचमोऽध्यायः ॥ २६ ॥ इत्ति पंचमोऽध्यायः ॥ २६. (घ) २. लंबनाद्येषु (ग) for (लम्बानाद्येषु ) २. षड्विशत्यार्क (ग) (च) for ( षड्विंशत्यर्क) ३. ग्रहां (ग) for (ब्रहण) (ग) ४. ' इति' से 'अध्यायः' तक इस प्रति में लुप्त | केवल समाप्ति सूचक छः छः, छः, अंकित हैं यह श्लोक इस प्रति में नहीं है । (च) १. लंबनाधु for (लंबनायेषु ) ३. 'इति' से 'अध्यायः' तक लुप्त है ।