( २७२ ) ताजिकनीलकण्ठी । विज्ञापनम् । 'श्रीनीलकंठ दैवज्ञने वर्षफल दो तंत्रोंके उपरान्त जा प्रश्नत्तत्र दनाया था वह इस समय में संपूर्ण नहीं मिलता और प्रश्नविद्या प्रत्यक्षफला है तथा यहां जातक में बृहज्जातक ताजिकमें नीलकंठी सर्व साधारण के अर्थ भाषा होगई तो प्रश्नभी अवश्य होना चाहिये ॥ १ ॥ इसकारण पूर्वाचायका सुन्दर संग्रहीत बहुत गुणवान् जिसमें सभी प्रकारके प्रश्न अनेक शाखाक हैं सब पाठकोंके हितार्थ महीधरनामा ब्राह्मण जिला गढवाल राजधानी' टीहरी निवासीने इसे भाषासहित करदिया ॥ २ ॥ श्रीमान् महाराजा टीहरी गढवालके अधीशं श्री १०८ कीर्तिशाह साहब बहादुरके राज्यप्रवेश ९०४ द्विगुण अर्थात् १८०८ केशालमें बृहज्जातक भाषाटीका रचनाके उपरान्त उक्त नगरमें ॥ ३ ॥ नीलकंठी तीनहूं तंत्रोंकी पाठ सरल ( ज्यो- तिष ) तारा विचार सम्बन्धि फलोंका स्फुरण करनेवाली नीलकं- ठीके अनभिज्ञों (बालकों ) को सहजहीमें बोधरूपा सन्ततीकी सृष्टि उत्पन्न करनेवाली सर्वजनोंका उपकार करनेवाली माहीधरी इस भाषाटीकाको सज्जन पुरुष पण्डित भलेप्रकार प्रकाश करें तथा इसमें जो कुछ मेरी अन- 'भिज्ञता एवं घृष्टता हो उसे क्षमा करें || ४ || और जो लोग पराये छिद्र (दूषण) ढूँढनेमें तत्पर हैं, पराये किये सत्कमका नाश करनेवाले एवं मत्सरी ( परायी ) भलाईसे विनाही आग जलभुन जानेसे पराये प्रयोजनको भंग करने में तत्पर, तथा शुभकयों में शिथिल अर्थात् जिनसे शुभ कर्म अपने हाथसे कुछ नहीं होसकता प्रत्युत बुरे कामोंसे सुख माननेवाले "घमंडखोर" दुर्बुद्धि हैं ये मेरे परोपकारार्थ इस परिश्रम को देखकर निंदा करें अथवा आनं- दित होकर प्रशंसा किया करते रहैं, किंतु जो विज्ञ महाशय निर्मत्सरी, पराये सुकृत्यसे आनंद माननेवाले एवं दुष्कृत्य से चिंता करनेवाले हैं, वे इस कृत्यको सुकृत करें ॥ ५ ॥ खेमराज श्रीकृष्णदास पुस्तक मिलनेका ठिकाना- "श्रीवेइटेश्वर" स्टीम् प्रेस बंबइ.
पृष्ठम्:ताजिकनीलकण्ठी (महीधरकृतभाषाटीकासहिता).pdf/२८०
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