भाषाटीकासमेता । ( २५९ ). लग्नेश सप्तममें सप्तमेश लग्नमें हो तो शिकार बहुत मिले, जो सप्तमेश चतुर्थमें वा दशममें हो तो शिकार थोडाभी न होवे ॥ २८ ॥ . भौमौसबलौसिद्धिरस्तांशमृगयाच्युतिः ॥ लग्नघूनेतत्पतीचहेतुस्तैर्जलजादिंगैः ॥ २९ ॥ बुध मंगल बलवान् हों तो मृगयासिद्धि होवे जो वे सप्तम राश्यंशमें हों तो शिकार हाथसे छूटजावे; लग्न और सप्तम राशि वा उनके पति स्थल जला- काश जैसी राशियोंमें वा जैसे स्वभावके हों वैसीही शिकार भी कहनी ॥२९॥ ऋराक्रांतानियावंतिमन्येभानींदुल योः ॥ तावंतःप्राणिनोवाच्याद्वित्रिप्राः स्वांशकादिषु ॥ ३० ॥ लग्न और चन्द्रमाके बीच जितनी राशि पापग्रहोंसे दबी हों उतने प्राणी शिकारमें मिलेंगे जो वे अपने अंश वा उच्च मित्रांशकोंमें हों तो द्विगुण त्रि.. गुण और वर्गोत्तम में बहुतगुना कहना ॥ ३० ॥ अथ किंवदंती । श्रुतिस्तुलग्नेश्वरशीतगूद्यैःशुभान्वितैः केंद्रगतैस्तुसत्या || पापान्वितैःपापनिरीक्षितैश्च त्रिकस्थितैर्वाभवतीहमिथ्या ॥ ३१ ॥ लग्न, लग्नेश और चंद्रमा शुभयुक्त केन्द्रगत हों तो जनश्रुति सच्ची और पापयुक्त दृष्ट वा त्रिक ६।८ | १२ में हों तो मिथ्या कहनी, लोगोंमें अफवाह कहावत को जनश्रुति वा किंवदंती कहते हैं ॥ ३१ ॥ शुभदृग्योगतः सौम्यांवात्तीसत्यांविनिर्दिशेत् ॥ पापढग्योगतोदुष्टावार्त्तासत्येतिकीर्त्त्यते || लग्नेश्वरेभाविवकेमिथ्यावार्त्ताभविष्यति ॥ ३२ ॥ लग्न लग्नेश और चन्द्रमापर शुभग्रहोंकी दृष्टि वा योग हो तो सौम्य वार्चा सत्य क्रूरवार्चा हो तो असत्य जानना. पापदृष्टि योगसे क्रूर वार्त्ता सत्य, सौम्यवार्त्ता हो तो असत्य जानना और लग्नेश वक्र होनेवाला हो तो सभी वार्त्ता मिथ्या होवें ॥ ३२ ॥ इति श्रीमही • नी • प्रश्नतंत्रभाषाटीकायां दशमभावप्रश्ननिरूपणम् ॥ १० ॥
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