पृष्ठम्:ब्राह्मस्फुटसिद्धान्तः (भागः ४).djvu/१३०

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श्रनेकवर्ग्गसमीकरग्गबीजम् १२२१

+भगगशे/ककु ष्रतः ग्रभ.य=ककु. गतभ+भमशोधन से ग्रभ. य-ककु. गतभ=भगग्गशे=ग्रभ. य-ककु. क दोनों पक्षों में य जोङने से भगग्गशे+य=यो ग्रभ. य+ककु. क=य(ग्रभ+१)-ककु। क समशोषनादि से य(ग्रभ+१)-यो/ककु=क यहां कुट्टक से य मान ब्यक्त हो जायगा।

तृतीय प्रश्न में कल्पना करते है। गत भगगा=क, तब , य/ककु=गतभ+भशे/ककु श्रतः ग्रभ य = ककु गतभ+भगशे समशोधन से ग्रभ य-ककु गतभ = भगग्गशे दोनों पक्षों में य जोडने से ग्रभ य +य-ककु गभ=भगग्गशे +य=यो=य(ग्रभ+१)=यो+ककु क समशोधन से य (ग्रभ+१)-यो=ककु क श्रतः व(ग्रभ+१)-यो/ककु=क यहां क्रुट्टक से य मान व्यक्त हो जायगः इति।

चतुथ प्रश्न में कल्पना करते हैं श्रहगग्ग=य, गत भगग्ग=क तब पूर्ववत भगग्गशेष=ग्रभ य-ककु क दोनों पक्षों में गत भगग्ग जोडने से भगग्गहे+गतभ=ग्रब्ग य-ककु क+क=ग्रभ य-क (ककु-१)=यो समयोजन से ग्रभ य=यो+क(ककु-१) समशोधन से ग्रभ य-यो=क (ककु-१) दोनों पक्षों को ककु-१ भग देने से ग्रभ य-यो/ककु-१=क यहां क्रुट्टक से य मान सुगमता से ही श्राजायगा॥५२॥

इदानीमन्यन् प्रश्नानाह।

गतभगग्गनाढू ध्युगग्गात तच्छेषोनात् तदैक्पहीनाद्दा।

तदिवराढू ध्युगग्गं वा यः कथयति कट्टकज्नः सः॥५३॥

सु भा-श्रनन्तरप्रश्नेषु योगस्थाने वेयोगः कृत इति स्पष्टार्थम्। उत्तराय च पूर्वश्नोत्तरे योगस्थाने वियोगंक्रुत्वा कर्म कर्त्तव्यमिति ॥५३॥

अन्य प्रश्नों को कहते हैं।

हि भा- पूर्व प्रश्नोत्तर में योय स्थान में वियोग(श्रन्तर) करके किया करनी चाहियेऽ॥५३॥