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पृष्ठम्:ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त भाग १.pdf/४०८

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( १६ ) भार्गबर खाष्टं वेदोब्धि वेदखाग्नि कृतैः ४३०४४४८००० भास्कर सुतस्य खत्रय रविगुणशरखगुण समुः ॥ ५३ ॥ ४३०५३१२००० न्यचतुष्टय पक्षे रामगुण नबभिरर्क मंदस्य | ९३३१२०००० इन्दोः खमय यमशरनव पंचव्योम शरचन्द्र ः ॥ ५४ ।। १५०५६२००० खत्रय यमनवपंचाष्ट्र रामभृतिभिः शशांकपातस्य | १८३८५६२००० कल्पगतभगणघातात कुजादिमंदोच्चपातानाम् ॥ ५५ ॥ wwwwwwwwwwwwwwwwNNINIwww. ५३. ( घ) १. भाद्रव ( च ) for ( भार्गव ) २. शरखद for ( शरखगुण ) ( ख ) शरखदहन सुमुद्र : for (शरखगुणसमुद्रः) (ग) ३. खखाष्ट for (खाष्ट ) (क) (ख) खाखाष्ट for (सखाष्ट ) ४. दह्नसमुद्रैः (क) for (खगुगसमुद्रैः) (ख) ५. वेदारच for (वेदादिव) ६. वेदखान्दि for ( वेदखाग्नि) ७. भागस्कर for ( भास्कर) (च) ३. खखाष्ट for ( खखाष्टं ) ४. खद for ( रवगुरण) ५४. (घ) १. त्र्यं for ( खमय ) ( ख ) त्रयमवर for ( समययमसर ) ( च ) खत्रये for (समय) (ग) २. पक्षे ( क ) (च) for (पक्षेदु ) ३. चन्द्रसमः शूत्यत्रय for (इन्दो: खमय) ४. यमशनवशरखशरचन्द्रैः for (यमशरनवपंचव्यो मशरचन्द्रः) पू. १५०५६५२००० (च) for (१५०५९२०००) (क) ३. चंद्रमस: शून्यत्रय for (इन्दो: खमय) ६. शरख for (पंचव्योम ) वि० मूलांकित दोनों संख्याएँ मूल में नहीं है । टीका में अंकित हैं । ( ख ) ७. सून्य for (शून्य) ५५. ( क ) मूल में संख्या उपलब्ध नहीं। टीका में अंकित है। (ख) १. गणोव्ययातात्कंजादि for (गररात्रातात् कुजादि)