( २२ ) ५ ४ २ मध्यगतिज्ञं वीक्ष्य श्री घेणार्यभट विष्णु चन्द्रज्ञाः । सदसि न भवन्त्यभिमुखाः सिंहं दृष्ट्वा यथा हरिगाः ॥ ६० ॥ युगभगरणमान याताहर्गण दिनवारमध्यमाद्येषु । मध्यमगति द्विषष्ट्र प्रथमकृतो है ॥ ६१ ॥ ४ ६०. (ग) १. वीक्ष for (वीक्ष्य) R. fegt for (gr) (क) ३. श्रीहर्षणार्य for ( श्रीषेणार्य ) ( ख ) ५. विभुचन्द्राद्या for (विष्णुचन्द्रज्ञा :) ६. हरिण : for (हरियाः) ६१. (घ) १. हर्ग्रण for ( हर्गण) २. द्विषष्टचार्यां (ग) द्विषटचा (क) द्विषष्टर्याणां for (द्विषष्टचार्याणां) ३. प्रथमः कृतोध्याय: (ग) (क) प्रथमा: for (प्रथमकृतो है) (ग) वि० + इति श्री ब्रह्मसिद्धाते मध्यमाधिकारः प्रथमः + (ख) ५. यतो for ( याता) २. द्विषष्टार्याणां for (हिषष्ट्या) ( ख ) की दृष्टि से ६३ लोक हैं, २३ वां अधिक है। ( च ) ३. प्रथम: fox (प्रथम) ४. कृतोध्याय: for (कृतो है)
पृष्ठम्:ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त भाग १.pdf/४११
दिखावट