पृष्ठम्:ब्राह्मस्फुटसिद्धान्तः (भागः ४).djvu/९७

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(अवशे) घ-२ ६- २ ब्राह्मस्फुटसिद्धान्ते (अवशे) ह-२०-गु घ-२-ऋ गु-८-ह ‘छेद गुणं गुणं छेद' र्मित्यादिना इति विलोम गणि ध-२-ऋ इति कुट्टकाध्यायः । अब अन्य प्रश्न को कहते हैं। ' हिं. मा.-अवम शैष वर्ग में एक घटाकर बीस से भाग देते हैं जो लब्धि होती हैं उसमें दो जोड़ते हैं आठ से गुणा करते हैं दश से भाभ देते हैं दो जोड़ते हैं तो कब अठारह होता है। २६ । (३०) इति कुट्टकाध्याय । अस्मात्पूर्वप्रकारेणा हर्गणानयनं स्फुट मेवेति ॥ २९ ॥ व-७-मू ‘छेदं गुणं गुणं छेदं' इत्यादि से इस विलोम गणित से ह-२०-गु , अवम शेष=१९ ध-२--ऋ इससे पूर्व प्रकारानुसार गु-८-ह अहर्गणानयन स्पष्ट हैं ह- १० -गु इति ।। २६ ।।