पृष्ठम्:ब्राह्मस्फुटसिद्धान्तः (भागः ४).djvu/१३६

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अनेकवर्णसमीकरणबीजम् १२२७ अत्र कुट्टकेन य मानं सुखेन विदितं भवेत् । एवं रूपत्रयस्थाने षट् सप्तादीन् संस्थाप्योपयुक्तक्रिययाऽभीष्टसिद्धिरिति .॥ ५६ ॥ अब अन्य प्रश्नों को कहते हैं। हेि. भा.-रवि के अंश शेष में तीन जोड़ने से बुध दिन में कब कला शोष होता है। वा अंशशेष में छः सात आठ नौ जोड़ने से कब बुध दिन में कला शष होता है इसके उत्तर को एक वर्षाभ्यन्तर में करते हुए व्यक्ति गणक कहलाते हैं। उपप्पत्ति। कल्पना करते हैं अहर्गणप्रमाण=य । रविभगणांश= र । गतभगण=क तब अनुपात से र,य/ककु= गतभ + श्र्ंशशो छेदगम से र. य = ककु. गतभ + अंशशे = ककु . क-+अंशशे समशोधन से र. य-क. कक् = अंशशे इसको साठ से गुणाकर कल्प कुदिन से भाग देने से लब्धि = न =६०(र/ य- क. ककु)/ककु= (६०र. य -६० कृ . कक)/ककु छेदगम से ६० र. य–६० क. ककू ==ककु . न, अतः कलाशे=६०र. य-६० क . ककु ककु. न प्रश्नोक्ति से अंशशे +३ =कलाशे =६० र. य –६० क. ककु-ककुन = र. य - क. कक + ३ दोनों पक्षों में क. कक् जोड़ने से ६०र. य - ६०क. ककु + क . ककु-ककु . न=र . य + ३=६० र . य - (५६ क . ककु+-ककु • न ) दोनों पक्षों में ५६ क . ककु-+-ककु . न जोड़ने से ६० र • य=र. य+३५९ क. ककु +ककु . न दोनों पक्षों में र. य +३ हीन करने से ६० र. थ-र. य-३=५६र.य-३=५६ ककु. क+-ककु. न दोनों पक्षों को ककु से भाग देने से (५६ र,य)/ ककु= ५६क + न यहां कुट्टक से सुगमता से य मान विदित हो जायगा । एवं तीन के स्थान में छः सात-आठ नौ को रखकर उपर्युक्त क्रिया से अभीष्ट सिद्धि होती है इति ॥ ५६ ॥ इदानीं प्रश्नद्वयमाह । अज्ञासममंशशेषं कलासमं वा कलाशेषम् । दिवसकरस्येष्टदिने कुर्वन्नावत्सराद् गणकः ॥५७॥ सु. भा.-कस्मिन्निष्टदिने दिवसकरस्य रवेरंशमानसममंशशेषं वा कृलासम कलाशेषं भवति । अस्योत्तरमावत्सरात् कुर्वन्नपि गरणकः । अहर्गणः=या १ । गतभगणाः=का १ । तदा भगणशेषम्=ग्रभ . या-ककु . का । इदं द्वादशगुण कल्पकदिनैर्विभज्य