७. ८. ( २५ ) 3 कृतनव पंचयमा नन्द चन्द्र दन्ताष्ट यमगुण रामनवयमाः | शशियम खरामाः मुनिपक्षाः मुनयोष्टयमास्त्रिरसा नववेदयमामुनिगुणा हुताशना वसुगुरणसमुद्राः ॥ ६ ॥ यस्ताः ॥ ५॥ रुद्र शशांका: समुद्रमुनिचन्द्राः । ४ रूपेन्द्रियेषवोरस नगर्त वश्चन्द्रशीतकरवसवः । वसुशरनन्दाः सागररुद्रशशांकाः नवागाकः ॥ ७ ॥ त्रिविषयवेदशशांका: पंचत्रिरसेंदवोब्धियमधूतयः । प्रतिधृतिस्वयमानवशशियमपक्षा सागर द्विजिना ॥ ८ ॥ 3 (घ) १. यमा (च) for ( यम) (ग) वि० यहां चौथे और पांचवें श्लोक की चारों पंक्तियों को कुछ भिन्न प्रकार से लिखा है । (क) (क) १. क + षट् छिद्रेषु जिना २४५६+ २. यमा: + २५६४ + for ( यमा) ३. चन्द्रमुनिपक्षा: २७१६ for (चन्द्रद्रताष्ट्र) १. यमा: +२८३२ for ( यम) | इसके पश्चात् दूसरी पंक्ति प्रारम्भ ४. +२९३३+ ५. +३०२१+ (ख) यहां पर यह श्लोक 'लुप्त' है । (ग) ३. गुण (च) for ( गुरणा) ( क ) ४. रुद्रा: for ( रुद्र) (च) २. कुताशना for ( हुताशना ) (घ) १. ववश्चन्द्र for ( र्तवश्चन्द्र ) (क) २. शशांका (च) for ( शशांका: ) (ख) ३. नन्दा for ( नन्दाः) ४. नवागा for ( नवागाक:) (घ) १. द्विजिना: (ग ) (च) for (द्विजिना :) २. ख ( क ) (च) for (स्व) (ग) ३. पक्षा: (क) fox (पक्षर) ( ख ) ४. भि for ( त्रि) (वि० देखिए पृष्ठ २६ -- सारणी के लिए)
पृष्ठम्:ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त भाग १.pdf/४१४
दिखावट