ताजिकनीलकण्ठी । लग्ने कर्मण्याये धनपयुतेशोभनंज्ञेयम् || सक्रूरसप्तमस्थेपथिविघ्नाञ्झटकचतुर्थस्थे ॥ १३ ॥ लग्न दशम वा ग्यारहवें में नवमेश धनेश युक्त हों तो यात्रा शुभ होगी, जो धनेश वा नवमेश पापयुक्त सप्तममें हों तो मार्गमें विघ्न, तथा चतुर्थमें सपाप हों तो कलह होवे ॥ १३ ॥ ( २४८ ) ग्रंथांतरेपांथागमनम् | आगमनेपृच्छायांलग्नेशेलग्नमध्यसंस्थेन || कृतमुथशिलेसमेतिहिसुखमस्ततुरीयगेकष्टात् ॥ १४ ॥ पथिकके आगमनमश्र में लग्नेशसे लग्नस्थित ग्रह इत्यशाली हो वह सुखसे तथा ४ । ७ स्थानमें हो तो कष्टसे आवेगा ॥ १४ ॥ स्थानाच्चलित प्रश्नेलग्नपतौसहजनवमगृहसंस्थे ॥ लग्नस्थेनसुथाशलेपंथानंवहतिपथिकोयम् ॥ १५ ॥ स्थानसे मार्गको चला वा नहीं ऐसे प्रश्न में तृतीयेश ३ वा ९ स्थानमें होकर लग्नस्थ किती ग्रहसे मुथशिली हो तो पांथ मार्ग में है ॥ १५ ॥ रंध्रेथधनेतस्मिन्नाकाशसंस्थेनथशिलेप्येवम् || केंद्रस्थितेत्थशाललग्नेक्षणवर्ज्यमेतिनकदापि ॥ १६ ॥ लग्नेश अष्टम वा धनस्थानमें होकर दशमस्थ किसी ग्रहसे मुथशिली हो तो भी मार्ग चलताहै कहना. केंद्र में होकर दशमेशसे इत्थशाली हो तोभी यही फल है. जो लगेश लनको न देखे तो पांथ नहीं आवेगा कहना ॥ १६ ॥ लग्नाधिपतौवकेलग्नंपश्यत्यसुत्रचंद्रेवा || वक्रगसुथाशलेसतिसमेतिपथिकः सुखंशीघ्रम् ॥ १ ॥ लग्नेश वक्र होकर लग्नको देखे अथवा चन्द्रमा वक्री ग्रहसे मुथशिली हो तो पथिक शीघ्र आवेगा ॥ १७ ॥ अंत्यस्थितलग्नपतौशशिनाकृतमु शिलेद्रुतमुपैति || लग्नाद्वापि चतुर्थाच्छुभावितीयतृतीयगावापि ॥ १८ ॥ लग्नेश बारहवां चंद्रमासे मुथशिली हो तो पांथ शीघ्र आवेगा लग्रसे चतुर्भसे दूसरे तीसरे शुभग्रह हों तोभी शीघ्र आवेगा ॥ १८ ॥ 1
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