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पृष्ठम्:ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त भाग १.pdf/४५६

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सूर्यज्या जिनभागज्यया गुणाक्षज्ययाऽयवा भक्ता । द्वादशरिता विवेच्छाया विभक्ता वा ॥ ५२ ॥ द्वादश विषुवच्छाया गुणिते पृथगअलंबजीवे वा । क्रान्तिहते सममण्डलकरंग प्राग्वत् पृथक् छाया ॥ ५३ ॥ अर्काप्रा वर्गानं नृज्या वर्गा ५३४६४५० मर्फ १४४ कृतिगुरितं | आधान्योत्रा द्वादशविषुवच्छाया वधो हतयोः ॥ ५४ ॥ 3 3 ५२. (घ) १. ज्ययाथवा (च) for (ज्ययाऽयवा) २. विषुवछाया (ग) for ( विषुव च्छाया ) (ग) ३. दिनभागज्यागुणा for (जिनभागज्यया गुणा) (ख) ( क ) ४. अग्रात् (ख) अग्र for (ग्रा) (ख) ५. गुरणक्षयाथवा for ( गुणाक्षज्ययाऽथवा ) ६. 'ज्यया' लुप्त पद है। ७. विभक्त for (विभक्ता) (च) २. विषुववछाया for (विषुवच्छाया) ५३. (घ) १. विषुवछाया (ग) (च) for (विषवछाया) २. ह्ते (ग ) ( क ) (च) for (हते) ( ख ) ३. छाये for (छाया) (ग) (ख) पृथकायें for ( पृथक् छाया) ४. पृस्थगक्ष for ( पृथगक्ष ) ५. करण for (करण) (च) ३. छायो for (छाया) ५४. (घ) १. वर्धा ५३४६४५० for (वर्गार्व ५३४६४५०) (ग) वग्रर्धि (ख) वर्गा for (वर्गाधं ) २. मर्काकृतिगुणितं १४४ (ख) धर्मकृति for (मर्क १४४ कृतिगुणित ) ३. आद्योयोग्रा (ग ) (क) (ख) आद्योपोग्रा (च) for (आद्यायोग्रा) ४. विषुवछाया (ग) (च) for (विषुवच्छाया) ५. हृतयोः (ग) (क) (ख) ह्तयो for ( हतयोः) www. (ग) ६. वनं fox (वर्गो) ७. त्रिज्या (क) (ख) for (नॄज्या) वि० श्लोक में दो गई संख्याएं इस प्रति में नहीं है । (क) १. वनधर्मकं कृति for (वर्गार्थ ५३४६४५० मर्क १४४ कृति) (च) =कग्रा for (अ) ६ वर्ग for (वर्गोन) १. वर्गार्द्ध ५३४६४५० for (वर्गार्व ५३४६४५०) २ कृतिगुणितं १४४ fox (मर्क १४४ कृति गुरिणत ) ५. हृतयोः for (हृतयोः)